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सात साल की उम्र में बनाई थी पहली शॉर्ट फिल्म...जानिए कौन हैं ये डायरेक्टर

Wed, 02 Aug 2017 04:57 PM IST
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी
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क्रिस्टोफर नोलन
सपनों के भीतर जाकर सूचनाएं चुरा सकते हैं, बैटमन जैसा रक्षक गढ़ सकते हैं। डार्क नाइट जैसी फिल्म बना सकते हैं। सुपर हीरो, साइको थ्रिलर जैसे मुद्दों पर फिल्में बनाने के बाद वॉर मूवी 'डनकर्क' बनाकर दुनिया को स्तब्ध करने की योग्यता रखने वाले डायरेक्टर कोई और नहीं क्रिस्टोफर नोलन हैं। कम ही लोग जानते हैं, बॉलीवुड की गजनी जैसी साइकोथ्रिलर मूवी का प्लॉट भी नोलन की फिल्म 'मेमेंटो मोरी' से लिया गया है। 
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क्रिस्टोफर
जब दुनिया में मंडराता है संकट तो आता है...बैटमैन

जब दुनिया खत्म करने के लिए कुछ शैतान साजिश रचते हैं तो दुनिया को बचाने के लिए कुछ मसीहा इनसे लोहा लेते हैं। 'बैटमैन' ऐसा ही मसीहा है जो मानवता के दुश्मनों से टक्कर लेता है। नोलन की डार्क नाइट ट्रियोलजी इसी लॉजिक का परिणाम है कि गोथम शहर को वहां के नागरिक नहीं, वहां की लाचार हो चुकी कानून व्यवस्था नहीं बल्कि ‘बैटमैन’ आकर बचाएगा।
 
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इन्सेप्शन
दीमागी गलियारे की भूलभुलैया 

नोलन की कहानियों का नायक इंसानी मस्तिष्क की गलियों की भूल भुलैय्या में भटकता दिखाई पड़ता है। फिल्म ‘इंसेप्शन’ का नायक यादों को किसी और के अचेतन मन में डालकर ख्वाबों की एक दुनिया बनाता है। ‘डार्क नाइट ट्रियोलजी’ के नायक को अपने माता-पिता की हत्या से जुड़ी यादें तड़पाती हैं। मेमेंटो मूरी का नायक शार्ट टर्म मेमोरी से जूझता हुआ अपने पूरे शरीर में अपनी पत्नी के कातिलों का नाम गुदवा लेता है। 

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फालोइंंग
एक बेरोजगार युवा की कहानी फालोइंग बनाते वक्त खुद भी थे बेरोजगार 

क्रिस्टोफर ने पहली फिल्म बनाई ‘फॉलोइंग’ बनाई। नोलन पर उस वक्त तक कोई प्रोड्यूशर पैसा लगाने को तैयार नहीं था। शूटिंग साल भर के शेड्यूल में केवल वीकेंड्स पर होती थी। इस फिल्म में नोलन के दोस्तों ने ही काम किया। यहां तक कि फिल्म के कास्च्यूम रोजाना पहने वाले कपड़े ही थे। खाने में मां के हाथ के सैंडविच ही मिलते थे। ‘फॉलोइंग’ एक बेरोजगार नवयुवक लेखक की कहानी कहती है जो अपनी किताब के लिए अपराध की दुनिया में जाने को मजबूर होना पड़ता है। ये फिल्म बनीं और नोलन ने फिर कभी पीछे मुढ़कर नहीं देखा। 
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क्रिस्टोफर नोलन
नहीं है पर्सनल इ-मेल और मोबाइल फोन 

क्रिस्टोफर अपना पर्सनल ई-मेल और मोबाइल नहीं रखते हैं। उन्हें लगता है ये ध्यान भटकाने वाली चीजें हैं। उनका मानना है कि कुछ कलात्मक सोचने के लिए जरूरी है कि आप दीमाग और वक्त की फिजूलखर्ची न करें। 
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क्रिस्टोफर
रोज पहनते हैं एक जैसे आउटफिट

क्रिस्टोफर नोलन रोजना एक जैसा ही आउटफिट पहनते हैं। गर्मियों में वेस्टकोट, ब्लू कलर की शर्ट और काले रंग का ट्राउजर पहनते हैं। सर्दियों में बस एक बदलाव करते हैं कोट भारी और गर्म पहनना शुरू कर देते हैं। 
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क्रिस्टोफर
आज भी पसंद हैं इन्हें टाइपराइटर पर काम करना  

आज भी फिल्म शुरू करने से करीब दो हफ्ते क्रिस्टोफर नोलन अपने पिता के टाइपराइटर में अपने मौलिक फिल्म के बारे में अपने मौलिक आइडियाज को टाइफ करते हैं। 
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