फना
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गुजरात में तब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री हुआ करते थे। वहां जाकर आमिर खान नर्मदा बचाओ आंदोलन में शामिल हुए। बांध से विस्थापित लोगों के बारे में भी उन्होंने बयान दिए और बस आमिर खान आ गए सीधे राज्य बीजेपी के निशाने पर। फिल्म फना वैसे ही संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म थी। फिल्म में आमिर का किरदार आतंकवादी का और मामला इतना गर्म हुआ कि पूछो मत। पूरे गुजरात में आमिर खान के पुतले जलाए गए। फिल्म फना के पोस्टर फाड़े गए। बैनर जला दिए गए। राज्य के सिनेमाघर मालिकों ने हाथ जोड़ लिए कि भैया, ये फिल्म हम अपने यहां नहीं लगा सकते।
फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा को लगा कि ऐसे कैसे? यशराज फिल्म्स की पिक्चर है, कोई मजाक थोड़े ही है। वह चले गए सुप्रीम कोर्ट कि वह उनकी फिल्म को गुजरात में रिलीज कराए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि उसका काम किसी फिल्म को रिलीज कराने का नहीं है, आदित्य चोपड़ा को दिक्कत हो तो वह राज्य की पुलिस से कहें। जिन सिनेमाघरों को सुरक्षा की जरूरत होगी, वह उन्हें मिल जाएगी। लेकिन, फिल्म गुजरात में रिलीज नहीं हुई। कुणाल कोहली ने प्रेस कांफ्रेंस भी की। पर बात बनी नहीं। एक सिंगल स्क्रीन थिएटर वाले को जोश चढ़ा और उसने अपने यहां फिल्म रिलीज कर दी। वहां एक दर्शक मिट्टी का तेल लेकर पहुंचा और फिल्म के इंटरवल में बाथरूम में जाकर खुद को आग लगा ली। मामला फिर पूरे देश में फैल गया। इस सिंगल स्क्रीन से भी फिल्म हटानी ही पड़ी।