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Vinod Pande Long Interview 03: रेखा की जुबानी अमिताभ से मोहब्बत की कहानी, ऐसे बना ‘एक नया रिश्ता’

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विनोद पांडे, रेखा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सुरेश ओबेरॉय को अपनी फिल्म ‘एक बार फिर’ से स्टार बना देने वाले निर्देशक विनोद पांडे से लंबी बातचीत चल रही है। इस इंटरव्यू की दो कड़ियां आप पहले ही पढ़ चुके हैं, अब इस अंतिम कड़ी में विनोद बता रहे हैं अपनी खास दोस्त रेखा के बारे में। विनोद पांडे की आवाज की खनक अब भी वैसी ही है जैसी अस्सी के दशक में होती थी। वह इन दिनों मुंबई में एकाकी जीवन व्यतीत करते हैं और अपना खाली समय कहानियों और उपन्यासों को लिखने में बिताते हैं। और, रेखा का जिक्र आते ही बच्चों सा चहक जाते हैं। विनोद पांडे के इंटरव्यू की अब तक की दोनों कड़ियां आप यहां नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

Vinod Pande Long Interview 02: “शशि कपूर ने इसलिए शबाना आजमी के साथ काम करने से कर दिया था इनकार”
 
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एक नया रिश्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
विनोद जी, आपकी फिल्मों की तरह इनकी मेकिंग के किस्से भी बड़े दिलचस्प हैं। रेखा के साथ आपका दोस्ताना कैसे पनपा?
‘एक नया रिश्ता’ की कमाल की कहानी है। वो कहानी भी अलग ही है। मेरा ये एक अलहदा विषय था। क्या हुआ था कि मैंने एक बार हवाई यात्रा के दौरान एक फिल्म देखी थी। वहीं से मेरे दिमाग में एक विचार चलता रहता था कि कोई शख्स अगर बिना शादी किए ही बाप बनना चाहे तो उसके साथ भारत जैसे देश में क्या कुछ हो सकता है। ‘एक नया रिश्ता’ में हीरो को अपने पिता की वसीयत के हिसाब से 18 महीने में पिता बनना है तभी उसे सारी संपत्ति मिलेगी। लेकिन, उसे शादी में यकीन नहीं है। एक कॉलगर्ल बिना उसकी पत्नी बने उसके बच्चे की मां बनने को तैयार हो जाती है। ये एक छोटे बजट की फिल्म थी। हीरोइन के नाम पर जब भी चर्चा शुरू होती तो सबसे पहले रेखा का ही नाम आता।
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एक नया रिश्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
रेखा से पहली मुलाकात कैसी रही?
मेरा एक असिस्टेंट था हसन कुट्टी। बाद में वह मीरा नायर का भी असिस्टेंट बना। बहुत मेहनती लड़का था। सिर्फ काम से काम रखता था। उसने ही हमारी मीटिंग फिक्स की। जुहू के किसी बंगले में शूटिंग चल रही थी उनकी। हम लोग काफी देर इंतजार करते रहे। उसके बाद लंच ब्रेक हो गया। मेरी आदत नहीं रही है ज्यादा किसी का इंतजार करने की। फिर भले वह रेखा ही क्यों न हों। मैं चल दिया वहां से, तो एकदम से वहां शोरगुल शुरू हो गया। मैंने देखा कि रेखा खुद पीछे पीछे आ रही हैं। वह आईं और उन्होंने इस देरी के लिए बहुत ही खूबसूरती के साथ माफी मांगी। मेरे मुंह से निकला, 'एक खूबसूरत लड़की के लिए सब ठीक है।' बस वहीं से हम दोनों की ट्यूनिंग बैठने लगी।

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विनोद पांडे - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
रेखा के साथ आपकी फिल्म ‘एक नया रिश्ता’ 1988 में रिलीज हुई, ये वही साल है जिसमें रेखा ने बड़े पर्दे पर शानदार कमबैक किया, फिल्म ‘खून भरी मांग’ और ‘बीवी हो तो ऐसी’ में। फिल्म की मेकिंग की क्या यादें हैं आपकी?
रेखा ने अमिताभ बच्चन से काफी कुछ सीखा है। वह अपनी फिल्म के हर डिपार्टमेंट की खबर रखती थीं। मेरे साथ तो वह फिल्म की लोकेशन तक देखने गईं अलीबाग। मेरे एक परिचित का एक कॉटेज था वहां, जहां जाकर मैं स्क्रिप्ट लिखा करता था। एक ही कार में गए, लौटते हुए भी अपनी ही कार से आए थे। उनके पास अमिताभ बच्चन को लेकर तमाम किस्से थे। वह सुनाती जा रही थीं। और, मैं बस उन्हें देखता जा रहा था, सुनता जा रहा था।
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एक नया रिश्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
और, आप रेखा को तब लाल गुलाब भी खूब भेजा करते थे?
हां, मैं सेट्स पर उनसे छेड़खानी भी करता था। रेखा को मैं रोजाना एक गुलाब भेजता था। एक दिन गुलाब नहीं आया तो मैंने एक कागज पर लाल रंग से एक दिल बनाया और उसमें तीर चुभो दिया। लिख दिया कि आज गुलाब नहीं है, आज असली चीज ले लो। मेरा दिल ले लो। क्या है कि अगर आप सिर्फ फ्लर्ट करते हो तो सामने वाले को भी मजा आता है। वह भी खुलकर मुझसे बातें करती थीं। उन दिनों मेरी एक और फिल्म बनने वाली थी, रति के साथ। तो उसने खिंचाई शुरू कर दी कि पंडितों को मैं जानती हूं अच्छे से। उसने रति को लेकर मेरी उस दिन खूब खिंचाई की। हालांकि, उसमें सच कुछ भी नहीं था।
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एक नया रिश्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ये वो दौर था जब अमिताभ और रेखा दोनों दुनिया के लिए अलग अलग हो चुके थे। आपके साथ क्या क्या साझा किया उन्होंने अपने इस रिश्ते का?
बहुत कुछ बताया। उन्होंने खुद इस बारे में बहुत कुछ लिखा है और कहा है। एक अंग्रेजी अखबार में तो इसका पूरा किस्सा भी छपा था। अमिताभ के बारे उन्होंने मुझसे ढेरों बातें की हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना इसलिए उचित नहीं होगा कि वह भरोसे में की गई बातें हैं। लेकिन मैं इन कहानियों को सुनकर बोर होता था। उन्हें मुझ पर एक अलग तरह का भरोसा हो गया था उन दिनों। मैं उनके साथ फ्लर्ट कर लिया करता था। फिर मैंने एक दिन ऐसे ही छेड़ दिया कि रेखा तुम सिर्फ ऐसे ही बातें करती हो, या फिर वाकई तुम्हें प्यार था। तो उन्होंने मुझे एक किस्सा बताया कि कैसे वह मुंबई से महाबलेश्वर चली गईं खुद गाड़ी चलाकर वह भी बहुत ही तेज बारिश में। इस दौरान उनकी गाड़ी फिसलकर खेतों में चली गई। पर इसके बावजूद वह महाबलेश्वर पहुंचीं। रात भर वहां रुकीं और सुबह फिर अपनी शूटिंग पर वापस। उन्हें मेलोड्रामा बहुत पसंद था। बिंदास भी थीं। रेखा को मैंने ऑटो लेकर जाते हुए देखा है। 
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एक नया रिश्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आपकी फिल्म में तो रेखा ने गाना भी गाया, एहसास का सौदा है...?
हां, सही कह रहे हैं आप। वह काम को बहुत गंभीरता से लेती थीं। दो बातें तो होती हैं। एक किरदार ठीक मिल जाए और दूसरा बंदा ठीक मिल जाए। बंदे में कोई और एंगल नहीं होना चाहिए। मैं ये समझता हूं। छेड़खानी चलती रहती है। लेकिन, अगर उन्हें लगे कि आप में बेईमानी है। फिर वह आपकी खाल उधेड़ देंगी। हमसे उनका रिश्ता ही अलग सा बन गया था। उन्हें मालूम था कि ये बंदा मुझमें अच्छे से घुल गया है। मेरी खिंचाई तो करता है लेकिन मेरी बेइज्जती नहीं करता। वह अक्सर कहतीं, तुम फालतू में मेरी फिक्र बहुत करते हो। फिल्म में म्यूजिक खय्याम साहब का है और वह हर गाने की सिटिंग पर खुद मौजूद रहतीं। जिस गाने का जिक्र आपने किया, वह गाना रेखा ने बहुत ही खूबसूरती के साथ गाया है।
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विनोद पांडे, वसंत साठे, दीप्ति नवल - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
और, शूटिंग के दौरान कैसा व्यवहार रहा उनका, सुना एक दिन शूटिंग पर ही नहीं आई थीं वह?
हां, मुझे बड़ा गर्व था कि मैं रेखा को डायरेक्ट कर रहा हूं और वह मुझे बिल्कुल परेशान नहीं कर रही हैं। फिर एक दिन साढ़े दस बज गए। सब मेरी हंसी उड़ाने लगे कि विनोद जी बड़ा उड़ रहे थे। अब पता चला कि रेखा क्या है। इतने में उनकी कार आती हुई दिखी। फिएट कार थी उनकी। वह आकर रुकीं। उसका सारा काम राम देखता था। आकर वह मुझसे बोला, 'सर, रेखा जी आज नहीं आ पाएंगी। उनकी तबियत थोड़ी खराब है। उन्होंने ये कहने के लिए ही मुझे भेजा है। और उन्होंने कहा है कि वह कल आएंगी जल्दी और दोनों दिन का काम पूरा करके जाएंगी।' रेखा शाम के छह बजे के बाद काम न करने के लिए मशहूर रही हैं। लेकिन अगले दिन रेखा ने रात साढ़े दस बजे तक काम किया। अपना काम पूरा किया। उन दिनों फोन नहीं थे। वह चाहती तो पहले दिन बिना किसी सूचना के भी न आती तो क्या हो जाता। लेकिन उन्होंने अपना आदमी भेजा। अगले दिन काम पूरा किया, वह थीं रेखा। एक दिन सब जल्दी के मूड में थे। फिल्मिस्तान स्टूडियो में शूटिंग थी, कॉल टाइम सुबह नौ बजे का फिक्स हो गया। मैडम, सुबह साढ़े आठ बजे ही पहुंच गईं।

(समाप्त)

विनोद पांडे निर्देशित फिल्म ‘एक नया रिश्ता’ आप यूट्यूब पर नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

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