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Hungama 2 Review: चार चांद लगाने में नाकाम रहीं शिल्पा, प्रियदर्शन की फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला जारी

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हंगामा 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला मुंबई

Movie Review: हंगामा 2
पटकथा: यूनुस सजावल। संवाद: अनुकल्प गोस्वामी, मनीषा कोरडे
कलाकार: शिल्पा शेट्टी, प्रणिता सुभाष, परेश रावल, आशुतोष राणा, मीजान जाफरी, राजपाल यादव, टीकू तलसानिया, मनोज जोशी आदि।
लेखक, निर्देशक: प्रियदर्शन
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग: *

हिंदी सिनेमा के निर्माता मानें न मानें लेकिन ओटीटी पर मिल रही इफरात मनोरंजन सामग्री के बीच से ढंग का कुछ देखने लायक चुनने के लिए दर्शकों ने इनके लेखन को पहली कसौटी मान लिया है। कहानी में नयापन, अभिनेताओं का किरदारों में पूरी तरह ढल जाना और निर्देशन की ईमानदारी, ये तीन मुख्य बिंदु हो चले हैं किसी भी फिल्म, वेब सीरीज या शो को ओटीटी पर देखने के। करीब नौ साल बाद किसी हिंदी फिल्म के निर्देशन में वापस लौटे प्रियदर्शन की नई फिल्म ‘हंगामा 2’ इन तीनों कसौटियों पर शून्य है। प्रियदर्शन ने दक्षिण भारत में धूम मचाने के बाद हिंदी सिनेमा में भी काफी लीक से हटकर फिल्में बनाई हैं और उनकी तमाम फिल्में सुपरहिट भी रही हैं, लेकिन हिंदी में हिट का उनका वनवास फिल्म ‘हंगामा 2’ में भी खत्म नहीं हो पाया। उनकी हिंदी में आखिरी हिट फिल्म ‘भूल भुलैया’ 2007 में रिलीज हुई थी। प्रियदर्शन उसके बाद ‘मेरे बाप पहले आप’, ‘बिल्लू’, ‘दे दना दन’, ‘खट्टा मीठा’, ‘बम बम बोले’, ‘आक्रोश’ ‘तेज’ और ‘रंगरेज’ के रूप में आठ बैक टू बैक फ्लॉप फिल्में बना चुके हैं। फिल्म ‘हंगामा 2’ उनकी नौवीं फ्लॉप फिल्म है।

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हंगामा 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला मुंबई
निर्माता वाशू भगनानी के बेटे जैकी को हीरो बनाने की कोशिश भी प्रियदर्शन अपनी पिछली हिंदी फिल्म ‘रंगरेज’ में कर चुके हैं। अब जावेद जाफरी के बेटे मीजान को हीरो बनाने की कोशिश वह फिल्म ‘हंगामा 2’ में करते दिख रहे हैं लेकिन ये फिल्म देखने के बाद कहा जा सकता है कि प्रियदर्शन को अब रिटायर हो जाना चाहिए। फिल्म ‘हंगामा 2’ देखने वाले आधे से ज्यादा लोगों ने फिल्म उनके ही नाम से देखी लेकिन इसका हासिल सिवाय समय की बर्बादी के कुछ नहीं है। किसी कॉमेडी फिल्म में संवादों का लेखन और उनकी अदायगी कितना मायने रखती है, वह इस फिल्म को देखकर समझ आता है। फिल्म में जॉनी लीवर या फिर बच्चों वाले सीन फिर भी थोड़ी बहुत राहत दे पाते हैं, लेकिन फिल्म को कहानी के हिसाब से पूरा देखना बहुत बड़ा चैलेंज है।
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हंगामा 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला मुंबई
फिल्म ‘हंगामा 2’ की कहानी कॉमेडी ऑफ एरर का नया विद्रूपीकरण है। मुंबई में ये अक्सर होता है कि फिल्म बनाने की शुरुआत निर्माता बिना कहानी हाथ में आए ही कर देता है। शिल्पा शेट्टी को वापस बड़े परदे पर लाने के लिए निर्माता रतन जैन ने फिल्म ‘हंगामा 2’ बनाई है। कहानी उनके पास ये फैसला लेते समय थी नहीं, ये फिल्म देखकर समझा जा सकता है। अपनी बीवी पर शक करने वाला एक अधेड़ है। उसकी खूबसूरत सी बीवी है जिसे युवाओँ के साथ बातों के लच्छे बनाने में मजा आता है। हीरो यहां अपनी अलग मुसीबत है। एक लड़की है, जिसकी पास एक बच्चा है। बच्चे का बाप जिसको वह बता रही है। वह डीएनए टेस्ट में उलझा है। सब ड्रामा है। बस इन सारे अलग अलग किस्सों को एक सिरे से जोड़ पाने वाली पटकथा गायब है। फिल्म ‘हंगामा 2’ की सबसे कमजोर कड़ी इसकी पटकथा है और उसके बाद इसके संवाद की बारी आती है। फिल्म ‘हंगामा’ के संवाद लेखक नीरज वोरा ये फिल्म देखते हुए बहुत याद आते रहे।

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हंगामा 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला मुंबई

प्रियदर्शन ने अतीत में जो कमाल फिल्में बनाई हैं उनको अगर देखें तो उनके निर्देशन में एक लय नजर आती थी। उनकी फिल्मों मे किरदार ढेर सारे हर बार होते रहे हैं और हर किरदार के लिए वह पटकथा के हिसाब से अच्छे सीन भी गढ़ते रहे हैं, लेकिन उनका ये मास्टर स्ट्रोक यहां काम नहीं कर पाता क्योंकि किरदारों का कहानी में आना जाना मुंबई की बारिश जैसा हो गया है। असर भी वैसा ही है, फायदा कम नुकसान ज्यादा। कथा, पटकथा, संवाद और निर्देशन में फेल हुई फिल्म ‘हंगामा 2’ को इसके कलाकारों से भी खास फायदा नहीं मिल पाया। जॉनी लीवर और राजपाल यादव के हिस्से में जितना कुछ आया, दोनों ने अच्छे से निभा दिया। लेकिन, परेश रावल, शिल्पा शेट्टी और मीजान जाफरी तीनों मुख्य कलाकारों ने निराश किया। ये तीनों अब भी बीती सदी के सिनेमा में अटके कलाकारों से जैसे नजर आए। आशुतोष राणा फिर भी इन तीनों से बेहतर काम कर ले गए। फिल्म में प्रणिता सुभाष भी हैं, ये याद रखना पडता है।

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हंगामा 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला मुंबई
फिल्म पूरी तरह से समय की बर्बादी है। स्टार रेटिंग में जो एक प्वाइंट इसे मिलता है वह है इसकी सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम और बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए। एन के एकाम्बरम ने कुदरती खूबसूरती को बहुत तरीके से कैमरे में कैद किया है। कोरोना संक्रमण काल में ये सिनेमैटोग्राफी देख तुरंत मनाली निकल जाने का मन भी करता है। रॉनी रफेल ने बैकग्राउंड म्यूजिक में अच्छा काम किया। फिल्म के गाने समीर अनजान ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक का है और दोनों कुछ ऐसा नया नहीं रच पाए जो आज के समय के हिसाब से हो। अनु मलिक ने अपने ही गाने का जो रीमिक्स किया है, वह और निराशाजनक है।
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