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'हम जैसों के पास मौके खुद चलकर नहीं आते', साकिब सलीम ने बताया किस फिल्म के लिए निर्देशक को किया बार-बार फोन

सार

Saqib Saleem Interview: साकिब सलीम हाल ही में अपने नए शो ‘कप्तान’ में नजर आए हैं। अब साकिब ने अपने शो और इंडस्ट्री को लेकर बात की। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा…
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साकिब सलीम - फोटो : अमर उजाला

वेब सीरीज ‘कप्तान’ में अभिनेता साकिब सलीम एक बार फिर उसी देसी, रॉ और दबंग अंदाज में नजर आ रहे हैं, जिसे ऑडियंस पहले भी पसंद कर चुकी हैं। इस सीरीज में उनके साथ सिद्धार्थ निगम और अंजुम शर्मा भी हैं। हाल ही में अमर उजाला से बातचीत के दौरान साकिब ने अपने किरदार, शो के एक्शन, सिद्धार्थ निगम के साथ सेट पर हुई मस्ती, प्रोड्यूसर के तौर पर आने वाली मुश्किलों और अपने करियर की भूख पर खुलकर बात की। साथ ही उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

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साकिब सलीम - फोटो : इंस्टाग्राम-@saqibsaleem

‘कप्तान’ करते हुए लगा कि चलो फिर से अपने टाइप का रोल मिला?
हां, बिल्कुल… काफी लंबे समय बाद मुझे फिर ऐसा किरदार मिला। ‘रंगबाज' के बाद मुझे बहुत प्यार मिला था। उसके बाद लोगों के लगातार मैसेज आते थे कि सर, वैसा कुछ और करिए, कुछ हार्टलैंड वाला काम करिए। मैं भी जिससे मिलता था, पूछता था कि यार, कुछ है क्या ऐसा? इस शो में मुझे एकदम रॉ, करप्ट और हार्टलैंड की कहानी मिली। ऐसा किरदार मिला जिसमें भरपूर स्वैग था। मुझे इसमें बहुत मजा आया। धीरे धीरे चलने में, एक्शन करने में।

हम लड़कों को एक्शन करने में बहुत मजा आता है। इस शो में तो भर भरकर एक्शन है। एक पूरे एपिसोड में तो सिद्धार्थ बस बैकफ्लिप ही मार रहा था। मैं और अंजुम एक दिन सेट पर बैठे थे। उसका एक्शन सीन चल रहा था। वह बार बार बैकफ्लिप मार रहा था, दीवार पर चढ़ रहा था, कूद रहा था। मैं और अंजुम एक दूसरे की तरफ देखकर यही सोच रहे थे कि हमसे ये सब नहीं हो पाएगा, हम तो बस गोली चलाएंगे। 

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कप्तान सीरीज में साकिब सलीम - फोटो : इंस्टाग्राम-@saqibsaleem

एक्शन दिखने में जितना मजेदार लगता है, क्या उतना ही मुश्किल भी होता है?
बिलकुल। देखने में तो बड़ा मजा आता है, लेकिन करने में पसीना छूट जाता है। चोट भी लगती है, ये तो तय है। मुझे भी लगी थी, सिद्धार्थ को भी। लेकिन बात ये है कि सिद्धार्थ को देखकर लगता था, अगर कोई शेर के पिंजरे में घुस जाएगा, तो लगेगी ही न।

एक होता है नॉर्मल एक्शन, जो हम लोग करते हैं। बंदूक चलाई, मुक्केबाजी की। लेकिन जो वह कर रहा था, वह अलग ही स्तर का था। यहां से कूदना, वहां से छलांग लगाना, ये सब हम नहीं करने वाले। हमारा एक्शन थोड़ा जमीन पर रहता है। गाड़ी से कूद जाओ, थोड़ा भाग लो, लड़ लो, वह ठीक है।

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साकिब सलीम और सिद्धार्थ निगम - फोटो : इंस्टाग्राम-@saqibsaleem

सेट पर सिद्धार्थ निगम की सबसे ज्यादा खिंचाई किस बात पर हुई?
एक दिन शूट के दौरान बड़ा मजेदार किस्सा हुआ। सिद्धार्थ की शर्ट में ऐसे बटन लगे थे जो हल्के से खिंचने पर खुल जाते थे। उसने दीवार से बैकफ्लिप मारी। और जैसे ही नीचे उतरा, उसकी शर्ट खुल गई। बस फिर क्या था, हमने वहीं मजाक शुरू कर दिया। मैंने कहा, ये बटन ऐसे थे ही क्यों? नॉर्मल बटन नहीं लगा सकते थे क्या? फिर उसे छेड़ने लगे कि तुमने पहले से सोच रखा था क्या कि एक बैकफ्लिप मारूंगा, बटन खुलेंगे और बॉडी दिखाऊंगा। काम जितना होता था, मजाक भी उतना ही चलता था।

सिद्धार्थ में ऐसी क्या बात है जो आपको पसंद भी है और खिंचाई करने का मन भी करता है?
अरे, सिद्धार्थ की बातें तो बहुत हैं। हम लोग शूट करके आते थे और एक दिन मैंने देखा कि साहब रात को सूट बूट पहनकर कहीं जा रहे हैं। मैंने पूछा, भाई, ये क्या है? तो उसने कहा, एक इवेंट है, वहां जा रहा हूं। मैंने तो अपने मैनेजर को फोन करके पूछ लिया कि ये इवेंट हम क्यों नहीं कर रहे हैं। बरेली में सिद्धार्थ रोज सूट पहनकर निकल रहा था।

लेकिन उसकी सबसे अच्छी बात ये है कि वह बहुत सच्चा लड़का है। एक बार हम लोग बरेली में साथ खाना खा रहे थे। उसने मुझे अपनी पूरी जर्नी सुनाई। कैसे उसे ‘धूम’ मिली, क्या क्या हुआ, उसकी जिंदगी कैसी रही। मैं उसे सुनकर यही सोच रहा था कि यार, क्या खूबसूरत सफर है। छोटे शहर से आया हुआ लड़का, अपनी मेहनत से यहां तक पहुंचा है और आज इतना अच्छा कर रहा है। अगर कोई इतना अच्छा हो, तो उसकी टांग थोड़ी तो खींचनी ही चाहिए। सच्चाई ये है कि हम उसके भाई जैसे हैं।

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साकिब सलीम - फोटो : इंस्टाग्राम-@saqibsaleem

अब आप अभिनेता के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी हैं। आज के समय में प्रोड्यूसर होना कितना मुश्किल है?
बहुत मुश्किल है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में एक यूट्यूबर ने फिल्म बनाई। उसने अपनी पूरी कम्युनिटी बनाई। लोगों को फिल्म बनने का पूरा सफर दिखाया। फिर उनसे कहा कि अगर आप ये फिल्म देखना चाहते हैं, तो डिस्ट्रीब्यूटर्स को लिखिए। लाखों लोगों ने ऐसा किया। फिल्म ने बहुत अच्छा कारोबार किया। ये उदाहरण मुझे प्रेरित करता है। अगर कोई इंसान इस तरह कर सकता है, तो चीजें हो सकती हैं। लेकिन उसके लिए लगातार लगे रहना पड़ता है।

आज इंडस्ट्री में सबसे बड़ी उलझन क्या लगती है?
बहुत सारी चुनौतियां हैं। प्लेटफॉर्म की अपनी चुनौतियां हैं। अब थिएटर और ओटीटी के बीच बड़ी लड़ाई चल रही है। जब मैं आया था, तब मुझे सिर्फ थिएटर वाली फिल्में करनी थीं। अब बहुत कुछ बदल गया है। पहले एक ही रास्ता था। फिल्म बनाओ और थिएटर में रिलीज करो। अब इतने विकल्प आ गए हैं कि स्पष्टता थोड़ी कम हो गई है। कई बार लगता है कि आप प्रोड्यूसर कम और लाइन प्रोड्यूसर ज्यादा बन जाते हैं। क्योंकि कई बार चीजें इस तरह बनने लगती हैं कि चलो, ये बन रहा है तो बना लेते हैं। जबकि फिल्म इसलिए बननी चाहिए क्योंकि आप उसे बनाना चाहते हैं। मेरे हिसाब से वही असली बात है।

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साकिब सलीम - फोटो : इंस्टाग्राम-@saqibsaleem

सीरीज में आपका किरदार तो जो चाहता है, उसके पीछे पड़ जाता है। असल जिंदगी में भी ऐसे ही हो?
बिलकुल। जो चाहिए, वो चाहिए। अगर उसके लिए लड़ोगे नहीं, तो जरूरी नहीं कि वह आपको मिल ही जाए। मैं बहुत साफ तौर पर मानता हूं कि जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा होता है जो चाहने भर से नहीं मिलता। उसके लिए कोशिश करनी पड़ती है। कभी मिलता है, कभी नहीं मिलता, लेकिन कोशिश बंद नहीं होनी चाहिए। अगर मुझे कुछ चाहिए होता है, तो मैं उसके लिए पूरी कोशिश करता हूं।

कभी ऐसा हुआ कि किसी रोल के लिए खुद पीछे पड़े हों?
हां, मैं इसका एक उदाहरण दे सकता हूं, फिल्म ‘83’। मैंने खबर पढ़ी कि कबीर खान फिल्म बना रहे हैं, रणवीर सिंह, कपिल देव के रोल में हैं। मैं क्रिकेट बहुत देखता हूं। तो मैंने तुरंत सोचा कि मोहिंदर अमरनाथ कौन करेगा? क्योंकि वह भी उस कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा थे। फिर मैं सच में कबीर खान के पीछे पड़ गया। मैंने कहा, सर, मिल लो न… आज कॉफी पी लो… आज भी बिजी हो? मुझे इसमें कोई शर्म नहीं है। आखिरकार मुझे वो फिल्म मिली।

देखिए, सच्चाई ये है कि हम उन घरों से नहीं आते जहां मौके खुद चलकर आपके पास आते हैं। हमें जरूरत होती है, हमें खुद कोशिश करनी पड़ती है। मैं दिल्ली से आया हूं। अगर मैं बैठ जाऊं और सोचूं कि कोई फोन कर देगा, तो कोई फोन नहीं करता। आपको खुद ही अपना फोन बजाना पड़ता है। रोज लगता रहता है कि आज बजेगा, कभी बजता है, कभी नहीं भी बजता।


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