फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: ‘सैराट के बाद बदला नजरिया’, इंडस्ट्री पर बोले नागराज मंजुले; बताया ‘मटका किंग’ में क्या है नया?

सार

Nagraj Manjule Interview: ‘सैराट’ जैसी सुपरहिट मराठी फिल्म का निर्देशन करने वाले नागराज मंजुले अब ‘मटका किंग’ को लेकर चर्चाओं में हैं। जानिए अमर उजाला से बातचीत में सीरीज और इंडस्ट्री को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा…
विज्ञापन
1 of 6
नागराज मंजुले - फोटो : अमर उजाला

मराठी सिनेमा से लेकर हिंदी दर्शकों तक अपनी खास पहचान बना चुके निर्देशक नागराज मंजुले अब वेब सीरीज ‘मटका किंग’ के साथ एक अलग कहानी लेकर आए हैं। ‘सैराट’ जैसी फिल्म से अपनी गहरी छाप छोड़ने वाले नागराज इस बार एक ऐसे खेल की दुनिया दिखाने जा रहे हैं, जो सिर्फ कहानी नहीं बल्कि एक अनुभव है। हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने ‘मटका किंग’ की शुरुआत से लेकर अपने सफर, फिल्ममेकिंग की चुनौतियों और ‘सैराट’ की सफलता तक कई पहलुओं पर खुलकर बात की।

विज्ञापन

2 of 6
'मटका किंग' - फोटो : वीडियो ग्रैब

पहले ही तय था इसे वेब सीरीज ही बनाया जाए
सीरीज के विषय को लेकर नागराज मंजुले ने कहा कि इस विषय पर पहले भी कई कहानियां बन चुकी हैं। इसलिए सबसे बड़ा चैलेंज था कुछ नया दिखाना और दोहराव से बचना। मेरे लिए ‘मटका किंग’ एक खेल है। ऐसा खेल जो आपको अपनी तरफ खींचता है। इसकी लत भी लग सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

शुरुआत से ही हमें लगा कि इसका विषय बहुत बड़ा है। इसे फिल्म में पूरी तरह दिखाना मुश्किल था। इसलिए हमने तय किया कि इसे वेब सीरीज के रूप में बनाया जाए, ताकि कहानी को सही तरीके से दिखाया जा सके।

हम अक्सर कहते हैं कि हमारा विषय अलग है, लेकिन यहां सच में कुछ अलग है। हमें खुद भी ये बहुत दिलचस्प लगा। जब आप इसे देखेंगे, तो फर्क महसूस होगा। बाकी कहानियां भी अच्छी हैं, लेकिन ये उनसे अलग है। ये कितनी अच्छी है, ये दर्शक तय करेंगे। लेकिन इसमें कुछ ऐसा जरूर है जो आपने पहले नहीं देखा होगा।

विज्ञापन

3 of 6
मटका किंग की पूरी टीम - फोटो : सोशल मीडिया

विजय, कृतिका और सई के साथ काम पर नागराज मंजुले
सीरीज की कास्टिंग और विजय वर्मा के साथ काम करने के अनुभव पर निर्देशक ने कहा कि मेरे लिए तो विजय वर्मा के साथ काम करना भी एक सपना था, जो अब पूरा हो गया। कृतिका कामरा और सई ताम्हणकर जैसे टैलेंटेड एक्टर्स के साथ काम करना मेरे लिए बहुत खास है। ये लोग अपने काम को लेकर बेहद ईमानदार हैं और बिना किसी डर के खुलकर काम करते हैं।

मैं हर रोज इसके लिए शुक्रगुजार रहता हूं। जो भी मेरे साथ हो रहा है, वो मेरे लिए किसी ख्वाब से कम नहीं है। अगर ये सब नहीं होता तो शायद मैं कुछ और कर रहा होता। आज मैं इतने अच्छे लोगों के साथ काम कर रहा हूं, तो मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानता हूं। आज इनके साथ बैठकर इस बारे में बात करना भी बहुत अच्छा लग रहा है।

मेरा सफर काफी लंबा रहा है। मैं अपने काम से संतुष्ट हूं, खुश हूं और ग्रेटफुल भी हूं। लेकिन मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ बाकी है। बहुत कुछ ऐसा है, जिसे मैं अभी भी एक्सप्लोर करना चाहता हूं।

4 of 6
नागराज मंजुले - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म बनाना कटोरी में पानी ले जाने जैसा है
फिल्ममेकिंग को लेकर नागराज ने कहा कि हर प्रोजेक्ट में ऐसा होता है। आप जो सोचते हैं, वो पूरी तरह वैसे बन नहीं पाता। ये माध्यम ही ऐसा है। यहां हजार तरह की मुश्किलें आती हैं। कभी मौसम साथ नहीं देता, कभी बजट आड़े आता है। इसी वजह से जो दिमाग में होता है, वो स्क्रीन पर हूबहू नहीं उतर पाता। फिर भी कोशिश जारी रहती है। जितना अच्छा हो सके, उतना बेहतर बनाने की।

मैं इसे एक आसान उदाहरण से समझाता हूं। जैसे आप कटोरी में पानी लेकर चलते हैं, तो रास्ते में थोड़ा-थोड़ा पानी गिरता जाता है। ठीक वैसे ही कहानी जब लिखते हैं तो पूरी होती है, लेकिन कागज से स्क्रीन तक आते-आते बहुत कुछ छूट जाता है। इसलिए असली कोशिश यही होती है कि जितना ज्यादा हो सके, उस मूल विचार को बचाया जाए। जितना ज्यादा बचा पाएंगे, उतना बेहतर काम बनेगा। कठिनाइयां इस सफर का हिस्सा हैं, लेकिन वही आपको बेहतर भी बनाती हैं। सच तो ये है कि बिना मुश्किलों के कोई भी प्रोजेक्ट सौ फीसदी वैसा नहीं बन सकता, जैसा आप सोचते हैं।

विज्ञापन

5 of 6
सैराट फिल्म पर बोले नागराज मंजुले - फोटो : सोशल मीडिया

‘सैराट’ का सीक्वल बनाने का कभी इरादा नहीं था
सुपरहिट मराठी फिल्म ‘सैराट’ को लेकर निर्देशक ने कहा कि इसे लेकर जो मोमेंट था, वो बहुत खास था। अब लगभग दस साल हो चुके हैं फिल्म को रिलीज हुए। 29 अप्रैल 2016 को ये फिल्म आई थी और इतने साल बाद भी लोग इसे याद रखते हैं, ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

इसके दूसरे पार्ट को लेकर बहुत लोगों ने कहा, लेकिन मैंने कभी इस सोच के साथ फिल्म नहीं बनाई थी कि इसका सीक्वल बनाऊंगा। मैंने 'फैंड्री' बनाई, ‘सैराट’ बनाई, लेकिन हमेशा वही करने की कोशिश की जो मुझे अंदर से सही लगता है।

कभी-कभी लगता है कि कोई कहानी आगे बढ़ सकती है, लेकिन मैं उसी पर विश्वास करता हूं जो दिल से महसूस हो। ‘सैराट’ के समय जो बनाना था, वो बना दिया और लोगों ने उसे इतना प्यार दिया कि वो आज भी याद रखते हैं। यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है।

विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
इरफान खान और नागराज मंजुले - फोटो : सोशल मीडिया
इरफान खान का फोन आज भी याद है
इंडस्ट्री को लेकर नागराज ने कहा कि उस फिल्म के बाद इंडस्ट्री में लोगों का नजरिया जरूर बदला। पहले बहुत लोग मुझे जानते नहीं थे, लेकिन उसके बाद लोगों ने बहुत प्यार दिया। कई लोगों के फोन आए, उन्होंने तारीफ की और हौसला बढ़ाया। मुझे खास तौर पर इरफान खान की बात आज भी याद है। उनसे मैं पहले भी ‘फैंड्री’ के वक्त मिला था और उन्होंने तब भी बहुत प्यार से बात की थी। लेकिन जब उन्होंने ‘सैराट’ देखी, तो उन्होंने मुझे 3-4 दफा फोन किया और फिल्म की तारीफ की।

इसके अलावा सूरज बड़जात्या और सुभाष घई जैसे बड़े लोगों ने भी फोन करके सराहा। जब इतने बड़े लोग आपके काम की तारीफ करते हैं, तो आपको एहसास होता है कि आपने कुछ अच्छा किया है। उनके रिएक्शन मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं। उस वक्त लगा कि जो बनाया, वो लोगों तक पहुंचा और उन्हें पसंद आया। यही किसी भी फिल्ममेकर के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें