खुदा हाफिज
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फिल्म ‘खुदा हाफिज’ के निर्देशक फारुक कबीर उन अजीज मिर्जा के शागिर्द रहे जिनके वालिद अख्तर मिर्जा ने कभी ‘नया दौर’, ‘वक्त’ और ‘सलीम लंगड़े पे मत रो’ जैसी फिल्में लिखीं। नाना मुराद उनके मुगले ए आजम के जमाने के रहे और इनका खुद रामपुर खूब आना जाना रहा। पिछली फिल्म ‘अल्लाह के बंदे’ और इस बार ‘खुदा हाफिज’। राष्ट्रीय फिल्म सेवक संघ की मुंबई में बढ़ती गतिविधियों के बीच कुमार मंगत पाठक को इस फिल्म के लिए राजी कर पाए, इसके लिए वह और कुमार मंगत दोनों बधाई के हकदार हैं। ‘मुगल ए आजम’, ‘पाकीजा’, ‘निकाह’, ‘तवायफ’, ‘सनम बेवफा’ और ‘वीर जारा’ जैसी मुस्लिम सोशल फिल्में अब बनती कहां हैं, फारुक कबीर ने वैसा ही कुछ करने की कोशिश तो की, पतंग में कन्ना भी सही बांधा लेकिन, उनको उड़ान देने वाले साथी सही नहीं मिले। पतंग मांझा भर ही उड़ पाई थी किसी ने सद्दी से काट दी।