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फिटनेस को लेकर बोले अर्नाल्ड श्वार्जनेगर, 'बॉडी बिल्डिंग के लिए मांसाहार जरूरी नहीं'

Fri, 11 Oct 2019 10:03 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Arnold and Linda - फोटो : amar ujala mumbai
एवेंजर्स सीरीज के सबसे बड़े विलेन थानोस को मारने के लिए इसकी पिछली फिल्म एवेंजर्स एंडगेम में सुपरहीरोज ने समय में पीछे जाने का जो कारनामा इस साल किया है, वैसा कारनामा मशहूर फिल्ममेकर जेम्स कैमरॉन अपनी फिल्म टर्मिनेटर में 35 साल पहले ही कर चुके हैं। 
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ames Cameron Linda Hamilton Arnold Schwarzenegger - फोटो : amar ujala mumbai
जी हां, हॉलीवुड की किसी सुपरहिट कमर्शियल फिल्म में टाइम ट्रेवेल का ये पहला बड़ा मामला माना जाता है। फिल्म के हीरो अर्नाल्ड श्वार्जनेगर को इसी फिल्म ने मेगास्टार बनाया था और अर्नाल्ड ने भी टर्मिनेटर को अविस्मरणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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Arnold and Linda - फोटो : amar ujala mumbai
अर्नाल्ड श्वार्जनेगर फिर से टर्मिनेटर बनकर लौट रहे हैं और इस बार वह बीते दिनों की यादें करके भावुक भी हो जा रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े रोल मॉडल्स में से एक माने जाने वाले अर्नाल्ड ने हाल के दिनों में अपना रहन सहन पूरी तरह बदल लिया है। वह अब सिर्फ शाकाहार लेते हैं। वह जानवरों से प्राप्त होने वाले किसी भी तरह के पदार्थ का अब सेवन नहीं करते। वह कहते हैं, “अब ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां और अनाज या दूसरे स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक भोजन को प्राथमिकता देता हूं। मैं मांस या जानवरों के दूसरे उत्पादों से पूरी तरह दूर रहता हूं। एक समय में ये लोगों में भ्रम डाल दिया गया कि शारीरिक रूप से मजबूत होने के लिए इनका सेवन जरूरी है लेकिन अब मुझे लगता है कि इनसे दूर रहकर मैं ज्यादा अच्छा महसूस करता हूं।” अर्नाल्ड की नई फिल्म टर्मिनेटर: डार्क फेट एक नवंबर को भारत में रिलीज हो रही है। भारत में इसे अंग्रेजी के अलावा हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज करने की तैयारियां चल रही हैं।
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file photo - फोटो : सोशल मीडिया
पूरी तरह से वीगन हो चुके सुपरस्टार अर्नाल्ड श्वार्जेनगर पिछले कुछ साल से जलवायु संरक्षण पर भी काफी काम करते रहे हैं। जब उनके उनकी एक ख्वाहिश के बारे में पूछा गया तो वह कहते हैं, “काश, मैं टर्मिनेटर की तरह समय में पीछे जा सकता और भविष्य के लिए बिना प्रदूषण वाले ऊर्जा स्रोत तैयार कर सकता।” इस बात को समझाते हुए अर्नाल्ड कहते हैं कि एक समय था जब लोगों में ईंधन को लेकर बहस हुआ करती थी। वाहन बिजली से चलें या गैस, हाइड्रोजन, पेट्रोल या डीजन से, इस पर खूब बहस हो चुकी हैं। अर्नाल्ड कहते हैं, “अगर सौ साल पहले हमने सिर्फ बिजली वाले वाहन बनाने का फैसला कर लिया होता तो दुनिया आज इस संकट से नहीं गुजर रही होती। मैं यहां जलवायु परिवर्तन की बात भी नहीं कर रहा, मैं तो सिर्फ ये कह रहा हूं कि डीजल-पेट्रोल अपनाकर हमने पूरी दुनिया में जितना प्रदूषण फैला दिया है, उससे हर साल लाखों लोग मर रहे हैं। मेरी तो ख्वाहिश यही है कि काश मैं टर्मिनेटर की तरह समय में पीछे जा सकता और इन गलतियों को सुधार सकता। अब वर्तमान में ये करना बहुत ही मुश्किल नजर आ रहा है।”
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