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श्रद्धांजलि: सिनेमा के परदे पर इतना सुंदर जासूस इससे पहले न हुआ और न कभी फिर होगा

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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
गरीबी, तंगहाली और बेबसी देखने वाले एक बच्चे की किस्मत में दुनिया का सबसे चित्ताकर्षण जेम्स बॉन्ड होना भी लिखा था, 60 साल पहले भला किसे पता होगा। लेकिन, एक अखबार में हुई वोटिंग और जेम्स बॉन्ड बनाने वालों से मुलाकात का ऐसा असर रहा कि थॉमस शॉन कॉनरी को पहले जेम्स बॉन्ड का रोल बिना किसी ऑडीशन के मिल गया। जेम्स बॉन्ड सीरीज की पहली फिल्म ‘डॉ. नो’ साल 1962 में रिलीज हुई और इस फिल्म को शोहरत कुछ ऐसी मिली कि जेम्स बॉन्ड की फिल्मों ने अगले पांच साल में पूरी दुनिया में धूम मचा दी। शॉन कॉनरी का जादू ही कुछ ऐसा था।
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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
एडिनबर्ग की झोपड़पट्टियों में एक आयरिश दंपती के घर जन्मे शॉन कॉनरी के पास इतना पैसा भी नहीं था कि वह अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी कर पाते। बचपन से ही मजदूरी करते रहे लेकिन मजदूरी के दौरान जब भी मौका मिलता तो उसी सामान को उठाकर वर्जिश करने लगते थे। 17 साल करीब के हुए तो रॉयल नेवी में नौकरी भी मिल गई थी, लेकिन किस्मत को उन्हें कहीं औऱ ले जाना था। पेट में अल्सर हो गया तो नैवी वालों को लगा कि ये बंदा किसी काम का नहीं। पीठ पर पड़ी ये लात उन्हें मिस्टर यूनीवर्स कंपटीशन में ले आई। 1950 की इस प्रतियोगिता में शॉन तीसरे नंबर पर रहे और बस यहीं से लाइमलाइट भी उन पर पड़नी शुरू हो गई।

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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
शॉन कॉनरी का इसके बाद ही लंदन आना हुआ। थोड़ा सा नाच गाना सीखा और सोप ओपेरा  ‘साउथ पैसिफिक’ में काम पा लिया। यहां बीते कोई डेढ़ साल ने उन्हें समझा दिया कि उन्हें अपने जीवन में करना क्या है। 90 साल में आखिरी सांस लेने वाले कॉनरी की शख्सीयत में आखिर तक एक अलग तरह का ही आकर्षण रहा। 77 साल की उम्र में तो उन्होंने सबसे कामुक पुरुष का खिताब जीता था। जैसे जैसे वह बुजर्ग होते गए लोगों में उनका करिश्मा उतना ही और असर करता गया। 1956 में पहली फिल्म ‘नो रोड बैक’ से शुरूआत करने वाले शॉन कॉनरी ने जेम्स बॉन्ड बनने से पहले परदे पर भी खूब पापड़ बेले।

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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
लेकिन, जेम्स बॉन्ड किरदार के अधिकार रखने वाली टोली अलबर्ट ब्रॉकली और हैरी सैल्ट्जमैन से उनकी एक मुलाकात ने उनकी तकदीर बदल दी। बिना कसी ऑडीशन के दोनों ने उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘डॉ. नो’ में जेम्स बॉन्ड बना दिया। 1962 में दुनिया ने किताबों से निकलकर परदे पर आया जेम्स बॉन्ड देखा और उसे बिल्कुल वैसा ही पाया जैसा अब तक वह पढ़ते आए थे। लंबा, गठीला, रौबदार, शानदार...! खूबसूरत लड़कियां उस पर मरती थीं और वह लोगों को जान से मार देने का लाइसेंस लेकर फिरता था, ‘लाइसेंस टू किल!’
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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
सिनेमा के परदे पर इतना सुंदर जासूस इससे पहले न हुआ और न फिर कभी बाद में लोगों ने किसी को इतना प्यार दिया। जेम्स बॉन्ड सीरीज की शुरू की पांचों फिल्मों ने ब्लॉकबस्टर कमाई अगर की तो उसकी वजह थे सिर्फ और सिर्फ शॉन कॉनरी। तब उन्हें बॉन्ड का रोल करने के लिए फीस मिलती थी 30 हजार डॉलर जबकि अलफ्रेंड हिचकॉक की फिल्म ‘मार्नी’ में उनकी फीस साढ़े सात लाख डॉलर तक पहुंच गई थी। ‘डॉ. नो’  के बाद ‘फ्रॉम रशिया विद लव’,  ‘गोल्डफिंगर’ और ‘थंडरबॉल’ ने उनको दुनिया के हर उस कोने में पहुंचा दिया जहां फिल्म चलाने को एक प्रोजेक्टर था और फिल्म दिखाने को एक रुपहला परदा।
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शॉन कॉनरी - फोटो : Twitter- @007
शॉन कॉनरी ने पूरा जीवन काम करते हुए ही बिताया यहां तक कि कोई डेढ़ दशक पहले जब उन्होंने अभिनय से संन्यास लिया तो उसके बाद भी अपनी आवाज का करिश्मा एनीमेशन फिल्मों में दिखाते रहे। अपनी मातृभूमि स्कॉटलैंड की भलाई के लिए उनके दिल में एक खास जगह थी। वह स्कॉटलैंड की संसद की पुनर्स्थापना का प्रयास करने वाले शीर्ष लोगों में शामिल रहे। साल 1999 में जब इसका 296 साल बाद दोबारा आयोजन हुआ तो इस सभा को संबोधित करने जब वह पहुंचे तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। अगले ही साल ब्रिटेन की महारानी ने उन्हें नाइटहुड से सुशोभित किया और जमाना उन्हें सर शॉन कॉनरी कहकर बुलाने लगा।
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