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इन 10 फिल्मों ने साबित किया कानून को अंधा, बताया किस तरह हवा होता है न्याय

Thu, 16 Jul 2020 08:35 PM IST
प्रतीक्षा राणावत रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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वर्ल्ड डे ऑफ इंटरनेशनल जस्टिस - फोटो : Social Media
कानून व्यवस्था की अनदेखी जितना हमारे देश में होती है लगभग उतनी ही दिक्कतें बाकी दूसरे देशों में भी हैं। इन व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर एक दिन विश्व न्याय दिवस के रूप में भी चुना गया है। फिल्में समाज का आईना होती हैं। इसलिए, समाज में कानून के साथ होने वाले खिलवाड़ पर भी हिंदी सिनेमा में एक से एक बेहतरीन फिल्में बनाई गई हैं। हमारे देश में ऐसी फिल्मों की शुरुआत तो 1960 में आई फिल्म 'कानून' से हुई थी है लेकिन तब से लेकर अब तक लगातार लचर कानून व्यवस्था पर फिल्में बनाई जा रही हैं। आज हम आपको कानून को अंधा बताने वाली कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताएंगे।
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कानून - फोटो : Social Media
कानून (1960)
क्योंकि कोर्टरूम ड्रामा जॉनर ही हिंदी सिनेमा में इसी फिल्म से शुरू हुआ तो सबसे पहले इसी फिल्म को जानते हैं। बी आर चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजेंद्र कुमार, अशोक कुमार, नंदा, महमूद आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। राजेंद्र कुमार ने इस फिल्म में एक वकील का किरदार निभाया जो एक निर्दोष व्यक्ति को बचाने की पैरवी करते हैं। इस केस की सुनवाई जज के रूप में अशोक कुमार का किरदार कर रहा होता है जो कि खुद ही अपराधी है। इस फिल्म में सीधे तौर पर दिखाया गया है कि किस तरह झूठे सबूतों और गवाहों की बुनियाद पर किसी निर्दोष को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जा सकता है। इस फिल्म की एक और खास बात यह रही कि यह हिंदी सिनेमा की पहली बिना गीत वाली फिल्म है।
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बात एक रात की - फोटो : Social Media
बात एक रात की (1962)
शंकर मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में देव आनंद, वहीदा रहमान और जॉनी वॉकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म में देव आनंद ने एक वकील राजेश्वर का किरदार निभाया है। वहीदा रहमान कहानी में एक ऐसी हत्या की दोषी हैं जो उन्होंने नहीं की है। नीला के किरदार में हालांकि फिर भी वह अपने गुनाहों को कुबूल कर लेती हैं। जब राजेश्वर अपने तरीके से इस केस की तह तक जाता है तो उसे पता चलता है कि यह काम नीला ने नहीं किया है। बाद में वह सीआईडी की मदद से इस केस का पूरा पर्दाफाश करता है और नीला को सजा मिलने से बचाता है।

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Meri Jung - फोटो : Social Media
मेरी जंग (1985) 
अनिल कपूर, मीनाक्षी शेषाद्री, नूतन, अमरीश पुरी, परीक्षित साहनी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म कोर्टरूम ड्रामा जॉनर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। फिल्म की कहानी में एक खुशहाल परिवार है जिसमें मां बाप के साथ एक बेटा और बेटी रहते हैं। अचानक से उनकी जिंदगी में तूफान आ जाता है जब जीडी ठकराल नाम का नामचीन वकील अरुण के पिता दीपक वर्मा को झूठे केस में फंसाकर सजा दिलवाने की कोशिश करता है। फिल्म में अरुण का किरदार अनिल कपूर ने निभाया है। वह अपने पिता को बचाने के लिए खुद वकील का कोट पहनता है और अपने पिता का केस लड़ता है। अंत में वह अपने पिता को बेगुनाह साबित करता है। सुभाष घई की इस सुपरहिट फिल्म में भी कानून का गलत फायदा उठाने वालों को उजागर किया गया है।
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दामिनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दामिनी (1993)
इस फिल्म में दामिनी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री को अंधे कानून के खिलाफ आवाज उठाते हुए देखा गया है। कहानी में दामिनी अपने पति शेखर गुप्ता के भाई राकेश को एक दिन अपने घर की नौकरानी का बलात्कार करते हुए देखती है। इस घटना को देखने के बाद वह चुप नहीं बैठती और तमाम परेशानियां झेलने के बावजूद वह अपने पति शेखर और एक वकील गोविंद के साथ मिलकर उसे न्याय दिलवाती है। इस फिल्म में मीनाक्षी के पति का किरदार ऋषि कपूर ने निभाया है और वकील के किरदार में सनी देओल नजर आए हैं। इस फिल्म में सनी देओल का बोला हुआ संवाद 'तारीख पर तारीख' आज भी बहुत मशहूर है। इन तीनों के अलावा फिल्म में अमरीश पुरी भी मुख्य भूमिका में हैं।
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omg
ओ माय गॉड (2012)
यह कोर्टरूम ड्रामा बिल्कुल आज के समय का है। दरअसल, इस फिल्म में किसी हत्या, चोरी, लूट या फिर किसी आम अपराध का केस नहीं चलता, बल्कि वकील कांजी लालजी मेहता के किरदार में परेश रावल सीधे भगवान पर ही केस करते हैं। दरअसल, एक भूकंप में कांजी की दुकान गिर जाती है जिसमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए वह बीमा कंपनियों और भगवान पर केस करता है। उमेश शुक्ला के निर्देशन में बनी यह फिल्म इस केस के सहारे भगवान के नाम पर देश में होने वाली लूट का शानदार तरीके से खुलासा करती है। फिल्म में परेश रावल के साथ अक्षय कुमार और मिथुन चक्रवर्ती मुख्य भूमिकाओं में हैं।
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जॉली एलएलबी—2 - फोटो : demo pic
जॉली एलएलबी (2013)
सुभाष कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी शुरुआत में एक संघर्षशील वकील की दिक्कतों को समझाती है। उसके बाद जगदीश त्यागी उर्फ जॉली नाम के उस वकील को एक हिट एंड रन का केस मिलता है जिसे वह पीड़ित के लिए लड़ना चाहता है। लेकिन उसकी दिक्कत तब बढ़ जाती है जब इस केस में उसके विपक्ष में उस समय का सबसे बेहतरीन वकील राजपाल उतर आता है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह छोटे वकीलों की खरीद फरोख्त करके पैसे वाले आदमी कानून को अपनी जेब में रखते हैं। फिल्म में अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला, अमृता राव, बोमन ईरानी और संजय मिश्रा मुख्य भूमिकाओं में हैं।

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jazbaa
जज्बा (2016)
कानून से खिलवाड़ करने के मामले में यह फिल्म भी काफी सही रही। संजय गुप्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई लेकिन समीक्षकों से काफी हद तक अच्छी प्रतिक्रिया मिली। फिल्म की कहानी में अनुराधा वर्मा एक पेशेवर और ईमानदार वकील है जो एक बेटी की अकेली मां भी है। अचानक से उसकी बेटी सनाया का अपहरण किया जाता है और अनुराधा को एक दुराचारी को अदालत में सजा से बचाने के लिए मजबूर किया जाता है। इस फिल्म में ऐश्वर्या राय, इरफान खान और शबाना आजमी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

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Pink film - फोटो : Mumbai, Amar Ujala
पिंक (2016)
समाज में आए दिन लड़कियों के साथ होने वाली जबरदस्ती को ध्यान में रखते हुए यह फिल्म बनाई गई है। इस फिल्म का निर्देशन अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने किया है और अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हाड़ी आदि कलाकार ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी में मीनल नाम की एक लड़की उसके दोस्तों के साथ जबरदस्ती की शिकार होती है। इसके लिए वह एक राजनीतिज्ञ के भतीजे के खिलाफ केस दायर करती है। इन लड़कियों की मजबूरी समझते हुए एक सेवानिवृत्त हो चुका वकील दीपक उनकी मदद करने की ठानता है। जो लोग लड़कियों की 'ना' को भी 'हां' समझ लेते हैं, यह फिल्म ऐसे लोगों को संदेश देती है कि जब लड़की 'ना' बोलती है तो उसका मतलब 'ना' ही होता है।

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जॉली एलएलबी-2
जॉली एलएलबी 2 (2017)
वर्ष 2013 में आई फिल्म 'जॉली एलएलबी' का यह सीक्वल है। हालांकि इस फिल्म में सौरभ शुक्ला के अलावा पहली फिल्म से किसी दूसरे किरदार को जगह नहीं दी गई है। सुभाष कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी में एक डग्गेमार वकील जगदीश मिश्रा होता है जो लोगों को धोखा देने में पूरी तरह सफल है। वह कचहरी में अपना एक अलग रुतबा बनाना चाहता है। इस चक्कर में उससे कुछ गलत काम होते हैं जिसको सही करने के लिए वह अपनी जान पर खेलने तक के लिए तैयार होता है। फिल्म में अक्षय कुमार, हुमा कुरैशी, सौरभ शुक्ला, अनु कपूर और शायोनी गुप्ता ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
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Section 375 - फोटो : social media
सेक्शन 375 (2019)
नाम के हिसाब से यह फिल्म बिल्कुल एक रेप केस पर ही आधारित है। दरअसल, फिल्म में एक जाना माना फिल्म निर्देशक रोहन खुराना पर एक कॉस्ट्यूम डिजाइनर अंजली रेप का आरोप लगाती है। इस आरोप के बाद सत्र न्यायालय उसे 10 साल की सजा देता है। जब रोहन उच्च न्यायालय में अपनी बेगुनाही को साबित करने की अपील करता है तो यहां दो वकीलों के बीच में एक द्वंद देखने को मिलता है। सबूतों और गवाहों की आड़ में सच्चाई इस कदर छुप जाती है कि किसी को शक भी नहीं होता की हकीकत क्या है? वह सबूत और गवाह ही हैं जो कानून की आंखों में भी धूल झोंक देते हैं। अजय बहल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अक्षय खन्ना, ऋचा चड्ढा, राहुल भट्ट और मीरा चोपड़ा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
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