विष्णु पुराण
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शुक्राचार्य तड़प उठते हैं हालांकि, वह अपनी तपस्या भंग नहीं करते। जयंती अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। इस अधर्म से नाराज भगवान शिव अपने भक्त शुक्राचार्य को तड़पता हुआ नहीं देख पाते और उन्हें संजीवनी मंत्र दे देते हैं। अपराधबोध से त्रस्त जयंती, शुक्राचार्य से शादी करने का प्रस्ताव रखती हैं। शुक्राचार्य उनके शादी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं।