जाने-माने फिल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी बनाई फिल्मों के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। उनकी फिल्मों में उठाए गए समाज के छोटे-छोटे मुद्दों को भी बड़ी तरजीह दी गई। यश चोपड़ा ने सिर्फ फिल्में ही नहीं बनाईं, उन्होंने पर्दे पर असरदार कहानियां गढ़ीं और उनसे ही पैदा हुए फिल्मों के कई सुपरस्टार। आज हम यश चोपड़ा की फिल्मों की उन अभिनेत्रियों की बात करेंगे जिन्होंने समाज, परिवार और प्रेमी सभी में सामंजस्य बिठाकर अपने किरदार को अंजाम दिया।
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धूल का फूल में माला सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
माला सिन्हा
यश चोपड़ा ने 1959 में आई फिल्म 'धूल का फूल' में पहली बार फिल्म निर्देशन की बागडोर संभाली। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री माला सिन्हा का मीना खोसला के रूप में किरदार बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। मीना महेश से प्रेम करती है। ये दोनों एक दिन अचानक आगे बढ़ते हैं और मीना गर्भवती हो जाती है। दूसरी तरफ महेश अपने घरवालों के दबाव में आकर मालती राय से शादी कर लेता है। इधर, मीना अपने बच्चे को जन्म देती है, इस वजह से उसके परिवारजन उसे अपने घर से निकाल देते हैं। अब यह बिन ब्याही मां किस तरह अपने बच्चे के साथ उस समय में गुजारा करती है जब इस तरह के काम समाज में पाप समझे जाते थे? लेकिन, माला सिन्हा ने इस किरदार को बहुत ही शानदार तरीके से निभाया है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित भी किया गया। इस फिल्म के बाद माला सिन्हा ने यश चोपड़ा के साथ उनकी अगली फिल्म 'धर्मपुत्र' में भी मुख्य भूमिका निभाई।
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वक्त में साधना
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साधना
वर्ष 1965 में आई यश चोपड़ा की फिल्म 'वक्त' में अभिनेत्री साधना को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। साधना का किरदार मीना इस फिल्म में कई दोराहों से गुजरा। एक चोर राजा मीना से प्यार करने लगता है जबकि मीना तो पहले से ही रवि से शादी करने की चाह रखती है, जो कि उसका पारिवारिक मित्र भी है। इन दोनों की सगाई हो रही होती है उसी समय अचानक से समारोह में भंग पड़ता है। मीना के माता पिता को पता चलता है कि रवि उनके दोस्त का असली बेटा नहीं है। अब यहां से शुरू हो जाती है मीना की अग्नि परीक्षा। मीना परिवार को भी संभालती है और अपने प्रेम को भी कायम रखती है। इस फिल्म में साधना का काम उनके सबसे बेहतरीन कामों में से एक है।
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नंदा
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नंदा
अभिनेत्री नंदा वैसे तो यश चोपड़ा के निर्देशन में 'धूल का फूल' फिल्म में भी काम कर चुकी थीं लेकिन उन्हें अपने आप को दिखाने का मौका वर्ष 1969 में आई फिल्म 'इत्तेफाक' में मिला। यहां वह राजेश खन्ना, बिंदु और इफ्तेखार के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं। नंदा का किरदार रेखा कहानी के दौरान बहुत कुछ झेलता है। दरअसल, फिल्म में दिलीप रॉय नाम का एक चित्रकार है जो अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है। अचानक वह पुलिस के चंगुल से भाग निकलता है और सीधे रेखा के घर पहुंचता है। रेखा पहले से ही शादीशुदा है लेकिन उसका पति उस वक्त घर पर नहीं है। अब यहां रेखा दुविधा में है कि दिलीप को छुपाने के लिए कहीं पुलिस उसे न पकड़ ले। अगर वह पुलिस को बताती है तो दिलीप उसे मार देगा। और, अगर ऐसे में रेखा का पति आता है तो भी वह दिक्कत में आएगी। तो यहां वह जो स्थिति का सामना कर रही है, उसके लिए वह बहुत चुनौतीपूर्ण है। इस किरदार को नंदा ने बहुत शानदार तरीके से निभाया और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार का नामांकन भी मिला।
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शर्मिला टैगोर
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शर्मिला टैगोर
यश चोपड़ा की वर्ष 1973 में आई फिल्म 'दाग' में राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इस फिल्म की दो मुख्य अभिनेत्रियां हैं और दोनों की ही एक दुख भरी दास्तान है। शर्मिला टैगोर का किरदार फिल्म में सोनिया कोहली का है। वह राजेश खन्ना के किरदार सुनील कोहली की पत्नी है। ये दोनों शादी करके जब हनीमून के लिए जाते हैं तो अचानक से मौसम खराब होने की वजह से इन दोनों को अपने बॉस के घर पर रुकना पड़ता है। इसी बीच अचानक से बॉस का लड़का धीरज सोनिया से दुष्कर्म करने की कोशिश करता है और इस छीना झपटी में सुनील के हाथों धीरज की हत्या हो जाती है। इस घटना पर अदालत सुनील को उम्र कैद की सजा सुनाती है। यहां से सोनिया के लिए काफी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। वह सुनील के बच्चे की मां बनने वाली है और अब बच्चे के सिर से उसके पिता का साया भी उठ गया। सोनिया खुद एक अध्यापक की नौकरी करती और अपने बच्चे को पालती है।
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राखी
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राखी
फिल्म ‘दाग’ में जब सुनील को जेल ले जाया जाता है तो उसकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होती है। सुनील वहां से बच निकलता है और वह एक अमीर औरत चांदनी से शादी कर लेता है। साथ ही वह अपना नाम सुनील से बदलकर सुधीर रख लेता है। चांदनी का किरदार राखी ने अदा किया है। चांदनी की अपनी एक अलग कहानी है। वह पहले किसी और से प्यार करती थी और उसके बच्चे की मां बनने वाली थी। लेकिन, गर्भवती होने के बावजूद उसका प्रेमी चांदनी को छोड़कर चला गया। तब चांदनी ने सुनील से शादी की और सुनील ने चांदनी के बच्चे को अपना नाम दिया। दोनों ही अभिनेत्रियों के किरदारों ने फिल्म में बहुत कुछ झेला। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने यह दिखाया कि अकेली औरत भी अगर चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए शर्मिला टैगोर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला। तो, वहीं राखी ने सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार को जीता।
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परवीन बाबी
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परवीन बाबी
यश चोपड़ा की फिल्मों की अभिनेत्री यूं ही खास नहीं रहती हैं। उन्होंने कुछ खास काम भी किए होते हैं। वर्ष 1975 में आई फिल्म 'दीवार' में हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री का एक नया रूप दिखाया गया। यहां परवीन बॉबी का किरदार अनीता दिखाता है कि मर्दों की तरह औरतें भी बार में जाकर शराब पी सकती हैं और सिगरेट का भी सेवन कर सकती हैं। यह फिल्म उस समय की है जब नशेबाजी जैसी चीजें सिर्फ मर्दों की निशानी ही हुआ करती थीं। लेकिन, यश चोपड़ा ने अपनी इस फिल्म के जरिए दिखाया कि ये सब औरतें भी कर सकती हैं। हकीकत तो यह है कि यह सारे काम करती तो औरतें पहले भी थीं लेकिन कभी सामने नहीं आईं। यह चमत्कार यश चोपड़ा के बनाए हुए परवीन बाबी के इस किरदार का ही था जिसके बाद लड़कियां भी खुलकर सामने आईं और उन्होंने दुनिया को दिखाया कि वह भी मर्दों से कुछ कम नहीं।
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सिलसिला
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रेखा
निर्देशन के मामले में यश चोपड़ा अपने सबसे बेहतरीन काम के बारे में जिस फिल्म का नाम लेते हैं वह है उनकी वर्ष 1981 में आई फिल्म 'सिलसिला'। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, रेखा, संजीव कुमार, शशि कपूर आदि ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। अभिनेत्रियों में यहां मुख्य किरदार तो जया का है लेकिन बेहतरीन काम सहायक अभिनेत्री के रूप में रेखा ने भी कर दिखाया है। रेखा का किरदार चांदनी अमित से प्यार करता है और अमित भी चांदनी से बहुत प्यार करता है। दोनों शादी करने जाते हैं लेकिन तभी अमित के भाई शेखर की एक हवाई लड़ाई में मौत हो जाती है। शेखर की होने वाली पत्नी शोभा पर तरस खाकर अमित उससे शादी कर लेता है और चांदनी को पत्र लिखकर बोलता है कि वह उसे भूल जाए। यहां चांदनी के लिए बहुत दुविधा की स्थिति है। कहना तो आसान है लेकिन किसी को भूलना इतना आसान नहीं होता। तब चांदनी सब कुछ छोड़ छाड़कर डॉ वीके आनंद से शादी कर लेती है। ज्यादा दिक्कत तब शुरू होती है जब अमित एक बार फिर से चांदनी की जिंदगी में दखल देने लगता है। ऐसे में चांदनी को वफाई और बेवफाई दोनों ही झेलने पड़ रहे हैं। इन दोनों के बीच में यश चोपड़ा ने रेखा से जो काम करवाया, वही कमाल है।
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श्रीदेवी
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श्रीदेवी
यश चोपड़ा ने अभिनेत्री श्रीदेवी के साथ दो फिल्मों में काम किया। एक वर्ष 1989 में आई थी 'चांदनी' और दूसरी वर्ष 1991 में आई 'लम्हे'। दोनों ही फिल्में म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म रही और हिट भी हुईं। श्रीदेवी का फिल्म 'चांदनी' में चांदनी गुप्ता का किरदार है। एक शादी के दौरान चांदनी और रोहित मिलते हैं और एक दूसरे से प्यार कर बैठते हैं। बाद में रोहित एक दुर्घटना का शिकार होता है और वह लकवा ग्रस्त हो जाता है। ऐसे में रोहित चांदनी को अपनी जिंदगी से दूर जाने के लिए बोलता है। चांदनी उससे दूर चली जाती है लेकिन बाद में फिर से वह तब वापस आती है जब उसे पता चलता है कि उसका प्रेमी रोहित फिर से ठीक हो गया है। यहां चांदनी के ऊपर परिवार और खुद रोहित की भी जिम्मेदारी थी इसलिए, वह रोहित की बात मान कर उससे दूर चली गई लेकिन उसका प्यार ही था जिसने उसे रोहित के पास आने पर फिर से मजबूर किया। यही भावनाएं और दर्द दर्शकों को भी छू गया। फिल्म में शानदार अभिनय के लिए श्रीदेवी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
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डर में जूही चावला
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जूही चावला
जूही चावला की वर्ष 1993 में आई फिल्म 'डर' में यश चोपड़ा ने प्यार में पागल एक इंसान को दिखाया। वह जूही चावला के किरदार किरण अवस्थी के लिए अजीब मुश्किलें पैदा करता है। दरअसल, किरण सुनील से मोहब्बत करती है लेकिन राहुल किरण से बेइंतहा प्यार करता है। उसका प्यार किरण के लिए एक घुटन की तरह है। वह उसे कभी कुबूल ही नहीं कर पाती। अपने आप को नकारे जाने की वजह से राहुल एक साइको किलर बन जाता है और वह किरण और उसके पति सुनील दोनों को मार डालना चाहता है। किरण की सबसे बड़ी दुविधा यही है के उसे प्यार तो मिल रहा है लेकिन वह भी बीमार। यहां वह बीमार प्रेमी को नकार कर उसके कोप का शिकार बने या फिर अपने पति से वफा करके उसकी जान खतरे में डाले। इस फिल्म को बनाने में तो यश चोपड़ा को फिल्म के मुख्य अभिनेता सनी देओल से दुश्मनी भी लेनी पड़ गई। फिल्म में शानदार अभिनय के लिए जूही चावला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
दिल तो पागल है में करिश्मा कपूर
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करिश्मा कपूर
यश चोपड़ा की वर्ष 1997 में आई फिल्म 'दिल तो पागल है' में करिश्मा कपूर का किरदार निशा भी बहुत अजीब है। निशा और राहुल (शाहरुख खान) बचपन के दोस्त हैं और एक साथ एक म्यूजिकल ग्रुप में काम भी करते हैं। निशा राहुल से प्यार करती है लेकिन राहुल को इसके बारे में नहीं पता। अचानक से राहुल इस म्यूजिकल ग्रुप में शामिल होने वाली एक लड़की पूजा से प्रेम करने लगता है। यहां से निशा की जलन शुरू हो जाती है। कुछ घटनाएं भी ऐसी होती हैं जिससे राहुल को पूजा के करीब जाने का मौका मिल जाता है। एक निशा है जो राहुल के इतने करीब रहने के बावजूद कभी उससे कह नहीं पाई कि वह राहुल से प्यार करती है। लेकिन, वह राहुल की खुशी के लिए अंत में अपने प्यार का बलिदान भी दे देती है। करिश्मा कपूर ने अपने किरदार को शानदार तरीके से निभाया। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।