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Pal Pal Dil Ke Pass Review: बेटे की बोहनी पर भारी पड़ा सनी का खराब निर्देशन, मिले इतने स्टार्स

Fri, 20 Sep 2019 10:41 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Pal Pal Dil Ke Paas - फोटो : social media
Movie Review: पल पल दिल के पास
कलाकार: करण देओल, सहर बाम्बा, सिमोन सिंह, सचिन खेडेकर, कामिनी खन्ना, मेघना मलिक आदि।
निर्देशक: सनी देओल
निर्माता: जी स्टूडियोज, सनी देओल


ऐसा हिंदी सिनेमा में शायद पहली बार ही हुआ है कि किसी फिल्मी खानदान की तीसरी पीढ़ी के नए सितारे की पहली फिल्म का मुंबई में प्रेस शो ही नहीं हुआ। किसी को नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ? क्या जी स्टूडियोज के पास इसका बजट नहीं बचा या फिर सनी देओल अपनी ही फिल्म को लेकर इतना असुरक्षित हो गए कि समीक्षकों को फिल्म दिखाने का वह साहस ही नहीं कर सके। अभिनेता से सांसद बने सनी देओल ने किसी तरह फिल्म पूरी कर सिनेमाघरों तक पहुंचा दी है और शायद इसी के साथ अपनी निर्देशकीय पारी की भी इतिश्री कर ली है।
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पल पल दिल के पास - फोटो : अमर उजाला
देओल परिवार हिंदी सिनेमा के दर्शकों का प्यार और दुलार पाने वाला सबसे अहम परिवार रहा है। इसकी तीसरी पीढ़ी के हीरो करण देओल की फिल्म का देश दुनिया में बेसब्री से इंतजार रहा है। लोग यह फिल्म देख रहे हैं तो सिर्फ इसलिए कि आखिर देखें तो धर्मेंद्र के पोते और सनी देओल के बेटे ने अपनी विरासत संभालने से पहले तैयारी कितनी की है। फिल्म पल पल दिल के पास देखने से पता चलता है कि जो काम बच्चन परिवार की दूसरी पीढ़ी ने अपनी पहली फिल्म मे किया, वही काम देओल परिवार की तीसरी पीढ़ी की पहली फिल्म ने कर दिखाया है।
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Karan Deol and Sahher Bambba - फोटो : file photo
पल पल दिल के पास एक कमाल की पर्यटन फिल्म है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग इस फिल्म के इंटरवल के पहले के तमाम हिस्से सूबे की सुंदरता के प्रचार प्रसार के लिए दुनिया भर में दिखा सकता है। लेकिन, सनी देओल यही बात अपने बेटे की अदाकारी के लिए शायद ही कर सकें। करण देओल ने सनी देओल का युवा संस्करण बनने की कोशिश तो पूरी की है, लेकिन उनकी तैयारी अधूरी है। फिल्म को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है जसविंदर सिंह बाथ और रवि शंकरन की कहानी ने।

डिजिटल दुनिया में तैरती उतराती नई सदी की नई पीढ़ी के लिए सनी देओल को शैडो रिक्रूट या फाल्ट इन अवर स्टार्स जैसी फिल्म बनानी चाहिए थी। लेकिन, सनी देओल का दीन दुनिया से कटे रहना बताता है कि उन्हें सिनेमा की तेजी से बदलती दुनिया और दर्शकों की बदलती पसंद का बिल्कुल अंदाजा नहीं है। वह पिछले कई साल से ऐसे लोगों से घिरे हैं जो उन्हें असल दुनिया की असलियत जानने ही नहीं देते। और, खामियाजा उठाना पड़ा है बेटे करण देओल को।

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Pal Pal Dil Ke Paas - फोटो : social media
पल पल दिल के पास की कहानी सनी देओल की पहली फिल्म बेताब का बित्ता भर भी नहीं है। सनी देओल ने बेटे को फिल्म में बनाया है करण सहगल और नई हीरोइन सहर बाम्बा को रोल दिया सहर सेठी का। करण मनाली में ट्रेकिंग कैंप चलाता है और सहर सेठी उसके तौर तरीकों का भंडाफोड़ करने पहुंची है। शुरूआती उलझनों, दिक्कतों और अदावतों के बाद दोनों में प्यार हो जाता है और करण का पर्दाफाश करने की नीयत से पहुंची सहर का नजरिया बदल जाता है। इत्ती सी कहानी के लिए दुनिया भर का हंगामा पिछले छह महीने से मचा हुआ है। गनीमत यही है कि जी स्टूडियोज ने ये फिल्म खरीद ली। अगर कहीं सनी देओल इसे खुद रिलीज करने का ख्वाब पाल लेते तो न घर के रहते न घाट के।
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पल पल दिल के पास - फोटो : सोशल मीडिया
करण देओल को अपनी अगली फिल्म किसी ऐसे निर्देशक के साथ करनी चाहिए जो उन्हें सनी देओल के बेटे की तरह बिल्कुल तवज्जो न दे। एक्टिंग में उनको बहुत कुछ सीखना अभी बाकी है और गुस्से को अपना हथियार बनाने की ट्रेनिंग भी उन्हें लेनी है। सनी देओल की पहली फिल्म बेताब करण देओल की पहली फिल्म पल पल दिल के पास देखते समय बार बार याद आती है। और, शायद इसी याद के सहारे पूरी फिल्म देखने का धैर्य भी बना रहता है। अमर उजाला मूवी रिव्यू में फिल्म पल पल दिल के पास को मिलते हैं दो स्टार, एक सहर बाम्बा की एक्टिंग के लिए और एक फिल्म के म्यूजिक के लिए।

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