साहिबजादे इरफान अली खान ने अपने नाम से जब सरनेम खान हटाया तो मैंने उनसे पूछा था कि ऐसा क्यूं भला? तो वह अपनी झील सी गहरी आखों को छत की तरफ ले जाते हुए बोले थे, “मैं बोझ लेकर नहीं चलना चाहता।” इरफान को कोई इरफान खान कहकर इंटरव्यू में भी बुलाए तो उन्हें कोफ्त होती थी। वह जितने अपनी अम्मी के इरफान थे, बस उतने ही प्यारे इरफान पूरे हिंदुस्तान के रहना चाहते थे, न रत्ती भर ज्यादा, न रत्ती भर कम।