रीमा लागू और सलमान खान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मां जैसी प्रेम की मां, गर्लफ्रेंड जैसी सुमन
पिताजी ने मुझे सिर्फ इतना कहा कि मुझे मौलिकता चाहिए। मुझे तुम्हारी जो उपज है, जो जिंदगी तुमने जी है। जैसी मां को देखा है, मुझे वो चाहिए। फिल्म में प्रेम की मां बनी रीमा लागू जी में मेरी मां की छवि है। सुमन में उस लड़की की छवि है जिसे मैं बहुत पसंद करता था। उस एहसास के लम्हे हैं। मैंने अपनी बहन, चाचा, मामी में जो जो देखा, वही सब मैं लिखता गया। पिताजी बस पूछते कि इन दिनों क्या चलता है? वह बोलते गए, मैं लिखता गया। वही सलमान करते गए। हमें पता ही नहीं चला और फिल्म बन गई। लेकिन, अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे असल की ताकत और जिंदगी के अहसासों की ताकत का अंदाजा होता है।