जेएल 50
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘जेएल 50’ के बारे में ज्यादा विस्तार से बात करने के लिए इसका मूल खोलना जरूरी है। फिल्म के कथा बिंदुओं, क्षेपक कथाओं और इसके उपसंहार में इसके बावजूद मैं नहीं जा रहा क्योंकि ऐसा करने से फिल्म देखने का आपका मजा किरकरा हो जाएगा। तो फिल्म का मूल ये है कि ये कालखंडों में बजाय घूमकर सीधे यात्रा करने की कहानी है। कैसे, ये आपको फिल्म में पंकज कपूर का किरदार समझाएगा। पंकज कपूर! एक बार फिर, अपने उसी अंदाज में हैं जिसने उनके दुनिया भर में करोड़ों चाहने वाले बनाए हैं। उनका अभिनय फिल्म ‘जेएल 50’ की जान है। एक निस्पृह, निरीह, एकाकी इंसान के भीतर क्या कुछ चलता रहता है, पंकज कपूर से बढ़िया दूसरा कौन दिखा या बता सकता है। नाट्यशास्त्र उन्होंने दिल्ली के एनसीडी में सीखा या फिर दिल्ली की कहीं टिमटिमाती तो कहीं जगमगाती रातों के बीच के सफर में, वही जानें। लेकिन, बरसों बाद पंकज कपूर को अपनी लय में आते देखना बहुत सुखदायी है। उनका अभिनय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का हकदार है यहां..! खासतौर से वह दृश्य देखने लायक है जब वह देश की मानसिकता को दुत्कारते हैं। और, उनकी टिप्पणी टीवी चैनलों पर सुशांत सिंह राजपूत मामले को लेकर दिन रात चलने वाली जूतमपैजार पर बिल्कुल सटीक बैठती है।