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Suchitra Sen: गुमनामी में कटे 36 साल, ठुकराया दादा साहब फाल्के; अमिताभ संग काम कर चुकी इस एक्ट्रेस की हैं नानी

Sun, 06 Apr 2025 08:34 AM IST
कामेश द्विवेदी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Suchitra Sen Birth Anniversary: हिंदी और बंगाली फिल्मी दुनिया की जानी मानी अभिनेत्री सुचित्रा सेन,  जिन्होंने एक फिल्म फ्लॉप से चुन लिया था गुमनामी का रास्ता। 50 के दशक में अपनी अदाकारी से सबको मुरीद बना देने वाली अभिनेत्री ने आखिर क्यों ठुकराया था दादा साहब फाल्के पुरस्कार? आज के दिन ही अभिनेत्री का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं इनके जन्मदिन पर कुछ खास बातें।

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सुचित्रा सेन - फोटो : एक्स- @prosenjitbumba

भारतीय सिनेमा की लीजेंड एक्ट्रेस सुचित्रा सेन ने 'देवदास', 'आंधी' जैसी फिल्मों से सिनेमा जगत में एक अलग पहचान बनाई। अभिनेत्री अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाती थीं। एक समय उन्होंने राज कपूर की फिल्मों को यह कहकर ठुकरा दिया था कि उनका अंदाज उन्हें पसंद नहीं आया। आखिर अभिनेत्री ने ऐसी कौन सी इच्छा जताई थी, जिससे सब हैरान रह गए थे। आज अभिनेत्री के जन्मदिन पर जानेंगे सभी सवालों के जवाब। 

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सुचित्रा सेन - फोटो : एक्स- @jagishaarora

15 साल में हो गई सुचित्रा सेन की शादी
सुचित्रा सेन का जन्म 6 अप्रैल 1931 को बंगाल के सिराजगंज में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में आत है। उनका बचपन का नाम रोमादास गुप्ता था। अभिनेत्री अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। 1947 में भारत के आजाद होने के बाद भारत-पाकिस्तान में बंटवारे के लिए दंगे शुरू हो गए, जिस कारण से अभिनेत्री का परिवार जान बचाते हुए पश्चिम बंगाल में आकर बस गया। यहां आते ही सुचित्रा सेन के पिता ने उनकी शादी एक नामी बिजनेसमैन के बेटे दीबानाथ से करा दी। उनकी एक बेटी भी हुई मुन मुन सेन।

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सुचित्रा सेन - फोटो : एक्स- @vittalbalaji

रोमा से कैसे बनी सुचित्रा सेन?
रोमा को बचपन से गाने का शौक था, इस शौक को देख उनके पति ने उन्हें सिनेमा की दुनिया में जाने के लिए कहा। शुरुआत में उन्हें एक गाना ऑफर किया गया था, जिसमें उन्हें गाने का मौका नहीं मिला। फिर उस समय के मशहूर फिल्म निर्माता सुकुमार दासगुप्ता ने रोमादास गुप्ता का 'सात नंबर कैदी' फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट कराया और वह टेस्ट में पास हो गई। इसके बाद निर्माता के असिस्टेंट नीतीश रॉय ने रोमा का नाम बदलकर सुचित्रा कर दिया था। फिर उन्होंने साल 1953 में तीन फिल्में साइन कीं, जिसमें एक थी 'काजोरी', जिसका निर्देशन निरेन लाहिड़ी ने किया था। वहीं दूसरी फिल्म थी 'सारे चतुर', जिसका निर्देशन निर्मल डे द्वारा किया गया था और फिल्म में हीरो के रूप में थे उत्तम कुमार। उत्तम कुमार के साथ यह फिल्म काफी चर्चित हुई, जिस कारण सुचित्रा सेन को बंगाली सिनेमा में मशहूर एक्ट्रेस में गिना जाने लगा। इसके अलावा अभिनेत्रा की तीसरी फिल्म थी 'भगवान श्री श्री कृष्ण चैतन्य', जिसका निर्देशन देबकी बोस ने किया था।

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उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन - फोटो : एक्स- @FilmHistoryPic

सिनेमा जगत में छाई सुचित्रा-उत्तम की जोड़ी
सुचित्रा सेन और उत्तम कुमार की जोड़ी सिनेमा जगत की आईकॉनिक जोड़ी कही जाती थी। उत्तम कुमार बंगाली सिनेमा के महानायक कहे जाते थे। 1953 में दोनों पहली बार साथ में 'सारे चतुर' फिल्म में नजर आए थे, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं थीं। इसके बाद कई निर्माताओं ने इन दोनों पर करीब 20 साल तक कई फिल्में बनाई। अभिनेत्री ने अपने जीवन में कुल 61 फिल्में कीं, जिनमें 30 फिल्में उत्तम कुमार के साथ थी।

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सुचित्रा सेन - फोटो : सोशल मीडिया

जब देवदास की पारो बनी सुचित्रा सेन
बंगाली फिल्मों में प्रसिद्धि के बाद अभिनेत्री ने साल 1955 में बिमल रॉय के निर्देशन में बनी फिल्म 'देवदास' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। निर्देशक ने पहले फिल्म में पारो के किरदार के लिए मीना कुमारी को कास्ट किया था, लेकिन उनके पति ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस वजह से बिमल रॉय ने सुचित्रा सेन को कास्ट किया और उनके एक्सप्रेशन ने फिल्मों में जान डाल दिया था। फिल्म में दिलीप कुमार मुख्य भूमिका में थे और वैजयंतीमाला ने चंद्रमुखी का रोल निभाया था। चंद्रमुखी के रोल के लिए वैजयंतीमाला को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला, लेकिन उन्होंने यह कहकर अवॉर्ड लेने से मना कर दिया कि उनका और सुचित्रा सेन का रोल फिल्म में बराबर था। सुचित्रा सेन ने कुल सात हिंदी फिल्मों में काम किया, जिसमें एक फिल्म 'आंधी' भी रही। इस फिल्म में उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया था, इस फिल्म के गाने 'तेरे बिना जिंदगी से' और 'तुम आ गए हो नूर आ गया है' बहुत प्रसिद्ध गाने रहे। सुचित्रा सेन का एक वाकया और है कि उस दौर के चर्चित अभिनेता राज कपूर की फिल्म में काम करने से अभिनेत्री ने सिर्फ यह कहकर मना कर दिया था कि उन्हें उनका अंदाज पंसद नहीं था।

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सुचित्रा सेन - फोटो : एक्स- @@SujitSe98018197

जब ठुकराया दादा साहब फाल्के पुरस्कार
तमाम सुपरहिट फिल्में देने के बाद साल 1978 में अभिनेत्री की एक फिल्म आई 'प्रणय पाशा', जो फ्लॉप हो गई। इसी के बाद से उन्होंने एकांत में रहने का फैसला किया और फिर कभी नजर आईं। साल 2005 में सुचित्रा सेन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया, लेकिन वह पुरस्कार लेने नहीं पहुंचीं और गुमनामी में ही रहने का फैसला किया। आखिरकार 36 साल बाद गुमनामी में रहने के बाद 17 जनवरी 2014 को अभिनेत्री का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बाताया जाता है कि उनकी इच्छा थी कि अंतिम समय में भी उनका चेहरा कोई ना देखे। इस कारण अंतिम समय में भी सुचित्रा सेन का चेहरा कोई नहीं देख पाया था।

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रीमा सेन और राइमा सेन - फोटो : वीकीपीडिया

जानें कहां हैं इनकी नातिन?
बात करें सुचित्रा सेन की पीढ़ियों कीं तो उनकी एक बेटी हैं मुन मुन सेन। मुन मुन सेन की दो बेटियां हैं राइमा और रिया, जो अभिनय के क्षेत्र में अपने कौशल को दिखा रही हैं। राइमा सेन हिंदी और बंगाली फिल्मों और सीरीज में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं। राइमा सेन 'एकलव्य' और 'तीन पत्ती' जैसी फिल्मों में अमिताभ के साथ काम कर चुकी हैं। इसके अलावा रिया सेन भी एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जो हिंदी, बंगाली, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल और मलयालम फिल्मों में दिखाई देती हैं।

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