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बाइस्कोप: कैमरे के सामने असली मोहब्बत कर बैठे कमल हासन और सारिका, दिलीप कुमार ने ठुकरा दिया अहम रोल

Mon, 31 Aug 2020 06:12 AM IST
Mishra Mishra पंकज शुक्ल
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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आज के बाइस्कोप की फिल्म है 31 अगस्त 1984 को रिलीज हुई निर्देशक राजकुमार कोहली की पिक्चर ‘राज तिलक’। जैसा कि नाम से ही जाहिर है कहानी राज घराने की है तो जाहिर है फिल्म में राजा होगा, मंत्री होंगे। कुछ स्वामिभक्त होंगे, कुछ दगाबाज भी होंगे। पुरानी पीढ़ी होगी। नई पीढ़ी होगी। दोनों पीढ़ियों के बीच पुल का काम करने वाले किरदार होंगे और साथ में होगा खूब सारा गाना बजाना। और, ऐसी कहानियों में हिंदी सिनेमा के कर्णधार बंजारों की एक टोली जरूर ले आते थे। यहां भी बंजारों की टोली रही।

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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कमल हासन और सारिका की मोहब्बत का दस्तावेज
‘राज तिलक’ में ये टोली रही कमल हासन और सारिका वाली। कमल हासन तब 30 साल के हो रहे थे और सारिका रही होंगी कोई 24 की। दोनों एक तमिल फिल्म पहले भी साथ साथ कर चुके थे, ‘टिक टिक टिक’ जिसमें सारिका ने मिस इंडिया का स्पेशल रोल किया और कमल हासन बने एक ऐसे फोटोग्राफर जिस पर खूबसूरत लड़कियों के कत्ल का शक होने लगता है। साल 1981 में बनी फिल्म ‘टिक टिक टिक’ से साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म ‘राज तिलक’ तक आते आते कमल हासन और सारिका की मोहब्बत अपने पूरे शबाब पर थी। दो साल बाद 1986 में श्रुति हासन का जन्म हुआ और उसके दो साल बाद यानी 1988 में अपनी पहली पत्नी वाणी गणपति से तलाक लेने के बाद कमल हासन ने सारिका से शादी कर ली।

राज कुमार कोहली निर्देशित ‘राज तिलक’ कमल हासन और सारिका की छोटी बेटी अक्षरा हासन की सबसे पसंदीदा फिल्म रही है। पसंदीदा फिल्म ये लाखों उन लोगों की भी है जो राजकुमार, धर्मेंद्र, सुनील दत्त, कमल हासन,  हेमा मालिनी, रीना रॉय, रंजीता, योगिता बाली, रजा मुराद, राज किरन, अजीत, ओम प्रकाश, सारिका और प्राण के प्रशंसक रहे। ये तो बस वे कलाकार हैं जिन्हें शायद आज की पीढ़ी भी पहचान लेती है, इसके अलावा फिल्म में दर्जन भर और कलाकार भी हैं जो तब के समय में नामचीन हुआ करते थे। श्रुति हासन से उनकी पसंदीदा फिल्मों पर बात किए हुए अरसा हो गया। ये बातचीत याद इसलिए फिर से हो आई क्योंकि तब अपनी पसंदीदा फिल्में गिनाते हुए उन्होंने ‘राज तिलक’ का भी जिक्र किया था।


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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इसलिए बनी अक्षरा की पसंदीदा फिल्म
फिल्म ‘राज तिलक’ के बारे में श्रुति हासन कहती हैं, ‘मेरी मां को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाने वाली फिल्म ‘परजानिया’ मेरी पसंदीदा फिल्म मां के हिसाब से है। डैडी की ‘नायकन’ और ‘चाची 420’ मेरी फेवरिट हैं। लेकिन, अगर आप दोनों की एक साथ की हुई पिक्चर के बारे में पूछेंगे तो मेरा जवाब होगा, ‘राज तिलक’। ये फिल्म मैंने सैकड़ों बार सिर्फ ये देखने के लिए देखी है कि उन दोनों का रोमांस कैमरे के सामने कैसे लगता है। ये फिल्म अगर आप फिर से देखें और इस बार इस नजरिये से देखें कि उन दिनों दोनों प्यार में गहरे तक डूबे हुए थे तो आपको मेरी बात का असर समझ आएगा।’

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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कमल हासन की दूसरी कमबैक फिल्म
अक्षरा हासन के कहने पर भी और वैसे भी आप फिल्म ‘राज तिलक’ में हुए इस करिश्मे को देख सकते हैं। इसी साल जीतेंद्र, श्रीदेवी और जया प्रदा की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर हंगामा बरपा किया हुआ था। ‘तोहफा’, ‘मकसद’ और ‘शराबी’ जैसी फिल्मों के  बीच ‘राज तिलक’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई की। कुछ तो अपने निर्देशक की शान के चलते, कुछ फिल्म के मल्टीस्टारर लुक के चलते और कुछ कमल हासन की नई नई लोकप्रियता के चलते। कमल हासन ने युवाओं की पूरी एक जमात को तब अपना दीवाना कर लिया था, ये अलग बात है कि ‘एक दूजे के लिए’ के बाद उन्होंने ‘सनम तेरी कसम’, ‘ये तो कमाल हो गया’ और ‘जरा सी जिंदगी’ में फ्लॉप की हैट्रिक बनाई और उन तमाम चाहने वालों का दिल तोड़ा जो हर बार उनसे कुछ नए की उम्मीद लेकर फिल्म देखने जाते रहे। दो फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद कानपुर की निगार टॉकीज में फिल्म ‘जरा सी जिंदगी’ के पहले दिन पहले शो का हाल ये था कि पूरी बालकनी में दर्जन भर लोग भी नहीं बैठे थे। हिंदी सिनेमा में ‘राज तिलक’ कमल हासन की दूसरी कमबैक फिल्म है। उनकी पहली कमबैक फिल्म पहली फ्लॉप की हैट्रिक के बाद थी ‘सदमा’ और ‘सदमा’ के बाद कमल हासन ने  ‘राज तिलक’ के हिट होने से पहले तीन फ्लॉप हिंदी फिल्में और दीं, ‘ये देश’, ‘एक नई पहेली’ और ‘यादगार’।


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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मल्टीस्टारर के मास्टर डायरेक्टर
फिल्म ‘राज तिलक’ के निर्देशक राज कुमार कोहली का हिंदी सिनेमा में बड़ा नाम रहा है। राजेंद्र कुमार के डबल रोल वाली फिल्म ‘गोरा और काला’ के निर्माता के रूप में हिंदी सिनेमा में बड़ी पहचान पाने वाले कोहली ने अपनी ही फिल्म ‘लुटेरा’ की हीरोइन निशि से शादी की और उनके नाम पर ही अपनी फिल्म कंपनी खोली, निशि प्रोडक्शंस। राज कुमार कोहली का नाम देश के गांव गांव तक पहुंचा फिल्म ‘नागिन’ से। अपने नाग की हत्या का बदला लेने निकली इच्छाधारी नागिन की इस कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। रीना रॉय इसी फिल्म से सुपरस्टार बनीं और इसी फिल्म ने राज कुमार कोहली का नाम उन निर्देशकों की लिस्ट में शामिल कर दिया जो न सिर्फ एक फिल्म में दर्जनों बड़े कलाकार लाने का दम रखते थे, बल्कि उनके साथ हिट फिल्म भी बना सकते थे। ये करिश्मा राजकुमार कोहली ने इसके बाद ‘जानी दुश्मन’ और ‘राज तिलक’ में दोहराया। ‘राज तिलक’ राजकुमार कोहली के करियर की आखिरी सुपरहिट मल्टीस्टारर फिल्म मानी जा सकती है। कोहली ने मिथुन चक्रवर्ती को लेकर हिट फिल्म ‘बीस साल बाद’ भी बनाई लेकिन अपने जीवन की अधिकांश कमाई वह अपने बेटे अरमान कोहली को हीरो बनाने के चक्कर में गंवा बैठे। अरमान को लेकर बनाई उनकी तीनों फिल्मों ‘विरोधी’, ‘औलाद के दुश्मन’ और ‘जानी दुश्मन –एक अनोखी प्रेमकहानी’ फ्लॉप रही। ‘जानी दुश्मन –एक अनोखी प्रेमकहानी’ की गिनती हिंदी सिनेमा की चंद सबसे खराब फिल्मों में भी होती है।

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राज तिलक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तकनीशियनों की उम्दा टीम का कमाल
फिल्म ‘राज तिलक’ की कहानी जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि राजघरानों की कहानी है। इस कहानी की शुरूआत होती है अपने ही भरोसेमंद मातहतों के हाथों निपटा दिए गए एक राजा के किस्से से। राजा का बेटा ये बदमाश उठा ले जाते हैं। रानी मां का हाल बेहाल है। उनकी जान बचाने को एक विश्वस्त अपना बेटा आगे कर देता है लेकिन रानी तक पहुंचने के पहले उसे बदल दिया जाता है। पूरे मामले का ठीकरा राजा के एक सबसे भरोसेमंदर सिपहसालार पर फोड़ दिया जाता। ये सिपहसालार बरसों बाद रियासत में लौटता है और दुष्टों को उनके किए की सजा देने की तैयारी शुरू करता है। रियासत के वफादार उसके साथ आ जाते हैं। उसे बंजारों की टोली से भी मदद की उम्मीद है। लेकिन, इस टोली के सबसे होनहार युवक को न तो इस पूरे गड़बड़झाले के बारे में कुछ पता है और न ही उसे ये मालूम है कि कहीं वही इस रियासत का असली वारिस तो नहीं? कहानी में बहुत सारे मोड़ और चौंकाने वाले खुलासे हैं। मो रऊफ कुरैशी की कहानी और चरणदास शोख की लिखी पटकथा पर मशहूर राइटर इंदर राज आनंद ने संवाद लिखकर कहानी को इसके असली एहसास में ढालने की बढ़िया कोशिश की है। राज कुमार कोहली को इस फिल्म में हिंदी सिनेमा के चंद बेहतरीन तकनीशियों की मदद भी मिली। बलदेव सिंह की सिनेमैटोग्राफी के साथ साथ मास्टर कमल की कोरियोग्राफी भी फिल्म में दाद के काबिल है। फिल्म में ट्रिक फोटोग्राफी का क्रेडिट बाबू भाई मिस्त्री को दिया जाता है, जो उन दिनों के इकलौते स्पेशल इफेक्ट्स मास्टर माने जाते थे। फिल्म के शानदार सेट्स बनाए थे संत सिंह और सुनील सिंह ने।

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कल्याणजी आनंदजी का ढलता जादू
फिल्म ‘राज तिलक’ की जो इकलौती कमजोर कड़ी रही वह था इसका संगीत। वर्मा मलिक और कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी वैसे तो दमदार संगीत देने के लिए मशहूर रही है लेकिन 80 के दशक में संगीत का माहौल बदलने लगा था। दक्षिण भारतीय निर्माताओं की श्रीदेवी और जीतेंद्र वाली फिल्मों के अलावा हिंदी सिनेमा के निर्देशक भी संगीत को लेकर नए नए प्रयोग कर रहे थे। कल्याणजी आनंदजी का संगीत 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘विधाता’ में सुपरहिट रहा और उसके बाद से उनकी लोकप्रियता का ग्राफ नीचे आने लगा। ‘नास्तिक’, ‘घुंघरू’ और ‘कलाकार’ में उनका संगीत लोग पसंद तो कर रहे थे, लेकिन तब तक बसों, टैम्पों और निजी गाड़ियों में बप्पी लाहिड़ी बजने लगे थे। फिल्म ‘राज तिलक’ में वर्मा मलिक और कल्याणजी आनंदजी ने पांच गाने तैयार किए लेकिन ये गाने फिल्म देखते हुए तो खप गए लेकिन, अलग से इन गानों की उम्र ज्यादा लंबी नहीं रह सकी।

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दिलीप कुमार, जीतेंद्र और फिरोज खान की ना
निर्देशक राज कुमार कोहली चाहते थे कि फिल्म में रियासत के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार समद खान का किरदार दिलीप कुमार करें। इसके लिए वह कई बार दिलीप कुमार से मिलने भी गए लेकिन उन्होंने जब हां नहीं की तो इस रोल को बाद में राज कुमार ने किया। यही नहीं फिल्म की कहानी लेकर वह कई बार फिरोज खान से भी मिलने गए जो उन दिनों फिल्म ‘कुर्बानी’ की कामयाबी मना रहे थे। फिरोज को राजकुमार कोहली ने अपनी फिल्म ‘नागिन’ में अच्छा मौका दिया था लेकिन फिरोज खान ने राज कुमार कोहली को ये कहकर वापस कर दिया कि अब वह सिर्फ अपने प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों में ही काम करेंगे। इसके बाद कोहली ने इस रोल के लिए सुनील दत्त को साइन किया। आज के बाइस्कोप की शुरूआत मैंने कमल हासन और सारिका की मोहब्बत के किस्से से की थी, लेकिन अगर फिल्म ‘नागिन’ में अपने करियर का सुपरहिट रोल पाने वाले जीतेंद्र मान गए होते तो कमल हासन और सारिका की मोहब्बत शायद ही परवान चढ़ पाती। जी हां, फिल्म में जो रोल कमल हासन ने किया है वो पहले जीतेंद्र को ही ऑफर हुआ था। जीतेंद्र और राज कुमार कोहली के बीच फिल्म ‘बदले की आग’ के दौरान तनातनी हुई थी और इसी चक्कर में कमल हासन की इस फिल्म में एंट्री हो गई।

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चलते चलते...
फिल्म ‘राज तिलक’ से जुड़ा एक दुखद पहलू ये भी है कि इसके निर्माता अनिल सूरी का निधन जून के पहले हफ्ते में कोविड 19 वायरस के संक्रमण के बाद असहज परिस्थितियो में हुआ। संक्रमित होने के बाद उन्हें कई अस्पतालों में ले जाया गया लेकिन इन अस्पतालों ने कथित रूप से उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया। बाद में उनका एक अस्पताल में इलाज तो शुरू हुआ लेकिन वेंटिलेटर पर रखे जाने के बाद भी उन्हें बचाया न जा सका। अनिल सूरी को श्रद्धांजलि देते हुए आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

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