फिल्म- महल
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1948-49 का जमाना था, तब रिकॉर्डिंग स्टूडियो नहीं होते थे, न ही अलग से कोई व्यवस्था। अक्सर गाने को कैद करने के लिए खाली स्टूडियो, पेड़ों के पीछे की जगह या फिर ट्रक के अंदर व्यवस्था की जाती थी। इस गाने से जुड़े अनुभव के बारे में लता बताती हैं, 'फिल्म लाहौर की शूटिंग चल रही थी, बॉम्बे टॉकीज में जद्दनबाई और नरगिस दोनों मौजूद थीं। मैंने वहीं अपना गाना रिकॉर्ड करना शुरू किया। जद्दनबाई ध्यान से सुनती रहीं। बाद में मुझे बुलाकर कहा- 'इधर आओ बेटा, क्या नाम है तुम्हारा। जी लता मंगेशकर।'