वो सात दिन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मोहब्बत के निर्देशक बापू अपने समय के महान फिल्म निर्देशक रहे। लेकिन, उनके बारे में बात करने से पहले बात अनिल कपूर और इस फिल्म में उनकी हीरोइन रहीं विजेयता पंडित की। अनिल कपूर और उनके छोटे भाई संजय कपूर के नाम ही ये करिश्मा दर्ज है कि दोनों ने मोहब्बत नाम की अलग अलग फिल्मों में काम किया है। संजय कपूर वाली मोहब्बत में माधुरी दीक्षित हीरोइन थीं। उनके साथ फिल्म की रोमांटिक लीड में अक्षय खन्ना भी थे। और, ये तो आपको पता ही है कि माधुरी दीक्षित ने अक्षय खन्ना के पिता विनोद खन्ना के साथ भी सुपर रोमांटिक काम फिल्म दयावान में किया है। मेरे हिसाब से अनिल कपूर को सिनेमा का एक पुरस्कार सिर्फ इस बात के लिए मिलना चाहिए कि उन्होंने हिंदी और विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच एक ऐसे पुल का काम किया, जिससे निकलकर तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम सारी भाषाएं गुजरीं। अकेले के भाग्यराज की कोई एक दर्जन फिल्मों के हिंदी रीमेक में अनिल कपूर काम कर चुके हैं।
भारतीय सिनेमा के मशहूर निर्देशक मणिरत्नम ने अपनी पहली फिल्म कन्नड़ में बनाई थी, पल्लवी अनु पल्लवी। इसके हीरो थे अनिल कपूर। अगर आपको कन्नड़ नहीं भी समझ आती है तब भी कभी मौका लगे तो इसके गाने जरूर सुनिएगा। ये और बात है कि इस फिल्म में अनिल कपूर की कन्नड़ में डबिंग किसी और ने की है लेकिन हिंदी सिनेमा में नाम कमाने की सोचे बैठा कोई युवा जाकर कन्नड़ सिनेमा का हीरो बन जाए, बहुत जिगरेवाली बात है। और, जिगरा तो अनिल कपूर का शुरू से बड़ा रहा। हीरो का पहला काम भी उन्हें एक गैर हिंदी फिल्म में ही मिला था। ये फिल्म थी वंश वृक्षम और इस फिल्म के निर्देशक थे बापू। अनिल कपूर से कभी बापू का जिक्र करके देखिए, उनके सार्वकालिक चमकते रहने वाले चेहरे के पीछे एक आभा मंडल सा बनता आपको दिखेगा। बापू ने सिर्फ वंश वृक्षम में अनिल कपूर को हीरो बनने का मौका ही नहीं दिया, बल्कि अनिल कपूर की हिंदी में मेन लीड वाली पहली फिल्म वो सात दिन का निर्देशन भी बापू ने ही किया है। बापू की ही फिल्म हम पांच में भी अनिल कपूर ने एक छोटा सा रोल किया था।