करण जौहर के साथ नेटफ्लिक्स की टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब एक बार फिर नेटफ्लिक्स अपने ग्राहकों के निशाने पर है। वरिष्ठ फिल्म निर्देशक संजीवन एस लाल कहते हैं, “नेटफ्लिक्स में इस तरह की फिल्मों को मंजूरी कौन देता है, इसके बारे में उनसे सवाल होने चाहिए। ऐसी फिल्मों को मंजूरी देने के बाद ये लोग ही हिंदी सिनेमा को अपनी खराब हालत के लिए कोसते भी हैं। ऐसी कमजोर फिल्मों को मंजूरी देने वालों के चेहरे बेनकाब होने चाहिए।” संजीवन ये भी कहते हैं कि हिंदी फिल्मों के बाजार की थाह लेने के लिए उस तरह के खोजी लेख भी खूब लिखे जाने चाहिए जैसे कि हाल ही में विदेशी वेबसाइट अल जजीरा ने प्रकाशित किया है।