फिल्म- रेशमा और शेरा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आगे बढ़ने से पहले एक किस्सा और, और ये भी अमिताभ बच्चन से जुड़ा है। ये तो आप जानते ही हैं कि निर्माता, निर्देशक और अभिनेता अजय देवगन के पिता वीरू देवगन हिंदी सिनेमा के नामी स्टंट निर्देशक रहे हैं। अमिताभ बच्चन और वीरू देवगन की जान पहचान पहली बार इसी फिल्म रेशमा और शेरा की राजस्थान में आउटडोर शूटिंग के दौरान ही हुई। संयोग ये भी है कि वीरू देवगन जब फिल्म निर्देशक बने तो उसमें अमिताभ बच्चन ने ही अजय देवगन के साथ लीड किरदार किया। हिंदुस्तान की कसम नाम की ये फिल्म भी रेशमा और शेरा की रिलीज वाले दिन ही यानी 23 जुलाई को साल 1999 में रिलीज हुई थी।
लेकिन, किस्सा ये नहीं है जो आपने अभी पढ़ा, असल किस्सा ये है जो अब मैं लिखने जा रहा हूं। हुआ यूं कि जिस दिन अमिताभ बच्चन से मुंबई से जयपुर और जयपुर से सड़क के रास्ते रेगिस्तान में फिल्म की लोकेशन पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां एक शख्स बांस की छुलछुली से मार खा रहा है। पीटने वाले थे फिल्म के स्टंट निर्देशक खन्ना और पिटने वाला शख्स था वीरू देवगन। वीरू देवगन वहां फिल्म के एक कलाकार का बॉडी डबल बनकर खड़े थे। अमिताभ बच्चन ये सीन देखकर और इस सीन में वीरू देवगन की अपनी कला के प्रति निष्ठा और समर्पण देखकर बहुत प्रभावित हुए।
चलिए अब बताते हैं आपको फिल्म रेशमा और शेरा की कहानी। फिल्म में रेशमा का किरदार किया है वहीदा रहमान ने और शेरा बने हैं सुनील दत्त। दोनों के परिवारों के बीच अदावत चल रही है और ये दोनों हैं कि मोहब्बत की पींगे बढ़ा रहे हैं। शेरा का छोटा भाई है छोटू और जिसका निशाना अचूक है। शेरा औऱ छोटू का पिता सगत सिंह पुरानी दुश्मनी के चलते रेशमा के पिता और भाई का खून करवा देता है। रेशमा और शेरा की मोहब्बत खत्म करने के लिए हुए इस खून खराबे में विधवा हुई रेशमा की भाभी का दुख छोटू बौरा जाता है। और बौरा शेरा भी जाता है, वह छोटू को ही खत्म करने की ठान लेता है। फिल्म का क्लाइमेक्स बहुत ही नाटकीय है और शायद फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी भी। कहानी में नवीनता लाने की आखिरी वक्त में की गई कोशिश लोगों को पसंद नहीं आई। कहानी को दूसरी कालजयी प्रेम कहानियों की तरह दुखांत बनाने की जो तरकीब यहां निकाली गई, वह तरकीब फिल्म के लिए नश्तर बन गई।
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