पोंगा पंडित
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वैसे ‘पोंगा पंडित’ फिल्म की कहानी का किस्सा ये है कि ये हरिद्वार में रहने वाले नीलकंठ पांडे और शंभूनाथ की कहानी है। दोनों अपने बच्चों भगवती प्रसाद और पार्वती का विवाह करने की बात कर लेते हैं। शंभूनाथ बंबई चला आता है और यहां सुपर रिच बन जाता है। नीलकंठ वहीं हरिद्वार में ही बना रहता है। बरसों बाद नीलकंठ अपने पुराने दोस्त शंभूनाथ को वापस हरिद्वार बुलाता है ताकि दोनों के बच्चों की शादी की रस्में पूरी की जा सकें। शंभूनाथ अपनी परिवार के साथ हरिद्वार आता तो है लेकिन दोस्ती के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे। पार्वती ने अपना नाम बदलकर भले पामेला कर लिया है लेकिन भगवती पांडे भी किसी से कम नहीं हैं। वह इनके पीछे पीछे बंबई पहुंच जाते हैं इस एलान के साथ कि, ‘स्वागत नहीं करोगे हमारा।’
सलमान खान की ‘दबंग’ सीरीज के चुलबुल पांडे जी से पहले ‘पोंगा पंडित’ के भगवती पांडे जी भी हिंदी सिनेमा में काफी हलचल मचा चुके हैं। रणधीर कपूर के अभिनय का अपना एक अलग स्टाइल रहा है। वही स्टाइल उनका बाद में दुश्मन बना लेकिन शुरूआती सालों में इसी स्टाइल ने उनका खूब साथ भी दिया। इस स्टाइल में राज कपूर की फिल्मों ‘तीसरी कसम’, ‘मेरा नाम जोकर’, आवारा और ‘श्री420’ का कॉकटेल है। अपने पिता की तमाम हरकतों और शरारतों को रणधीर कपूर ने अपनी स्टाइल बना तो लिया, लेकिन इसका नुकसान ये हुआ कि जब ये स्टाइल लोगों को हर फिल्म में एक जैसा लगने लगा और रणधीर कपूर ने असली रणधीर कपूर बनना चाहा तो लोगों को वह हजम नहीं हुआ। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)