फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Monika Shergill Interview: हमारी सारी कहानियां वैश्विक पसंद की हों, ये जरूरी नहीं, हम अब भारतीय नेटफ्लिक्स है

विज्ञापन
1 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला
बीती छमाही की नेटफ्लिक्स की ग्लोबल इंगेजमेंट रिपोर्ट में भारत में बनी फिल्मों और सीरीज ने भी दमदार तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। नेटफ्लिक्स की भारतीय शाखा की मुखिया मोनिका शेरगिल इसका श्रेय अपनी पूरी टीम को देती हैं। मेरठ में जन्मी और दिल्ली में मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के बाद बरास्ता डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकिंग टीवी चैनलों तक पहुंची मोनिका शेरगिल नेटफ्लिक्स इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट, कॉन्टेंट हैं और ओटीटी पर प्रसारित होने वाली हर भारतीय फिल्म, वेब सीरीज या डॉक्यूमेंट्री को हरी झंडी दिखाने की आखिरी पायदान भी। मोनिका से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक एक्सक्लूसिव बातचीत।
Netflix No. 1: ‘द रेलवे मेन’ बनी भारत की सीरीज नंबर वन, करीना की ‘जाने जां’ ने फिल्मों में पाया पहला स्थान
विज्ञापन

2 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नेटफ्लिक्स का सफर भारत में अब तक काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है, इसके बारे में आपका नजरिया क्या है?
साल 2016 के मध्य में नेटफ्लिक्स की भारत में शुरुआत हुई। पहले तीन साल हम सिर्फ एक वैश्विक सेवा प्रदाता कंपनी के तौर पर काम करते रहे। फिर पहली ओरिजिनल सीरीज जो हमने यहां बनाई वह ‘सैक्रेड गेम्स’ सीजन वन थी। जुलाई 2019 में ‘दिल्ली क्राइम’ शो आया। इसी के बाद हमने भारत में अपनी कार्यक्रम निर्माता टीम बनानी शुरू की। शुरू के जो भी शोज थे, वे सीधे हमारे अमेरिका दफ्तर से मंजूर किए गए थे। इधर, हम ये समझने की कोशिश कर रहे थे कि हम इस देश में क्या बनना चाहते हैं। लोग हमें एक अमेरिकन कंपनी के तौर पर देखते थे जो वैश्विक सेवा प्रदाता कंपनी है और अहम सवाल हमारे सामने ये था कि क्या हम पर्याप्त रूप से भारतीय बन सकते हैं?
विज्ञापन

3 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इसका उत्तर क्या मिला?
पिछले तीन-चार साल में हमने अपनी एक स्पष्ट रणनीति तैयार की। हमने तय किया कि हम एक स्थानीय सेवा प्रदाता कंपनी बनना चाहते हैं जिसकी मौजूदगी पूरे संसार में है। हम अब भारतीय नेटफ्लिक्स हैं। हम यहां से कहानियां लेकर पूरे भारत में इनका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और ये कहानियां उन भारतीयों तक भी पहुंचा रहे हैं जो पूरे विश्व में बसे हुए हैं।

4 of 18
'हीरामंडी' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्या इसका अर्थ ये हुआ कि आप ऐसी कहानियां चुन रही हैं जो वैश्विक पसंद की हों?
नहीं, हमारी सारी कहानियां वैश्विक पसंद की ही हो, ये जरूरी नहीं है। हम अपनी अधिकतर फिल्में और सीरीज भारत के लिए और दुनिया भर में फैले भारतीयों के लिए बनाएंगे। और, इनमें से कुछ कहानियां ऐसी होंगी जो पूरी दुनिया के लिए भी होंगी और ये बारीक सा फर्क हम लोगों को समझा रहे हैं। ‘द रेलवे मेन’, ‘हीरामंडी’, ‘आरआरआर’ या ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ऐसी कहानियां हैं जो दुनिया भर में फैले भारतीय मूल के लोगों के अलावा गैर भारतीय लोगों को भी पसंद आ रही हैं।
विज्ञापन

5 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब कि इरादा भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार दुनिया भर में करना है?
इसे हम कुछ उदाहरणों के साथ और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। विश्व की सारी संस्कृतियां अपना प्रचार प्रसार दुनिया भर में पाती हों, ऐसा नहीं है। कुछ संस्कृतियां निर्यातक स्वरूप की ही होती हैं, जैसे कोरिया। उनका अपना देश बहुत छोटा है लेकिन जो मनोरंजन सामग्री वह बनाते हैं, उसे वह पूरी दुनिया के दर्शकों के लिए बनाते हैं। इसके ठीक विपरीत जापान है। वहां की ज्यादातर कहानियां जापानियों के लिए ही हैं। इसी तरह भारतीय कहानियां अधिकतर भारतीयों के लिए ही हैं। उनकी बसाहट दुनिया में कहीं भी हो सकती है। इसकी जो बारीकियां हैं, उन्हें भारतीय मूल के लोग बेहतर तरीके से समझते हैं। लेकिन, इसमें से ऐसी कुछ कहानियां होगीं जो अमेरिकी, फ्रांसीसी लोगों को भी पसंद आएंगी, यही हमारी बड़ी चुनौती है।
विज्ञापन

6 of 18
'चमकीला' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अकेले भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं, जबकि दूसरे देशों में नेटफ्लिक्स के सामने ऐसी चुनौतियां नहीं होंगी, इसके लिए आपकी क्या रणनीति है?
ये एक बहुत ही रोचक और बहुत ही कठिन चीज है जो लोगों को समझ में नहीं आती है। बाकी देशों में सबकी अपनी-अपनी योजनाएं हैं, अपनी-अपनी भाषाएं हैं। लेकिन, भारत में ऐसा नहीं है। तमिल, तेलुगु और मलयालम में तो कार्यक्रम हैं ही, उसके बाद कभी कुछ मराठी आ जाएगा, कभी कुछ बंगाली आ जाएगा। या वैसी पृष्ठभूमि हो सकती है, जैसे ‘कोहरा’, ‘कैट’ या ‘चमकीला’ पंजाबी पृष्ठभूमि में हैं। ये बहुत ही अनोखी और दुर्लभ चीज है। उसको कैसे हम कायदे से लागू करें, इसे हम भी अभी खोज ही रहे हैं।
विज्ञापन

7 of 18
नेटफ्लिक्स की इंडिया हेड मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नेटफ्लिक्स पर भारत की बात कहने वाली कहानियों की संख्या इधर प्रभावी रूप से बढ़ी है, ये कहानियां तलाशने का मुख्य आधार आपका क्या रहा है?
मैं अपनी टीम से कहती रहती हूं कि अखबार पढ़िए। देश की धड़कन बताने वाली कहानियां तलाशिए। एक छोटा विचार कहीं से भी मिले, वह किसी फिल्म या सीरीज की प्रेरणा बन सकता है। ये कहानियां हमें विशाल और भव्य स्तर पर कहनी हैं। हमारा लक्ष्य ऐसी कहानियां तलाशने पर रहता है जो पहले कही न गई हों और जो दर्शकों को चौंका सकें।

8 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, नए लेखकों का नेटफ्लिक्स तक पहुंचने का सही रास्ता क्या रहता है?
इसके तमाम तरीके हैं। लोग तो लिंक्डइन पर भी कहानियां भेजते रहते हैं। हमें मिले हर इनपुट का हम परीक्षण करते रहते हैं। अगर विचार अच्छा होता है तो हम ये कहानियां सीधे अपने पास मंगा लेते हैं। भौतिक रूप से जितना संभव हो सकता है, इसे हम एक लोकतांत्रिक प्रकिया बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन, एक कहानी को रचने का सही रास्ता निर्माता और निर्देशक के जरिये ही है। हम निर्माता का काम नहीं करना चाहते। हमें ऐसी कहानियां चाहिए होती हैं जो थोड़ी पकाकर लाई गई हों।

9 of 18
द रेलवे मेन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभी जो कुछ नेटफ्लिक्स भारत में बना रहा है, उसमे प्राथमिकता सबसे ज्यादा किस भाषा को है?
मुख्य रूप से हम हिंदी में बना रहे हैं। पर, साउथ सिनेमा में भी हमारे कार्यक्रमों का विकास तेजी से चल रहा है। तमिल और तेलुगु के अलावा मलयालम में भी काम शुरू हो चुका है लेकिन साउथ में मुख्यतया तमिल और तेलुगु पर ही जोर होगा। इसमें भी प्रयोग चल रहे हैं, जैसे ‘राना नायडू’। यहां दो तेलुगु स्टार हैं जिनके चारों तरफ हिंदी के कलाकार हैं। जैसे ‘’रेलवे मेन‘’ में आर माधवन हैं रति शंकर पांडे के रोल में। हम भाषाई पराग को एक-दूसरे तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कोविड ने साउथ सिनेमा को घर-घर तक पहुंचा दिया है। सिनेमा देखने के लिए देश में पर्याप्त संख्या में सिनेमाघर नहीं है। 1.4 अरब की आबादी के लिए सिर्फ साढ़े आठ हजार सिनेमाघर हैं। अमेरिका में इनकी संख्या 40 हजार है। हमारे यहां लोग इतना मनोरंजन पसंद पसंद करते हैं, लेकिन थियेटर ही नहीं है। किसी भी फिल्म को जब आप रिलीज करते हैं तो क्या ही दर्शकवर्ग तक पहुंच सकेंगे, पूरी आबादी के दो फीसदी से भी कम! साउथ सिनेमा को उत्तर भारत में ज्यादा सिनेमाघर नहीं मिलते और हिंदी सिनेमा को साउथ में। ओटीटी ने ये सरहदें तोड़ी हैं।

10 of 18
नेटफ्लिक्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, नेटफ्लिक्स पर पुरानी भारतीय फिल्मों की लाइब्रेरी को लेकर कितना फोकस है?
स्ट्रीमिंग एक अलग विधा है। इसमें लोगों को जो कुछ चाहिए होता है, वह ताजा चाहिए होता है। उनको असंख्य विकल्प नहीं चाहिए। बहुत कम लोग हैं ओटीटी पर जो पुराने टाइटल्स में जाना चाहेंगे। क्योंकि हम लोग इतना ओरिजनल कॉन्टेंट लॉन्च कर रहे हैं कि पुरानी चीजें बहुत कम लोगों के लिए बचती हैं। और, इनका जो दर्शक वर्ग है भी उनके लिए इतनी मेहनत का मतलब नहीं है।

11 of 18
द ग्रेट इंडियन कपिल शो की टीम के साथ मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नेटफ्लिक्स की जो अपनी फिल्में या सीरीज है, उनको दर्शक कितने लंबे समय तक देखते रहते हैं, इसका कोई आंकड़ा भी होता है?
इसको हम ‘लॉन्ग टेल व्यूइंग’ बोलते हैं और ये भी बहुत होती है। खासकर लोकप्रिय फिल्मों और सीरीज के मामले में। जैसे, ‘खाकी द बिहार चैप्टर’ अब भी नंबर छह पर ट्रेंड कर रहा है हमारे ओटीटी पर। ये सीरीज नवबंर 2022 में रिलीज हुई। मई 2024 में इसके ट्रेंड करने का कोई मतलब नहीं है लेकिन ये टॉप 10 में ट्रेंड कर रहा है। इसकी वजह है ओटीटी पर आए नए दर्शक। ‘हीरामंडी’ और ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ से काफी नए लोग आ रहे हैं और इनमें से जिन लोगों ने भी इनके बारे में सुना हुआ है, वे अब जाकर ‘खाकी’ देख रहे हैं, ‘रेलवे मेन’ देख रहे हैं।

12 of 18
राना नायडू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नेटफ्लिक्स पर हाल ही में एक परिवर्तन और देखने को मिला है कि इसने अपनी कहानियों में पारिवारिक मनोरंजन की कहानियां शामिल करनी शुरू की हैं, क्या ये एक सतर्क कोशिश है नेटफ्लिक्स का चेहरा बदलने की?
मैं बहुत खुश हूं ये सुनकर कि आपने इसे अनुभव किया है। ये परिवर्तन हमने इरादतन किया है। नेटफ्लिक्स पर हम सामग्री की विविधता का विस्तार करने जा रहे हैं। पहले जो डार्क और नीश कहानियां ओटीटी पर आ रही थीं, उसमें आपको बदलाव दिखेगा। अभी आप हमारा सीजन 2 देखिएगा ‘राना नायडू’ का। इसके पहले सीजन में जो कुछ लोगों को परेशान करने वाला लगा, उसे हमने बदला है। हम दर्शकों की प्रतिक्रियाओं के हिसाब से खुद को बेहतर बनाने की कोशिश लगातार कर रहे हैं। और, हमारा ये प्रयास इस साल आने वाली फिल्मों और सीरीज मसलन, ‘वाइल्ड वाइल्ड पंजाब’ है, ‘आईसी 814’, ‘कोटा फैक्ट्री सीजन 3’, ‘मंडला मर्डर्स’ और ‘महाराज’ में भी दिखेगा।

13 of 18
बाहुबली 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बीच में ‘बाहुबली’ सीरीज की फिल्मों की कहानी से पहले की कहानी पर सीरीज की खूब चर्चाएं रहीं, नेटफ्लिक्स ने इस सीरीज को बनने के बाद क्यों रद्द कर दिया?
उन दिनों मैं नेटफ्लिक्स में आई ही थी। मैंने इसे देखा और मुझे लगा कि वह उस स्तर की सीरीज नहीं बनी थी जो नेटफ्लिक्स और ‘बाहुबली’ को मिलकर बनानी चाहिए थी। और, ‘बाहुबली’ इतनी बड़ी बौद्धिक संपदा है भारत के लिए। नेटफ्लिक्स के एक सेवा प्रदाता होने के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है सबसे अच्छा देने की।

14 of 18
मोनिका शेरगिल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ओटीटी पर व्यूज की संख्या का बहुत प्रचार होता है। लेकिन, इसकी क्या गारंटी है कि जितने लोगों ने कोई कार्यक्रम देखा, उन्हें वह पसंद ही आया होगा तो दर्शकों की पसंद, नापसंद जानने का भी कोई तरीका है?
ये आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा। इसमें ज्यादातर लोग जाते नहीं हैं। नेटफ्लिक्स पर हर कार्यक्रम के साथ एक सिंगल थम्स अप दिखता है और एक डबल थम्स अप दिखता है। ये किसी भी दर्शक के लिए ओटीटी द्वारा सुझाई जाने वाली सामग्री में तो मदद करता ही है, ये हमें भी इस बात का इशारा देता है कि दर्शक क्या पसंद कर रहे हैं। ये हमें हमारी कार्यक्रम निर्माण रणनीति में भी बहुत मददगार होता है।

15 of 18
टेड सरान्डॉस और मोनिका साउथ सितारों के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मैं नेटफ्लिक्स के सीईओ टेड सरान्डॉस का एक बयान पढ़ रहा था कि भारत में नेटफ्लिक्स के 10 करोड़ ग्राहक बनने की संभावना है, ये सफर नेटफ्लिक्स ने अब तक कितना पूरा कर लिया है?
सच पूछें तो उन्होंने ये कहा नहीं है। अमूमन ऐसे मौकों पर सवाल आता है कि करीब 1.4 अरब की आबादी है तो 10 करोड़ ग्राहक तो होंगे ही। हम देश में अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे लिए सबसे जरूरी पहले ये है कि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड वाले सबसे ज्यादा घरों तक पहुंचे और उन ग्राहकों को तक पहुंचे जिनके पास सेलुलर ब्रॉडबैंड प्लान्स हैं। उसके बाद आते हैं वे लोग, जो इस वर्ग से बाहर के हैं और जैसे जैसे इंटरनेट का विस्तार होता जाएगा, इस वर्ग में भी बढ़ोत्तरी होती रहेगी।

16 of 18
नेटफ्लिक्स इवेंट पर 'फिर आई हसीन दिलरूबा' की टीम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब कि नेटफ्लिक्स के ग्राहकों की ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है जिससे देशवार ग्राहकों का पता चलता हो?
हमने अपने वैश्विक ग्राहकों की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट में बताई थी जो कि करीब 27 करोड़ है। अब बहुत ही संकीर्ण सोच से भी देखें तो हर नेटफ्लिक्स के एक ग्राहक के अकाउंट पर कम से कम दो और लोग इसे देख रहे होते हैं तो ये संख्या कितनी ज्यादा हो सकती है, आप अनुमान लगा सकते हैं। और, इसके अलावा भी लोग हैं जो अपने परिचितों के पासवर्ड का इस्तेमाल करते रहते हैं। इतने विशाल स्तर पर दूसरा कोई ओटीटी न ग्राहकों तक पहुंच रहा है और न ही इतने सारे लोगों के लिए किसी ने अभी तक अपनी प्रोग्रामिंग ही की है।
Kicking Balls: बाल विवाह प्रथा पर ऑस्कर विजेता गुनीत मोंगा की चोट, कैमरे में कैद हुई तीन गांवों की तफ्तीश

17 of 18
नेटफ्लिक्स - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, नेटफ्लिक्स की भारत में राजस्व वृद्धि कितनी हो रही है?
एक कंपनी के तौर पर हम वैश्विक स्तर पर मुनाफे में चल रहे हैं। हमारा राजस्व बीते वित्तीय वर्ष में 25 फीसदी बढ़ा है। हम एक सफल स्ट्रीमिंग की तरफ बढ़ रहे हैं। नेटफ्लिक्स दूसरे ओटीटी से इस मायने में अलग है कि हमारा कारोबार सिर्फ स्ट्रीमिंग का है। हमने अपने ओरिजिनल कार्यक्रमों का गुणसूत्र पता कर लिया है। पहले नेटफ्लिक्स सिर्फ डीवीडी की सेवाएं देने वाली कंपनी थी। फिर, हमने बने बनाए कार्यक्रमों को एक तय मियाद के लिए लेकर दिखाना शुरू किया और अब हम अपने कार्यक्रमों को खुद निर्माताओं के जरिये बना रहे हैं।'
Bujji & Bhairava: प्रभास के फैंस को निर्माताओं ने दी बड़ी सौगात, इस ओटीटी पर देख सकेंगे 'बुज्जी और भैरव'
विज्ञापन

18 of 18
नेटफ्लिक्स और कपिल शर्मा शो की टीम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तो सफलता के मायने नेटफ्लिक्स के लिए क्या हैं?
राजस्व वृद्धि बहुत जरूरी है। इसके बाद दूसरा है दर्शकों का कार्यक्रमों मे रुचि लेना। एक दर्शक का दूसरे दर्शक को किसी अच्छे कार्यक्रम के बारे में बताना, ओटीटी का सबसे अच्छा प्रचार है। कोई भी विपणन नीति इससे बड़ी नहीं हो सकती। और, इन दोनों के बाद आता है मुनाफा। इस मुकाबले में और भी तमाम कंपनियां हैं। मुकाबला इस बात का भी रहता है कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक इकट्ठा कर लो, ज्यादा से ज्यादा डाउनलोड्स करा ले, चाहे वे आपको पैसे दे रहे हों या नहीं। लेकिन, सिर्फ डाउनलोड्स ही किया है और उसकी फीस नहीं दे रहे हैं तो उस प्रयास की कोई कीमत नहीं है।
South Movies: दक्षिण भारत की इन फिल्मों ने हिंदी भाषा में पहले दिन किया जमकर कारोबार, सूची देखकर चौंक जाएंगे
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें