साकिब सलीम
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सीरीज में आपका किरदार तो जो चाहता है, उसके पीछे पड़ जाता है। असल जिंदगी में भी ऐसे ही हो?
बिलकुल। जो चाहिए, वो चाहिए। अगर उसके लिए लड़ोगे नहीं, तो जरूरी नहीं कि वह आपको मिल ही जाए। मैं बहुत साफ तौर पर मानता हूं कि जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा होता है जो चाहने भर से नहीं मिलता। उसके लिए कोशिश करनी पड़ती है। कभी मिलता है, कभी नहीं मिलता, लेकिन कोशिश बंद नहीं होनी चाहिए। अगर मुझे कुछ चाहिए होता है, तो मैं उसके लिए पूरी कोशिश करता हूं।
कभी ऐसा हुआ कि किसी रोल के लिए खुद पीछे पड़े हों?
हां, मैं इसका एक उदाहरण दे सकता हूं, फिल्म ‘83’। मैंने खबर पढ़ी कि कबीर खान फिल्म बना रहे हैं, रणवीर सिंह, कपिल देव के रोल में हैं। मैं क्रिकेट बहुत देखता हूं। तो मैंने तुरंत सोचा कि मोहिंदर अमरनाथ कौन करेगा? क्योंकि वह भी उस कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा थे। फिर मैं सच में कबीर खान के पीछे पड़ गया। मैंने कहा, सर, मिल लो न… आज कॉफी पी लो… आज भी बिजी हो? मुझे इसमें कोई शर्म नहीं है। आखिरकार मुझे वो फिल्म मिली।
देखिए, सच्चाई ये है कि हम उन घरों से नहीं आते जहां मौके खुद चलकर आपके पास आते हैं। हमें जरूरत होती है, हमें खुद कोशिश करनी पड़ती है। मैं दिल्ली से आया हूं। अगर मैं बैठ जाऊं और सोचूं कि कोई फोन कर देगा, तो कोई फोन नहीं करता। आपको खुद ही अपना फोन बजाना पड़ता है। रोज लगता रहता है कि आज बजेगा, कभी बजता है, कभी नहीं भी बजता।