मिनी वैद की एक किताब है, दोज मैग्नीफिसेंट वीमन एंड देयर फ्लाइंग मशीन: इसरोज मिशन ऑन मार्स। यह किताब बताती है कि मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की महिलाओं ने कितनी मेहनत की। और, भी सैकड़ों लोग इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए रात दिन जुटे रहे। और, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उस मिशन को अंजाम दिया गया जिसकी शुरूआत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुई। फिल्म मिशन मंगल के साथ दिक्कत ये है कि न ये इतिहास के प्रति ईमानदार है और न ही विज्ञान के प्रति। अंतरिक्ष विज्ञान पर इतनी नकली फिल्म शायद ही सिनेमा के इतिहास में दूसरी बनी हो या आगे कभी बने।