अक्स
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खैर, राकेश मेहरा खुद मानते रहे हैं कि अक्स की कहानी उन्होंने तीन खास कलाकारों को ध्यान में रखते हुए लिखी। एक अमिताभ बच्चन, दूजे मनोज बाजपेयी और तीसरी रवीना टंडन। रवीना टंडन ने जो जादू का पिटारा फिल्म अक्स में अपनी खूबसूरती का खोला है, वह कम ही फिल्मों में दिखा है। ये वो दौर था जब रवीना टंडन का दिल अक्षय कुमार के धोखे से ताजा ताजा टूटा था और वह बिल्कुल खतरनाक शेरनी की तरह गुस्से में मुंबई शहर में घूमती नजर आया करती थीं। फिल्म अक्स में लोकगाथाओं की पारलौकिक परंपरा को अपनी फिल्म की अंतरधारा बना रहे राकेश मेहरा को परदे पर ऐसी ही अदाकारा की तलाश थी जो तब थिरके तो लोग सीटों पर कसमसाते नजर आएं। रवीना ने अपने किरदार को सौ फीसदी मेहनत और ईमानदारी के साथ निभाया और सौ में सौ नंबर पाए।
रोल अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी के भी राकेश मेहरा ने अच्छे ही लिखे थे। लेकिन, मनोज बाजपेयी यहां अमिताभ बच्चन के आभा मंडल में वैसे ही फंसते नजर आए जैसा तमाम फिल्मों में दूसरे दिग्गज कलाकारों के साथ हो चुका है। राजेश खन्ना से लेकर नवीन निश्चल, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र, शशि कपूर, ऋषि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, गोविंदा, मिथुन चक्रवर्ती, कमल हासन, रजनीकांत और आयुष्मान खुराना तक जिस किसी भी उभरते सितारे ने अमिताभ के आभा मंडल के बराबर पहुंचने की कोशिश भी की, अपने अदाकारी के पंख अभिनय के इस सूरज के ताप में जला बैठा। मनोज बाजपेयी इस फिल्म की रिलीज से पहले इतराते फिरते थे। कहते थे राकेश मेहरा का नाम जल्द ही हिंदी सिनेमा के पांच दिग्गज निर्देशकों में गिना जाएगा। बाकी चार नाम वह शेखर कपूर, महेश भट्ट, रामगोपाल वर्मा और श्याम बेनेगल के गिनाया करते थे। बिहार में अमिताभ बच्चन की फिल्म जंजीर देखकर हीरो बनने की ठान बैठे मनोज बाजपेयी के करियर को इस फिल्म ने बहुत नुकसान पहुंचाया और खुद को कभी अगला शाहरूख खान मान बैठे मनोज बाद में हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनेता का अपने इर्द गिर्द बना फरमा अरसे तक तोड़ नहीं पाए।