Zero
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जीरो में गिनती करने को सलमान खान हैं, श्रीदेवी हैं, काजोल हैं, रानी मुखर्जी हैं, जूही चावला हैं, करिश्मा कपूर हैं, आलिया भट्ट हैं और दीपिका पादुकोण भी हैं। बस कुछ नहीं है तो है दर्शकों को आखिर तक बांध रखने वाली कहानी। आनंद एल राय की मेहनत फिल्म में दिखती है और फिल्म देखते समय उनसे सहानुभूति भी होती है, लेकिन सहानुभूति से फिल्में नहीं चलतीं। सिनेमा का यही कड़वा सच है और इस सच का सामना करना शाहरुख खान के लिए करियर के ढलते पड़ाव पर आसान नहीं होगा।