जॉनी मेरा नाम
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
देव आनंद और हेमा मालिनी की पहली बार बनी जोड़ी
फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ को कालजयी फिल्म बनाने वाले इस फिल्म में तमाम अवयव हैं। देव आनंद और हेमा मालिनी की जोड़ी को तो लोगों ने इस फिल्म में हाथों हाथ लिया ही, फिल्म की कामयाबी ने दोनों की जोड़ी के लिए एक ऐसा रास्ता खोल दिया जिस पर चलकर दोनों ने कोई आधा दर्जन फिल्में और साथ कीं। सीआईडी इंस्पेक्टर के रोल में देव आनंद का किरदार विजय आनंद ने बहुत करीने से गढ़ा है। विलेन के गिरोह में शामिल होने के लिए इस किरदार को जो कुछ करना पड़ता है उससे लोगों की जान भी जाती हैं, लेकिन पटकथा लिखी इतनी होशियारी से गई है कि इन कत्ल के छींटे भी हीरो के दामन पर आने नहीं पाते। विजय आनंद ने समय बदलने के लिए भी स्टॉप फ्रेम का बहुत खूबसूरत इस्तेमाल किया है। अपने पिता के कातिल के सीने में खंजर उतार देने वाला सोहन जब डिक्की में छिपता है और पकड़ा जाता है तो वह फ्रेम फ्रीज होता है और सीधे कनेक्ट होता है आकर बड़े हो चुके मोती में। मोहन और मोती के चेक वाले कपड़े ही बता देते हैं दोनों एक हैं, न किसी तरह का अनावश्यक ड्रामा और न ही दर्शकों के समय की बर्बादी। विजय आनंद इस तरह के समय संक्रमण के दृश्यों के उस्ताद भी रहे हैं।
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