Sanjay Dutt Controversy: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने कोई विवादित बयान दिया हो। आइए जानते हैं इससे पहले एक्टर के कब-कब और क्या कहा था।
संजय दत्त उन अभिनेताओं में हैं, जिनकी छवि सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनका जीवन राजनीति, 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े कानूनी विवाद, जेल और फिर फिल्मों में वापसी जैसे कई बड़े अध्यायों से होकर गुजरा है। इसलिए जब वह देश, राजनीति या सामाजिक माहौल पर कोई टिप्पणी करते हैं, तो उस बयान का असर सामान्य फिल्मी बयान से कहीं ज्यादा होता है।
हाल ही में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दरअसल, अभिनेता कुछ दिन पहले शेखर सुमन के शो में गांधी जयंती विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए। वहां उन्होंने भारत में शांति को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के लोग बेहद अच्छे और बड़े दिल वाले हैं, लेकिन उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती।
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संजय दत्त
- फोटो : सोशल मीडिया
बयान सामने आते ही मचा बवाल
बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। आलोचकों ने सवाल उठाते हुए संजय दत्त को घेर दिया। इसके बाद एक्टर ने एक पोस्ट कर सफाई दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका बयान एक स्क्रिप्टेड, हल्की-फुल्की और हास्यपूर्ण बातचीत के संदर्भ में था। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अभिनेता अपने किसी बयान को लेकर ऐसे घिरे हों।
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संजय दत्त।
1. जेल में रहकर नहीं सीख पाया मराठी
हाल ही में सितंबर 2026 में हुए एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने संजय दत्त से मराठी में बोलने को कहा। इस पर दत्त ने मजाकिया अंदाज में अपनी येरवडा जेल की सजा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जेल में भी मराठी नहीं सीखी।
वीडियो सामने आने के बाद यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। मामला बढ़ने पर मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा गया कि दत्त ने फोन करके उनको स्पष्टीकरण दिया। अभिनेता ने कहा कि अगर उनके मजाक से कोई गलत संदेश गया हो तो वह माफी मांगते हैं।
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बेटी त्रिशाला के साथ संजय दत्त
- फोटो : इंस्टाग्राम
2. त्रिशाला दत्त को लेकर कही थी ये बात
साल 2017 में फिल्म 'भूमि' के प्रमोशन के दौरान संजय दत्त से उनकी बेटी त्रिशाला के बारे में पूछा गया। दत्त ने बताया कि उन्होंने त्रिशाला की पढ़ाई पर काफी ध्यान दिया है और वह फॉरेंसिक साइंस में विशेषज्ञता हासिल कर चुकी हैं।
उन्होंने कहा था कि अभिनय आसान नहीं है और अगर वह फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती हैं तो उन्हें हिंदी भी सीखनी होगी। इसी बातचीत में जब उनसे फिल्म में उनकी ऑन-स्क्रीन बेटी और त्रिशाला के बीच समानता पूछी गई। तो जवाब में अभिनेता ने कहा, 'त्रिशाला एक्ट्रेस बनना चाहती थी और मैं उसकी टांगें तोड़ देना चाहता था, जो मैं यहां नहीं कर रहा हूं।'
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अमीषा पटेल
- फोटो : सोशल मीडिया
3. जब अमीषा पटेल से कही ये बात
2012 में रोहित धवन की शादी के एक समारोह में अमीषा ने कुछ ऐसा पहना था, जिसे दत्त ने बहुत रिवीलिंग माना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अमीषा से कपड़े ढकने के लिए कहा और बाद में उनके दुपट्टे से उनका शरीर ढक दिया।
बाद में दत्त की तरफ से यह स्पष्टीकरण सामने आया कि वह अमीषा को बहन की तरह मानते हैं और उन्होंने उसी भावना से ऐसा किया था। उनके मुताबिक वह अपनी बहनों के लिए भी ऐसा ही करते। इस बात को कई बार अभिनेत्री भी कह चुकी हैं कि जब वह संजय दत्त के घर जाती हैं, तो वेस्टर्न ड्रेस की जगह सूट पहनकर जाती हैं।
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संजय दत्त
- फोटो : सोशल मीडिया
4. महिलाओं की संख्या वाला बयान
संजय दत्त के सबसे पुराने और सबसे ज्यादा चर्चित बयानों में से एक कॉफी विद करण का है। साल 2007 में करण जौहर के शो में दत्त अपनी बहन प्रिया के साथ पहुंचे थे। वहां रैपिड फायर राउंड में जब उनसे पूछा गया कि वह लगभग कितनी महिलाओं के साथ संबंध में रहे हैं- ऑप्शन 50, 100, 150, 200 या उससे ज्यादा। अभिनेता ने इसका जवाब दिया- ज्यादा।
इसके बाद उसी बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें तीन इच्छाएं मांगने का मौका मिले तो वे क्या मांगेंगे? तो संजय दत्त ने कहा, 'पैसा, आजादी और महिलाएं।'
फिर 2018 में उनकी फिल्म 'संजू' में भी उनकी जिंदगी से जुड़े महिलाओं की संख्या का संदर्भ आया। यही वजह रही कि उनकी निजी जिंदगी, महिलाओं के साथ संबंधों और 'संजू' में उनके कैरेक्टर को लेकर बहस हुई।
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संजय दत्त
- फोटो : सोशल मीडिया
5. प्रतापगढ़ में दी गई स्पीच
यह बयान साल 2009 का है। सपा के स्टार प्रचारक के रूप में अभिनेता संजय दत्त प्रतापगढ़ में जादू की झप्पी बोलकर कानूनी शिकंजे में फंस गए थे। दरअसल, संजू बाबा ने तत्कालीन सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप के समर्थन में सभा की थी। उस समय यूपी में बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्यमंत्री थीं।
संजय दत्त ने प्रतापगढ़ की जनता को जादू की झप्पी देने का वादा किया और बोले कि ऐसा ही उपहार वह मायावती को भी मौका मिलने पर देना चाहेंगे। इस बयान पर खूब बवाल भी मचा। अभिनेता के खिलाफ महिला को लेकर आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग का आरोप लगा था।
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पिता सुनील दत्त के साथ संजय दत्त
- फोटो : X
6. जब संजय की बात सुनकर हैरान हो गए थे पिता सुनील दत्त
संजय दत्त दिवंगत अभिनेत्री नरगिस दत्त और दिवंगत अभिनेता सुनील दत्त के बेटे हैं। 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट केस में उनका नाम आने पर सुनील दत्त सदमे में थे। कहा जाता है कि संजय ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उनके पास हथियार थे और जब पिता ने कारण पूछा, तो संजय ने कहा- 'मेरी रगों में मुस्लिम खून है, मैं शहर में जो हो रहा था उसे बर्दाश्त नहीं कर सका।' यह सुनकर सुनील दत्त टूट गए थे।
इन अभिनेताओं ने भी दिए विवादित बयान
हालांकि, संजय दत्त ऐसे पहले अभिनेता नहीं हैं जिन्होंने देश को लेकर कोई विवादित बयान दिया है। इससे पहले जावेद अख्तर, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह और शाहरुख खान के बयान भी विवादों में रहे हैं।
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किरण राव, आमिर खान
- फोटो : सोशल मीडिया
आमिर खान
साल 2015 में आमिर खान ने कहा था कि उनकी पत्नी किरण राव ने एक बार देश में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर चिंता जताई थी। आमिर ने कहा था- 'जब मैं घर पर किरण से बात करता हूं तो वह कहती हैं कि क्या हमें भारत छोड़ देना चाहिए? उन्हें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर लगता है।' इसके बाद अभिनेता की खूब आलोचना हुई और उन्हें देशद्रोही तक कहा जाने लगा।
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शाहरुख खान
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शाहरुख खान
शाहरुख खान ने भी साल 2015 में असहिष्णुता पर टिप्पणी करते हुए कहा था, 'देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और धार्मिक असहिष्णुता सबसे बड़ा अपराध है।' उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बवाल मचा। एक्टर को 'पाकिस्तान चले जाना चाहिए' जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, बाद में शाहरुख ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
नसीरुद्दीन शाह
साल 2018 में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि आज मुझे अपने बच्चों की चिंता होती है, क्योंकि उनका कोई धर्म नहीं है। अगर भीड़ ने उन्हें घेर लिया तो वे कौन-सा धर्म बताएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि कई जगहों पर इंसान की जान से ज्यादा गाय की जान की कीमत समझी जा रही है। इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी। कई लोगों ने उन्हें देश विरोधी तक कहा गया था।