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'बाबुल की दुआएं' गाते हुए बच्चों की तरह रोने लगे थे मोहम्मद रफी, दो दिन बाद थी बेटी की विदाई

Sat, 15 May 2021 09:35 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मोहम्मद रफी
तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे, जब कभी सुनोगे गीत मेरे...ये गाना मशहूर गायक मोहम्मद रफी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। दिग्गज गायक रफी साहब को कोई कभी नहीं भूला सकता। उनके गीत आज भी लोगों के जेहन में बसे हुए हैं। 'शहंशाह-ए-तरन्नुम' के नाम से मशहूर रफी साहब ने एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए। लेकिन आज हम आपको मोहम्मद रफी के एक गाने के पीछे की छिपी कहानी बताने जा रहे हैं। इस गाने को गाते हुए रफी साबह फूट-फूटकर रोने लगे थे। वहां मौजूद लोग भी हैरान कि उन्हें अचानक क्या हो गया, क्योंकि इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ था। तो आज हम आपको ये किस्सा बताने जा रहे हैं कि वो कौन सा गाना था जिसे गाते हुए दिग्गज गायक मोहम्मद रफी रोने लगे थे और ऐसा क्यों हुआ था। इसके अलावा भी रफी साहब से जुड़ी कुछ खास बातें हम आपको बताने जा रहे हैं।
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मोहम्मद रफी
लोगों के दिलों में अपनी कमाल की आवाज के दम पर जगह बनाने वाले मोहम्मद रफी ने कई हिट गाने दिए। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कॉन्सर्ट में गाने की अनुमति दी थी। साल 1948 में रफी साहब ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।
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मोहम्मद रफी
अगर रफी साहब की निजी जिंदगी की बात की जाए तो उन्होंने दो शादियां की थी। उन्होंने अपनी पहली शादी सबसे छिपा कर रखी थी। इस शादी के बारे में सिर्फ घरवाले ही जानते थे। यह बात शायद कभी सामने सामने नहीं आती अगर मोहम्मद रफी की बहू यास्मीन खालिद की एक किताब मार्केट में न आती। यास्मीन की प्रकाशित किताब 'मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में रफी की पहली शादी की बात का जिक्र किया गया होता। 

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मोहम्मद रफी
इस किताब में यास्मीन ने लिखा है कि महज 13 साल की उम्र में मोहम्मह रफी ने पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से की थी। इस शादी से उनका बेटा सईद हुआ। लेकिन कुछ वक्त बाद दोनों अलग हो गए। इसके बास उन्होंने 20 साल की उम्र में दूसरी शादी बिलकिस के साथ की। रफी के घर में उनकी पहली पत्नी का जिक्र नहीं होता था क्योंकि उनकी दूसरी पत्नी बिलकिस बेगम उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। रफी की दूसरी शादी से उनके तीन बेटे खालिद, हामिद, शाहिद और तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद, यास्मीन अहमद हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है।
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बाबुल गाने का दृश्य और मोहम्मद रफी
फिल्म 'नीलकमल' के सुपरहिट गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ को गाते समय रफी रो दिए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि गाने की रिकॉर्डिंग के ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने अपनी बेटी की सगाई की थी और दो दिन बाद उसकी शादी थी। बाद में इस गीत को नेशनल अवॉर्ड मिला था। अगर आपने इस गाने को ध्यान से सुना होगा तो आखिर में रफी साहब की आवाज में फर्क मालूम पड़ेगा और वो इसी वजह से हुआ था क्योंकि वो रोने लगे थे।


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मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर
मोहम्मद रफी ने ज्यादातर गाने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए। उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गाने गाए थे, जिसमें 186 गाने सोलो शामिल हैं। मोहम्मद रफी ने न केवल गायिकी बल्कि एक्टिंग में भी हाथ आजमाया था। रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में बतौर एक्टर काम किया था। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई थी।
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मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा
सुरों के सरताज मोहम्मद रफी की अंतिम विदाई भी बेहद शानदार हुई थी, जिसे आज भी याद किया जाता है। 31 जुलाई, 1980 को मोहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि इसमें उस वक्त करीब 10 हजार लोग शरीक हुए थे। कहा जाता है कि उनके निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया था।
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