पंकज उधास का कोई भी कंसर्ट हो लेकिन जब तक वो 'चिट्ठी आई है...' ना गाएं तब तक शाम पूरी नहीं होती । पंकज उधास की ये गजल बॉलीवुड में एंथम के तौर पर जानी जाती है । यही वो गजल है जिसने पंकज को रातों-रात स्टार बना दिया था । इस गजल को गाने और हिट होने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है ।
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पंकज उधास
पंकज उधास विदेश में रहकर गजल गाया करते थे । वहां वो काफी पॉपुलर थे । पंकज उधास को 70 के दशक में डायरेक्टर ऊषा खन्ना ने अपनी फिल्म 'कामना' में गाने का ब्रेक दिया था । लेकिन किसी वजह से यह फिल्म बन नहीं पाई और पंकज का बॉलीवुड में सिंगर बनने का सपना अधूरा रह गया था ।
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पंकज उधास
एक इंटरव्यू में पंकज ने बताया था, 'मैंने बॉलीवुड में सिंगर बनने के लिए 4 साल तक स्ट्रगल किया । उस समय नौशाद, एसडी बर्मन और मदन मोहन जैसे बड़े म्यूजिक डायरेक्टर इंडस्ट्री में मौजूद थे । मेरे जैसे नए सिंगर के लिए वो समय बहुत कठिन था ।'
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पंकज उधास
'जब काफी समय तक कुछ ठीक-ठाक काम नहीं मिला तो मैं बहुत निराश हो गया और विदेश वापस जाने का फैसला कर लिया ।' पंकज आगे बताते हैं, 'उस समय एक्टर और प्रोड्यूसर राजेंद्र कुमार ने विदेश में मेरी पॉपुलैरिटी के बारे में सुन रखा था ।'
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पंकज उधास
'वो मेरी गजलों से काफी इंप्रेस थे । वो चाहते थे कि उनकी किसी फिल्म के लिए मैं गाऊं । उन्होंने अपने असिस्टेंट से मुझे कॉल करने को कहा । असिस्टेंट ने मुझे बताया कि राजेंद्र कुमार अपनी फिल्म में मेरा स्पेशल अपीयरेंस चाहते हैं ।'
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पंकज उधास
'फिल्म में कैमियो का आइडिया मुझे कुछ खास पसंद नहीं आया और मैंने उन्हें इग्नोर कर दिया । कुछ दिन बाद राजेंद्र ने मेरे बड़े भाई मनहर से मेरी शिकायत कर दी । उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें इग्नोर किया है । फिर भाई साहब ने ये बात बताई तो मुझे बहुत बुरा लगा ।'
'मैंने तुरंत राजेंद्र कुमार को कॉल किया और उनके साथ मीटिंग की । गाना रिकॉर्ड हुआ और 'नाम' फिल्म में कैमियो भी दिया । ये गजल सुपर-डुपर हिट हो गई और पंकज रातों-रात स्टार बन गए ।' आज उन्हें गजल किंग के नाम से भी जाना जाता है ।