गोविंदा, करिश्मा कपूर
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
गोविंदा का असली करिश्मा
फिल्म ‘कुली नंबर वन’ में गोविंदा अपने पूरे चुहलभरे अंदाज में नजर आए। करिश्मा कपूर के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई। दोनों की जोड़ी पहली बार फिल्म ‘राजा बाबू’ में साल 1994 में परदे पर दिखी और दोनों की केमिस्ट्री ऐसी जमी कि दोनों की लगातार छह फिल्में ‘राजा बाबू’, ‘कुली नंबर वन’, ‘हीरो नंबर वन’, ‘हसीना मान जाएगी’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘खुद्दार’ हिट रहीं। आखिरी दो फिल्में दर्शकों को थोड़ा कमजोर लगीं और इसके बाद रिलीज हुई चारों फिल्में ‘शिकारी’, ‘मुकाबला’, ‘दुलारा’ और ‘प्रेम शक्ति’ में दोनों का करिश्मा फीका पड़ गया। फिल्म ‘कुली नंबर वन’ अपनी अतरंगी सी कहानी और इसको पेश करने के डेविड धवन के तरीके के चलते लोगों को खूब पसंद आई। गोविंदा अच्छे खासे ठीक ठाक घर से थे। लेकिन, उन्होंने अपनी छवि उन दिनों एक सड़कछाप हीरो की बना रखी थी। ब्रांडिंग उन्होंने अपनी कर रखी थी विरार के छोकरे के नाम से। एक तरफ विरार का छोकरा और दूसरी तरफ हिंदी सिनेमा के सबसे रईस कपूर खानदान की बेटी। दर्शकों को ये समीकरण जम गया और टिकट खिड़की पर पैसा बरसने लगा। जब तक लोगों को समझ आया कि मामला क्या है, प्रोड्यूसर वाशू भगनानी की तरह दोनों हाथों से दौलत बटोर चुके थे।