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Sanjay Mishra Interview: टॉयलेट के लिए पूछा तो दीवार का कोना दिखा दिया, फिर बिग बी ने भी किया वही सवाल तो...

सार

Sanjay Mishra Interview: अभिनेता संजय मिश्रा की आवाज ऐसी है कि लोग आंखें मूंदकर भी पहचान लेते हैं। ये खनक सिनेमाघरों में इन दिनों कालजयी किरदार पुम्बा की आवाज के रूप में फिल्म ‘मुफासा’ में सुनाई दे रही है।संजय मिश्रा से ये एक्सक्लूसिव बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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संजय मिश्रा का साक्षात्कार - फोटो : अमर उजाला
दरभंगा से वाया बनारस मुंबई पहुंचे अभिनेता संजय मिश्रा की आवाज ऐसी है कि लोग आंखें मूंदकर भी पहचान लेते हैं। ये खनक सिनेमाघरों में इन दिनों कालजयी किरदार पुम्बा की आवाज के रूप में फिल्म ‘मुफासा’ में सुनाई दे रही है। संजय मिश्रा से ये एक्सक्लूसिव बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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संजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बरसों से चली आ रही ‘मुफासा’ की कहानी में पुंबा का किरदार आपको कैसा लगता है?
मैंने जब पहली बार पहले वाली फिल्म ‘द लॉयन किंग’ देखी तो मुझे पुंबा और टिमोन दोनों बहुत अच्छे लगे। यहां जब हमारे पास ये काम आया तो अच्छा ये लगा कि हमें संवादों की डबिंग के लिए बुलाया गया, वॉयस ओवर के लिए नहीं। ये एक मशहूर किरदार है और इसकी डबिंग दूसरे लोग भी कर ही चुके हैं। 
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संजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इस किरदार की डबिंग आप फिल्म ‘लॉयन किंग’ में भी कर चुके हैं...
हर कलाकार को इस बात का तो एहसास रहता ही है कि कहीं उसके प्रशंसक उसकी पिछली फिल्म से इस नई फिल्म की तुलना न करने लगें। मुझे भी डर था कि लोग, जो वो था ना, वो वो था, जैसा कुछ न कहने लगें। तो सब ढक्कन, पुदीना जैसी सारी बातें दिमाग में आईं। लेकिन मुझे बस यही था कि बच्चों के सामने मेरी इज्जत रख लेना, क्योंकि ये किरदार बच्चों में बहुत लोकप्रिय है। फिल्म तो खैर है ही पूरी दुनिया में मशहूर। 

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मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पुंबा के जो संवाद मयूर पुरी ने लिखे हैं, उसका अंदाज बिल्कुल अलहदा है। आपने इसमें अपनी तरफ से क्या योगदान किया है?
इस किरदार को जो मुंबइया बोली का लहजा दिया गया है, वह बहुत रोचक है। इस मुंबइया बोली का प्रचार प्रसार हिंदी सिनेमा ने बहुत किया है और हिंदी सिनेमा का कोई प्रशंसक इस बोली के बारे में नहीं जानता होगा तो कोई चिरकुट ही इंसान होगा। ऐसी बोली अमिताभ बच्चन ने खूब बोली है। 
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संजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपको ये बोली कैमरे के सामने बोलने का मौका कब मिला?
‘अमर अकबर एंथनी’ देखकर हमने भी उतनी बोली तो सीख ही ली थी जितनी बच्चन सर ने बोली है। हां, ये और बात है कि इसे बोलने का मौका हमें कैमरे के सामने नहीं, बल्कि माइक के सामने फिल्म ‘द लॉयन किंग’ और फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ में मिला है। 
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संजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमिताभ बच्चन से किसी शूटिंग पर पहली बार मिलना कब हुआ? 
बच्चन जी के साथ मैंने एक विज्ञापन फिल्म बहुत पहले शूट की थी। जिस दिन मुझे वह विज्ञापन फिल्म शूट करने का मौका मिला था तो उस दिन मैं बहुत ही बेचैन रहा। बार बार लघुशंका जाने जैसा महसूस हो रहा था लेकिन जहां शूट था वहां वैनिटी वगैरह कुछ नहीं थी। हमने शौचालय के बारे में पूछा तो वहां एक दीवार के साथ बनी संकरी गली में इशारा कर दिया गया। हम वहां तक जाकर लौट आए। हमसे हो नहीं पाया।
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संजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिर वैसे ही शूटिंग कर ली..?
इसी बीच बच्चन जी आ गए तो हमारी बेचैनी और बढ़ गई। वह अपनी गाड़ी से उतरे तो उन्होंने भी पहली जरूरत लघुशंका की ही जताई। उनको भी वही जगह बताई गई और आप यकीन नहीं करेंगे, बिना कोई ना नुकुर किए वह सीधे वहीं चले गए और फारिग होकर आ भी गए। मुझे लगा कि इतना बड़ा सुपरस्टार है, कुछ तो नखरा करेंगे लेकिन नहीं वह इतने अच्छे इंसान हैं कि उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं हुई। अब उसके बाद तो भला हम खुद को कैसे रोक पाते? बच्चन जी ने उस मुक्ताकाश शौचालय का प्रयोग करके उसे फाइव स्टार शौचालय का दर्जा जो दे दिया था।

इस इंटरव्यू का वीडियो आप यहां देख सकते हैं...

 
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