दिव्या दत्ता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राम सिंह की असल पहचान उसका उपनाम चार्ली है। चार्ली है तो राम सिंह। वो नहीं है तो कुछ भी नहीं है। मोबाइल, वीडियोगेम में अटक चुकी दुनिया में अब सर्कस के लिए न तो समय है और न ही जगह। डेरा उठता है। लोग बिछड़ते हैं। कोई किसी दिशा में तो किसी दिशा में भटक जाता है। सबको सुबह शाम के चूल्हे की चिंता है। लेकिन राम सिंह को चार्ली की चिंता है।
राम सिंह को काम तो मिलता है लेकिन संतोष नहीं मिलता। कलाकार पैसे के लिए तो काम इसलिए करता है कि उसे घर भी चलाना होता है। लेकिन, उसके भीतर के कलाकार को अपना हुनर भी दिखाना होता है। जिंदगी के इम्तिहान में वह दोबारा बैठता है और इस बार वह प्यादे से मात खा जाता है। मुसीबतें बढ़ती हैं। उसे अपनी दो बीघा तो नहीं लेकिन कलाकारी से ज्यादा जिम्मेदारी की जमीन बचानी होती है। वह रिक्शा खींचता है। पसीना बहाता है। लेकिन, अपना सपना नहीं भूलता।