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यश चोपड़ा ने दिखाया रोमांस का नया अंदाज, इन 10 फिल्मों से जीता सबका दिल

Wed, 21 Oct 2020 03:46 PM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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यश चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
यश चोपड़ा ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा के अंदर रोमांस की एक नई परिभाषा को गढ़ा। वक्त के साथ उन्होंने दर्शकों की नब्ज को समझा और फिर एक के बाद एक ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो बॉलीवुड के सुनहरे इतिहास में दर्ज होती चली गईं। 21 अक्तूबर 2012 को यश चोपड़ा का निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर आपको बताते हैं उनकी बनाई कुछ बेहतरीन फिल्मों के बारे में।
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वक्त - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वक्त (1965)
60 के दशक में जब फिल्मों में अमूमन एक हीरो और एक हीरोइन होती थी। इस दौर में वो एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसमें एक, दो नहीं बल्कि कई सितारे थे। कहा जाता है कि 'वक्त' हिंदी सिनेमा की पहली मल्टी स्टारर फिल्म थी, जो लॉस्ट एंड फाउंड फॉर्मूले पर आधारित थी। ये फॉर्मूला कुछ ऐसा हिट हुआ कि अगले तीस सालों तक बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों की भरमार हो गई।

 
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इत्तेफाक - फोटो : फाइल
इत्तेफाक (1969)
'वक्त' की कामयाबी के बाद ऐसा नहीं हुआ कि यश चोपड़ा ने इसी तर्ज पर फिल्में बनानी शुरू कर दीं। 'इत्तेफाक' बिलकुल अलग तरह की फिल्म थी, जिसे बनाकर यश चोपड़ा ने दर्शकों को चौंका दिया था। ये फिल्म सिर्फ एक रात की कहानी थी, जिसमें एक भी गाना नहीं था।

 

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दाग - फोटो : फाइल
दाग (1972)
ये फिल्म यशराज बैनर तले बनने वाली पहली फिल्म थी। इससे पहले यश चोपड़ा अपने बड़े भाई बी आर चोपड़ा के बैनर तले फिल्में निर्देशित करते थे। दाग, हालांकि अंग्रेजी फिल्म 'सनफ्लॉवर' से प्रेरित थी लेकिन उसे समकालीन बनाने के लिए उन्होंने इसकी कहानी को गुलशन नंदा से लिखवाया। समय से आगे की ये फिल्म थी, जिसमें एक शख्स की पत्नी गायब हो जाती है, तो वो बिना शादी किए एक दूसरी महिला के साथ रहने लगता है।

 
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दीवार - फोटो : फाइल
दीवार (1975)
ये फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर को एक नए मुकाम पर ले गई। दो भाइयों की कहानी, एक कानून का रखवाला और दूसरा कानून का मुजरिम, इस कहानी को यश चोपड़ा ने बेहतरीन तरीके से परदे पर पेश किया। सलीम जावेद की स्क्रिप्ट और संवाद, जैसे- मेरे पास मां है, तो भारतीय सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।
 
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त्रिशूल - फोटो : फाइल
त्रिशूल (1978)
संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म एक 'नाजायज बेटे' के अपने पिता से बदला लेने की कहानी है। एक बार फिर मजबूत कथानक, बेहतरीन अभिनय और यश चोपड़ा के कसे हुए निर्देशन ने ऐसा जादू चलाया कि फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और यश चोपड़ा का नाम हिंदी सिनेमा के अग्रणी नामों में शुमार हो गया।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सिलसिला (1981)
अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म अपनी कास्टिंग की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में रही। रेखा, जया और अमिताभ को एक फिल्म में लाने का मुश्किल काम यश चोपड़ा ने अंजाम दिया। ये फिल्म व्यवसायिक तौर पर ज्यादा नहीं चली लेकिन इसके गीत बड़े लोकप्रिय साबित हुए।

 

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चांदनी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चांदनी (1989)
एक बार फिर यश चोपड़ा रोमांस की तरफ लौटे और नाच-गाने से भरपूर फिल्म बनाई चांदनी। श्रीदेवी, ऋषि कपूर की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म जबरदस्त कामयाब रही। यश चोपड़ा ने खूबसूरत लोकेशंस को बखूबी परदे पर उतारा और फिल्म ने दर्शकों को सुखद अहसास दिया।

 

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लम्हे - फोटो : फाइल
लम्हे (1991)
यश चोपड़ा ने ये फिल्म बेहद जोखिम मोल लेकर बनाई गई थी। ये फिल्म अपने वक्त से बेहद आगे की फिल्म थी। जिसमें एक लड़की को अपनी मां के प्रेमी से प्यार हो जाता है। इस तरह की कहानी इससे पहले हिंदी सिनेमा के परदे पर कभी नहीं आई थी। फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी का जबरदस्त अभिनय था।

 

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डर - फोटो : फाइल
डर (1993)
यश चोपड़ा की ये फिल्म एक तरह से ट्रेंड सेटर साबित हुई। जैसे दीवार ने अमिताभ बच्चन के करियर में पंख लगा दिए थे, वैसे ही डर ने शाहरुख खान के करियर को नई बुलंदियों पर पहुंचा दिया। फिल्म की कहानी हीरो नहीं बल्कि एक विलेन के हीरोइन से एक तरफा प्रेम के इर्द गिर्द बुनी गई थी। शाहरुख खान का निभाया ये खलनायक का पात्र काफी लोकप्रिय साबित हुआ और फिल्म सुपरहिट रही।
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दिल तो पागल है - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दिल तो पागल है (1997)
शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे सितारों को लेकर 65 साल के यश चोपड़ा ने ये बेहद युवा फिल्म बनाई और नई पीढ़ी के निर्देशकों के समक्ष एक चुनौती पेश कर दी। बेहतरीन संगीत और भावनात्मक कहानी से सजी ये फिल्म युवा और उम्रदराज, हर किस्म के दर्शकों को खूब भाई।

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