फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Review: कुछ मीठी कुछ फीकी है 'बरेली की बर्फी'

Sat, 19 Aug 2017 07:22 AM IST
रवि बुले
विज्ञापन
1 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू - फोटो : Twitter/BareillyKiBarfi
निर्माताः जंगली पिक्चर्स/बीआर स्टूडियोज

निर्देशकः अश्विनी अय्यर तिवारी

सितारेः आयुष्मान खुराना, कृति सैनन, राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, सीमा भार्गव

रेटिंग: **1/2

बरेली के मिश्रा सदन में रहने वाली बिट्टी मिश्रा (कृति सैनन) को पिता ने बेटे की तरह पाला है। वह पिता के पैकेट से सिगरेट निकाल कर पीती है, शराब से उसे परहेज नहीं, बड़ों का सम्मान करना उसने सीखा नहीं, आधी रात तक घर से बाहर रहती है, सारे शहर में डीजे की कमी पूरी करती है और खुली छत पर डांस करती है।
विज्ञापन

2 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
लड़के वाले बार-बार आते हैं और उसके ये गुण देख कर रिश्ता रिजेक्ट कर देते हैं। मां परेशान है। पिता को लगता है कि लड़की जब तक रहती है तब तक लगता है कब विदा होगी और जब जाने लगती है तो सोचते हैं कि उसके बिना कैसे रहेंगे। बिट्टी की सोच है कि आखिर उसमें क्या कमी है? उसमें जो बातें हैं, अगर वह किसी लड़के में हों तो क्या कोई गलत समझेगा? पिता समझाते हैं कि यह समाज है, भले ही हम इसे न मानें मगर रहना तो इसी के बीच है। मुद्दा यह कि क्या बिट्टी के लायक कोई लड़का मिलेगा?

पढ़ें: आमिर के एक गलत फैसले ने बदल दी थी इस एक्टर की जिंदगी, अब साइड रोल करने के लिए मजबूर​
विज्ञापन

3 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
बगल में छोरा, गांव में ढिंढोरा वाली कहावत कहानी में चरितार्थ होती है। प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले चिराग दुबे (आयुष्मान खुराना) का दिल एक बार टूट चुका है और उस गम में वह नॉवेल लिख चुका हैः बरेली की बर्फी। नॉवेल की बर्फी बिल्कुल बिट्टी टाइप की है। चिराग ने अपनी पहचान छुपाते हुए यह किताब बचपन के दोस्त प्रीतम विद्रोही (राजकुमार राव) के नाम से छापी।

4 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
बिंदास लड़की के बारे में लिखा नॉवेल पढ़ कर लोग पीटेंगे इस डर से विद्रोही ने बरेली छोड़ दिया। विद्रोही को बिट्टी ढूंढ रही है और चिराग मदद कर रहा है। क्या होगा जब बिट्टी बर्फी के राइटर से मिलेगी? चिराग का प्यार रोशन होगा या बुझ जाएगा? बिट्टी की शादी क्या कभी हो पाएगी? 'बरेली की बर्फी' इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढती है।

पढ़ें: वेटर का काम करता था ये पॉपुलर हीरो, ऐसे बना बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टंट मास्टर​
विज्ञापन

5 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
फिल्म की अच्छी बात यह कि कहीं-कहीं रोचक है। कुछ संवाद आकर्षक और गुदगुदाते हैं। रोमांस-कॉमडी का संतुलन है। कृति सैनन किरदार में फिट हैं। संवाद अदायगी और हाव-भाव से वह भरोसा दिलाती हैं कि आने वाले दिनों में दीपिका पादुकोण की जगह ले सकती हैं।
विज्ञापन

6 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
फिल्म की मुश्किल यह है कि कस्बाई नायक-नायिका जरूरत से ज्यादा फिल्मी हैं। कहानी की रफ्तार धीमी है। फिल्म जब तक संभलती है क्लाइमेक्स आ जाता है, जो निराश करता है। अगर आपने अश्विनी अय्यर तिवारी कि 'निल बटे सन्नाटा' देखी है तो आपकी निराशा बढ़ जाएगी क्योंकि 'बरेली की बर्फी' जुबान पर खास मिठास नहीं छोड़ती। अश्विनी फिल्म को लगातार नाटकीय बनाए रखने की कोशिश करती हैं और इससे कहानी कमजोर पड़ती है।

पढ़ें: 'बॉलीवुड विलेन' रंजीत के प्यार में पड़ गई थी ये हीरोइन, सामने आया सच तो....​
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
'बरेली की बर्फी' फिल्म रिव्यू
सहज प्रवाह के अभाव में अंत आते-आते फिल्म फीकी पड़ जाती है। राजकुमार राव कमजोर किरदार में हैं। जिसकी जिम्मेदारी लेखकों की है। आयुष्मान ने अपनी भूमिका ठीक ढंग से निभाई परंतु उनमें वह दमखम नहीं कि हीरो के रूप में अकेले फिल्म खींचें। बिट्टी के मां-पिता के रूप में सीमा भार्गव और पंकज त्रिपाठी फिल्म को कई मौकों पर संभालते हैं। गीत-संगीत में उल्लेखनीय बात यहां नहीं हैं। फिल्म में रंग जरूर चटख हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें