वागले की दुनिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, आतिश कपाड़िया से आपकी दोस्ती कैसे हुई?
मैं नरसी मोनजी कॉलेज का महासचिव रह चुका हूं। खूब नाटक लिखता था, निर्देशित करता था, अभिनय भी करता था। वहीं लाइब्रेरी में बैठे बैठे एक दिन कुछ लिख रहा था तो आतिश आए और बोले कि इसे मैं थोड़ा बेहतर करने की कोशिश करूं? और, क्या कमाल लिखा उन्होंने उस दिन। बस, उसी दिन से हमारी जोड़ी बन गई जो आज तक कायम है। वो राइटर बन गया और मैं एक्टर-प्रोड्यूसर। अभी ‘वागले की दुनिया’ के शुरू के 50 एपीसोड भी आतिश ने ही लिखे। फिर वह किसी और काम में मसरूफ हुए तो मैंने अरसे बाद लिखने का जिम्मा संभाला। कहां तो मैंने आतिश को लेखन का मौका दिया था, और कहां अब आतिश ने फिर से मुझे लेखन की तरफ उकसाया और यकीन नहीं होता कि मैं 950 से ऊपर एपिसोड के लेखन का हिस्सा बन चुका हूं।