Women Day Special: आज दुनिया भर में महिला दिवस (8 मार्च) मनाया जा रहा है। फिल्मी पर्दे पर भी महिला केंद्रित कहानियां और संवाद आधी आबादी को प्रेरणा देने का काम करते रहे हैं। जानिए, ऐसे ही कुछ चर्चित डायलॉग्स के बारे में, जिन्होंने स्त्री शक्ति और सशक्तिकरण के मुद्दों को मुखरता से बयां किया है।
‘तू खुद की खोज में निकल, तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है।’ तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म ‘पिंक’ में तनवीर गाजी की लिखी ये पक्तियां महिला सशक्तिकरण की राह आम स्त्रियों को दिखाती है। इसी तरह कई महिला केंद्रित फिल्मों के संवाद भी महिलाओं को प्रेरित करते हैं, उनकी शक्ति और क्षमता का परिचय दुनिया को करवाते हैं। महिला दिवस के खास अवसर पर पढ़िए, ऐसे ही कुछ चर्चित हिंदी फिल्मों के संवाद।
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फिल्म 'पिंक'
- फोटो : अमर उजाला
‘पिंक’ ने समझाया ‘ना’ का असल मतलब
साल 2016 में रिलीज हुई तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘पिंक’ को अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने निर्देशित किया था। फिल्म का सबसे सशक्त संवाद ‘ना का मतलब ना होता है’ रहा। यह डायलॉग बताता है कि एक महिला की अस्वीकृति का सम्मान किया जाना चाहिए।
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फिल्म 'गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल'
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‘गुंजन सक्सेना’ ने सपनों को दी उड़ान
साल 2020 में रिलीज हुई जान्हवी कपूर की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में एक लड़की के एयरफोर्स ऑफिसर बनने की कहानी थी। फिल्म में का यह संवाद दुनिया से लड़कर अपने सपनों को पूरा करनी की उम्मीद देता है। एक स्त्री को उसकी क्षमता से वाकिफ करता है।
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फिल्म 'दंगल'
- फोटो : अमर उजाला
‘दंगल’ ने दी लैंगिक समानता की सीख
साल 2016 में रिलीज हुई आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ में एक पिता अपनी बेटियों को रेसलर बनाता है। दुनिया को बताता है कि गोल्ड मेडल लड़का लाए या लड़की, मेडल तो मेडल होता है। यह फिल्म अपने इसी चर्चित संवाद के जरिए सहजता से लैंगिक समानता की सीख दर्शकों को देती है।
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फिल्म 'गंगू बाई काठियावाड़ी'
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कभी हार ना मनाने का संदेश देती ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’
संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी(2022)’ एक वेश्या की कहानी जरूरी थी। लेकिन इस कहानी में एक स्त्री के कभी ना हार माने की क्षमता को भी बखूबी दिखाया गया। फिल्म पुरुषों को उनका कुरूप चेहरा भी दिखाती है। इस फिल्म के कई डायलॉग मशहूर हुए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित यही डायलॉग रहा है।
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फिल्म 'थप्पड़'
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‘थप्पड़’ फिल्म ने समझाया स्वाभिमान का महत्व
साल 2020 में रिलीज फिल्म ‘थप्पड़’ में तापसी पन्नू के किरदार ने घरेलु हिंसा के खिलाफ मुखरता से आवाज उठाई। अनुराग सिन्हा निर्देशित इस फिल्म का यह डायलॉग एक स्त्री को उसके स्वाभिमान के प्रति जागरुक करने का काम करता है।
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फिल्म 'लापता लेडीज'
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‘लापता लेडीज’ ने खुद से रूबरू होने की अहमियत बताई
साल 2023 में किरण राव निर्देशित फिल्म ‘लापता लेडीज’ महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाती है। साथ ही महिलाओं अपने लिए जीने की सीख भी देती है। फिल्म का यह एक डायलॉग महिला सशक्तिकरण की बात को बहुत ही सहज और सरल ढंग से कहता है।
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फिल्म 'मैरी कॉम'
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‘मैरी कॉम’ ने ताकत पर भरोसा करना सिखाया
ओमांग कुमार निर्देशित फिल्म ‘मैरी कॉम’ बॉक्सिंग चैंपियन मैरी कॉम की बायोपिक थी। फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम के संघर्ष और बॉक्सिंग चैंपियन बनने की कहानी को बहुत ही बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारा। फिल्म के कई डायलॉग फेमस हुए लेकिन यह डायलॉग हर महिलाओं को बताता है कि उनके अंदर एक चैंपियन है, जिसे कभी भूल नहीं चाहिए।
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फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश'
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‘इंग्लिश विंग्लिश’ ने खुद से प्यार करने की राह दिखाई
गौरी शिंदे निर्देशित और श्रीदेवी स्टारर फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश (2012)’ एक आम गृहिणी की कहानी थी। जिसकी कद्र उसके अपने परिवार वाले नहीं करते। फिल्म के अंत में वह अपनी अहमियत को जानती और समझती है। फिल्म सरल से इसी एक डायलॉग के जरिए पितृसत्ता पर चोट करती है।
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फिल्म 'मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी'
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‘मणिकर्णिका’ में दिखी स्त्री कुशलता की झलक
कंगना रनौत ने साल 2019 में फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ में रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाई। इस फिल्म में इसी डायलॉग ने बता दिया कि स्त्री जब सत्ता पर काबित होती है तो उसका उद्देश्य केवल सेवा भाव है। वह सत्ता से अधिक मानव कल्याण की कल्पना करती है।
‘अस्सी’ ने भीतर तक झकझोरने का काम किया
हालिया रिलीज तापसी पन्नू अभिनीत और अनुभव सिन्हा निर्देशित फिल्म ‘अस्सी’ भले ही बॉक्स ऑफिस पर ना चली हो लेकिन यह समाज को आईना दिखाती है। रेप जैसे जघन्य अपराध पर बात करती है। फिल्म के कई डायलॉग रूह को झकझोरते हैं, लेकिन यह एक डायलॉग बताता है कि स्त्री कभी विध्वंस नहीं चाहती है।