एक बार कहो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कथा, पटकथा और निर्देशन का संतुलन
फिल्म ‘एक बार कहो’ अपनी कहानी और इसके सामाजिक प्रतिमानों के चलते समय से पहले की कहानी मानी जाती है। शबाना आजमी का इस फिल्म में एक लीक से इतर रोल करना उनके तमाम साहसी फैसलों में से एक की बानगी भर है। आरती के किरदार में उन्होंने एक महिला चरित्र का जो आर्क अपनी अदाकारी में दिखाया है, वह उनकी ही फिल्मों में और दिखे तो दिखे, वर्ना स्मिता पाटिल, दीप्ति नवल जैसी अदाकाराओं की फिल्मों में भी कम ही दिखता है। इस चरित्र को गढ़ने में जिन दो लोगों ने सबसे ज्यादा मेहनत की, वे हैं इसके निर्देशक लेख टंडन और फिल्म की कहानी लिखने वाले मधूसूदन कालेकर। दोनों ने मिलकर फिल्म की पटकथा भी अच्छी लिखी और सोने पर सुहागा रहे फिल्म में राही मासूम रजा के संवाद। फिल्म का पूरा माहौल इसकी कहानी के हिसाब से रचने में इसके सिनेमैटोग्राफर जहांगीर चौधरी ने भी उम्दा काम किया है।