मृत्युदंड
- फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
माधुरी दीक्षित ने मृत्युदंड उस दौर में की जिस दौर में हिंदी सिनेमा मसाला फिल्मों के अतिरेक के अजब ही दौर में था। साल 1997 वैसे तो हिंदी सिनेमा में दिल तो पागल है, बॉर्डर, इश्क, परदे, गुप्त, जिद्दी, हीरो नंबर वन, कोयला, जुदाई और दीवाना मस्ताना जैसी हिट फिल्मों के लिए ही याद किया जाता है। लेकिन, इसी साल रिलीज हुई फिल्म मृत्युदंड का जब जब जिक्र होगा, लोगों को याद आएंगे इस फिल्म के कलाकार और इसके मेकर्स। माधुरी पिछली बार मुझे फिल्म टोटल धमाल की रिलीज से पहले मिलीं तो बातों बातों में इस फिल्म का जिक्र निकल आया। माधुरी कहती हैं, “मेरे तो करियर की शुरुआत ही एक ऑफबीट फिल्म से हुई। मैंने इसीलिए अपने करियर में हर तरह की फिल्में की हैं। लोग कहते थे कि ये फिल्म मत करो, वो फिल्म मत करो लेकिन फिल्मों के चयन के मामले में मैं अपने दिल की सुनती हूं। फिल्म मृत्युंदड भी मेरे दिल के बेहद करीब की फिल्म है।”
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