बॉलीवुड स्टार विनोद खन्ना अब हमारे बीच नहीं रहे। विनोद की जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। उनकी जिंदगी किस्सों से भरी पड़ी है।
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जब विनोद खन्ना के पिता ने उन पर तान दी थी बंदूक
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विनोद खन्ना
पाकिस्तान में जन्म
विनोद खन्ना का जन्म पाकिस्तान के पेशावर में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक टेक्सटाइल व्यापारी थे।बचपन में विनोद खन्ना काफी शर्मीले स्वभाव के थे। बचपन में स्कूल के दौरान एक टीचर ने उन्हें एक नाटक में जबरदस्ती उतार दिया था। उस समय उन्हें विनोद खन्ना की एक्टिंग काफी पसंद आई।
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विनोद खन्ना, नरेंद्र मोदी
बनना चाहते थे इंजीनियर
विनोद खन्ना एक इंजीनियर बनना चाहते थे। उनके पिता उन्हें बिजनेसमैन बनाना चाहते थे। जबकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। विनोद अभिनेता बने, फिर सन्यासी बने, फिर अभिनेता बने और अब नेता हैं।
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विनोद खन्ना
कॉलेज की दोस्त से की शादी
कॉलेज के दिनों में विनोद खन्ना काफी हैंडसम दिखते थे। कॉलेज के दिनों से उनका रुझान फिल्मों की ओर हो गया था। वे थियेटर करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात गीतांजली से हुई, जिससे आगे चलकर उन्होंने शादी की।
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विनोद खन्ना
पहली फिल्म में बने विलेन
किस्मत से विनोद खन्ना की मुलाकात एक पार्टी में निर्माता और निर्देशक सुनील दत्त से हुई। सुनील दत्त उन दिनों फिल्म ‘मन का मीत’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। सुनील दत्त ने उन्हें विलेन का रोल ऑफर किया। जिसे विनोद खन्ना ने स्वीकार कर लिया।
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B'day Spl: जब विनोद खन्ना के पिता ने उन पर तान दी थी बंदूक
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विनोद खन्ना
पिता ने तान ली थी बंदूक
विनोद खन्ना के पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी बिजनेस ही करे। इसीलिए जब उन्होंने फिल्म के ऑफर के बारे में बताया तो उनके पिता ने उन पर बंदूक तानकर कहा कि ‘‘अगर तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा।’’ बाद में विनोद खन्ना की माँ के समझाने के बाद उन्हें दो साल तक फिल्मों में काम करने की इजाजत दी।
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विनोद खन्ना
पहली फिल्म में ही हुए हिट
उनकी पहली फिल्म ‘मन का मीत’ 1968 में रिलीज़ हुई थी। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। उनकी एक्टिंग को काफी सराहा गया। इसके बाद वे कई फिल्मो में बतौर विलेन ही काम करने लगे।
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विनोद खन्ना
विलेन से हीरो बने
विनोद खन्ना ने अपने करियर के शुरूआती दिनों में विलेन के रोल निभाए लेकिन लेकिन वे दिखने में काफी हैंडसम थे। इसके बाद उन्हें गुलजार ने हीरो का रोल ऑफर किया। इसके बाद उनका करियर हीरो के रूप में चल पड़ा। वे एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में देने लगे।
जब विनोद खन्ना के पिता ने उन पर तान दी थी बंदूक
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विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन
अमिताभ को दी टक्कर
उन दिनों अमिताभ भी लोगों के दिलनों में जगह बना रहे थे। वहीं दूसरी ओर विनोद खन्ना भी बॉलीवुड में छा रहे थे। इन दोनों को एक दूसरे का प्रतिद्वंदी कहा जाता था। लेकिन प्रतिस्पर्धा के बावजूद विनोद खन्ना ने अमिताभ के साथ फिल्में करके अपने अभिनय को साबित किया। उन्होंने अमिताभ के साथ ‘अमर अकबर एंथॉनी’, ’परवरिश’ जैसी फिल्में कीं जिनमें वे अमिताभ को टक्कर देते नज़र आए।
जब विनोद खन्ना के पिता ने उन पर तान दी थी बंदूक
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विनोद खन्ना
जब सफलता के शिखर से लिया संन्यास
विनोद खन्ना की गिनती सफल एक्टर्स में होने लगी थी। इसी बीच उनकी मां का निधन हो गया। वो बहुत डिस्टर्ब हो गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात आचार्य रजनीश (ओशो) से हुई। वे उनसे इतने प्रभावित हुए कि अचानक से फिल्मी करियर से संन्यास ले लिया।
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विनोद खन्ना
पत्नी से तलाक लेकर बने स्वामी विनोद भारती
संन्यास के वक्त विनोद शादीशुदा थे। उनके दो बेटे अक्षय व राहुल थे। संन्यास के फैसले के बाद उन्होंने पत्नी गीतांजली से तलाक ले लिया और अमेरिका जाकर ओशो के आश्रम में रहने लगे। वे आश्रम में बगीचे के माली बन गए। ओशो ने उन्हें स्वामी विनोद भारती नाम दिया था।
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विनोद खन्ना
संन्यास त्याग की दूसरी शादी
कुछ दिन बाद विनोद का संन्यास से मोहभंग हो गया और उन्होंने भारत वापसी की। विनोद ने फिर से फिल्मों में काम शुरू कर दिया। इसके बाद 1990 में उन्होंने कविता से शादी कर ली। अभी उनकी दो बच्चे हैं, बेटा साक्षी खन्ना और बेटी श्रद्धा है।
आजकल राजनीति में हैं
वर्ष 1997 और 1999 में वे दो बार पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र से भाजपा की ओर से सांसद चुने गए। 2002 में वे संस्कृति और पर्यटन के केन्द्रीय मंत्री भी रहे। सिर्फ 6 माह पश्चात् ही उनको अति महत्वपूर्ण विदेश मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बना दिया गया। अभी विनोद खन्ना पंजाब के गुरदासपुर से बीजेपी सांसद थे।