बार-बार देखो, हजार बार देखो, के देखने की चीज है हमारा दिलरुबा... (फ़िल्म- चाईना टाउन) जी हां, ये बेमिसाल हुस्न, लाजवाब अदाओं वाली, ये दिलरुबा थी: परियों की रानी अभिनेत्री शकीला। लाखों सिनेप्रेमी शकीला के हुस्न-ओ-जमाल के दीवाने थे। प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला ने अपने 15 वर्ष के लंबे फिल्मी करियर के दौरान लगभग 70 फिल्मों में अपने लाजवाब अभिनय से दर्शकों का दिल जीता था। लेकिन अफसोस है कि यह सौंदर्य की देवी 20 सितंबर 2017 को इस दुनिया को अलविदा कह गई। शकीला का जन्म 1 जनवरी, 1935 को हुआ था और उनका वास्तविक नाम बादशाह जहां था।
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शाही खानदान से रिश्ता
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Shakeela
शकीला के पूर्वज अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के शाही खानदान से संबंध रखते थे. राजगद्दी के खानदानी झगड़ों में उसके दादा-दादी और मां मारे गए थे. चार वर्ष की नन्हीं सी शकीला को लेकर उसके पिता और बुआ जान बचाकर मुम्बई भाग आए थे.
शकीला की प्रारम्भिक पढ़ाई-लिखाई घर पर ही हुई थी. छोटी सी आयु में शकीला के सिर से पिता का साया उठ गया था इसलिए उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम ने उन तीनों बहनों का पालन-पोषण किया था.
फिल्मों में प्रवेश के बारे में शकीला बताती थीं कि उनकी बुआ को फिल्में देखने का बहुत शौक़ था और वह मुझे साथ लेकर फ़िल्म देखने जाती थीं. ऐसे में मेरा रुझान भी फ़िल्मों की ओर हो गया था.
अब्दुल राशिद कारदार और महबूब खान जैसे दिग्गज फ़िल्म निर्माताओं के साथ उनके पारिवारिक संबंध थे. कारदार साहिब ने शकीला की फिल्मों में रूचि को देखते हुए अपनी फ़िल्म 'दास्तान' में एक 13-14 साल की नवयुवती का रोल करने का प्रस्ताव दिया
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1950 में अभिनय करियर की शुरुआत
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Shakeela
शकीला ने 1950 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'दास्तान' से अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसी फिल्म में उनका असली नाम बादशाह जहां बदल कर फिल्मी नाम शकीला रख दिया गया। जबकि उनकी फिल्म दुनिया 1949 में दास्तान से पहले ही रिलीज हो गई थी। इस फिल्म में उन्होंने उस जमाने की मशहूर अदाकारा सुरैया के साथ काम किया था। दास्तान के बाद शकीला ने गुमास्ता, खूबसूरत, राजरानी दमयंती, सलोनी, सिंदबाद द सेलर, आगोश और अरमान में बतौर बाल कलाकार अभिनय किया था। फिल्म झांसी की रानी में शकीला ने अभिनेत्री मेहताब के बचपन की भूमिका निभाई थी।
मीरा कुमारी का रोल लिया
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Shakeela
वर्ष 1953 में शकीला को फिल्म 'मदमस्त' में नायक एन.ए. अंसारी के साथ मुख्य नायिका की भूमिका करने का सर्वप्रथम अकसर मिला था। इसी वर्ष उनकी बतौर नायिका दो और फिल्में राजमहल और शहंशाह भी प्रदर्शित हुई थीं। शकीला का चेहरा मध्यपूर्व एशिया की हूरों जैसा था इसलिए फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों ने उन्हें 'अरबी चेहरा' का खिताब दे दिया था। मीना कुमारी के अत्यंत व्यस्त होने के कारण होमी वाडिया ने अपनी फैंटेसी फिल्म अलीबाबा और चालिस चोर (1954) के लिए शकीला को मेहनताने के तौर पर एक मोटी रकम 10 हजार रूपए देकर साइन कर लिया था।
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कई फिल्मों में किया शानदार अभिनय
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Shakeela
इस फिल्म के हीरो महिपाल थे और यह फिल्म इतनी बड़ी सफल रही कि शकीला को फैंटेसी और कॉस्ट्यूम फिल्मों के ढेरों ऑफर आने लगे। शकीला ने गुलबहार, लालपरी, लैला, नूरमहल, रत्नमंजरी, शाही चोर, हातिमताई, खुल जा सिमसिम, अलादीन लैला, माया नगरी, नागपद्मिनी, परिस्तान, सिमसिम मरजीना, डॉक्टर जेड, अब्दुल्ला और बगदाद की रातें जैसी कई फिल्मों में महिपाल, जयराज, दलजीत और अजीत जैसे नायकों के साथ काम किया था।
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स्टंट फिल्मों की हिरोइन की इमेज
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Shakeela
महिपाल के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। शकीला ने बतौर नायिका उस दौर के मशहूर अभिनेता देव आनंद के साथ फिल्म सीआईडी, गुरुदत्त के साथ आर-पार, सुनील दत्त के साथ पोस्टबॉक्स 999, मनोज कुमार के साथ रेशमी रुमाल, काली टोपी लाल रुमाल में चंद्रशेखर और अजीत के साथ टावर हाउस में काम किया था। राज कपूर के साथ वे फिल्म श्रीमान सत्यवादी में बड़े पर्दे पर नजर आई थीं जबकि फिल्म चाइना टाउन में उन्होंने शम्मी कपूर के साथ अभिनय किया था। इन दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम करने के बावजूद भी शकीला की इमेज स्टंट फिल्मों की हीरोइन के तौर पर अधिक बनी। गुरुदत्त की फिल्म आर-पार में शकीला ने एक गैंगस्टर की प्रेमिका की सशक्त भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के दो सदाबहार गीत बाबू जी धीरे चलना, प्यार में जरा संभलना… और हूं अभी मैं जवां… उन पर फिल्माए गए थे। शकीला ने अपने मदहोश डांस और भावों से दर्शकों पर जादू कर दिया था। शकीला का जादू एक बार फिर फिल्म सीआईडी के गीत आंखों ही आंखों में इशारा हो गया… से चला था।
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लेके पहला-पहला प्यार, भर के आंखों में ख़ुमार
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Shakeela
इस फिल्म के एक अन्य क्लासिक गाने लेके पहला-पहला प्यार, भर के आंखों में ख़ुमार… को भी भुलाया नहीं जा सकता। फिल्म में सीआईडी उन्होंने एक अमीर घराने की लड़की का किरदार निभाया था जो देव आनंद के प्यार में पड़ जाती है। सीआईडी की सफलता के बाद शकीला ने बुलंदियों पर कदम रख लिया था। सब अभिनेत्रियों को पछाड़ती हुई शकीला ने अपना मुकाम खुद बनाया। खूबसूरती और अदाकारी उनके पास दोनों चीजें थीं जिसके जरिये उन्हें दर्जनों फिल्में मिलीं। उन्हें असली पहचान 1954 में प्रदर्शित हुई गुरुदत्त की सुपरहिट फिल्म आर-पार से मिली। ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा के दौरान उनका रुतबा किसी सुपरस्टार से कम नहीं था। उनकी पहचान फैंटेसी फिल्मों की नायिका की ही बनी रही। शकीला आख़िरी बार बड़े पर्दे पर फ़िल्म उस्तादों के उस्ताद (1963) में नज़र आई थीं।
शादी के बाद छोड़ी फिल्मी दुनिया
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Jony Walker Son
शकीला ने बाद के कुछ वर्षों में हम इंतजार करेंगे (1989) और राजद्रोही (1993) फिल्मों में छोटी भूमिकाएं भी की थीं। शकीला ने 14 साल के अपने करियर में कुल 72 फिल्मों में अभिनय किया है। 1966 में शकीला की शादी भारत में अफगानिस्तान के 'महावाणिज्य दूत' से हुआ था। शादी के बाद शकीला ने फिल्मों से संन्यास ले लिया और वह अपने शौहर के साथ जर्मनी चली गईं। लगभग दो दशक तक वह जर्मनी और अमेरिका में रहीं। फिर उनके शादीशुदा संबंधों में दरार आ गई और एक रोज वे हमेशा के लिए भारत वापस लौट आईं।
फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर से शादी करने के बाद ब्रिटेन चली गई
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Shakeela
कुछ खबरें ऐसी भी रही हैं कि शकीला 1963 में एक विदेशी फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर से शादी करने के बाद ब्रिटेन चली गई थीं। शकीला की शादी अधिक दिनों तक टिक नहीं पाई और वे कुछ सालों के बाद वापस मुंबई लौट आईं। इस बारे में सही जानकारी लेने के लिए मैंने उनके भांजे नासिर खान से बात की तो उन्होंने इस बारे में अपनी अनभिजता जाहिर की और कहा कि उनकी मां नूर भी कुछ बताने में असमर्थ हैं। शकीला मरीन ड्राइव स्थित फेमस आर्ट डेको बिल्डिंग गोविंद महल में रहती थीं, लेकिन 1991 में उनकी बेटी मीनाज ने आत्महत्या कर ली तो वे बांद्रा शिफ्ट हो गईं थीं। उनकी बड़ी बहन नूर ने मशहूर कॉमेडियन जॉनी वॉकर से शादी की थी। शकीला की छोटी बहन गजाला (नसरीन) एक साधारण गृहणी थीं।
शकीला जी को फिल्मों से अलग हुए काफी अर्सा गुजर गया लेकिन उन्होंने कभी फिल्मों में दोबारा काम करने की इच्छा नहीं की। श्यामा, वहीदा रहमान, नंदा और जबीन जलील के साथ शकीला की दोस्ती की चर्चा बॉलीवुड में हुआ करती थी। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में वे सायरा बानो और आशा पारेख के संपर्क में रही थीं। शकीला की दोस्त और प्रसिद्ध अभिनेत्री जबीन जलील ने बताया कि, "शकीला बहुत ही खुशमिजाज औरत थीं और हम सब सहेलियों का आपस में मिलना जुलना बरसों से जारी था। खूब हसीं मजाक होता था। उनके चले जाने पर बेहद गमगीन हूं। अल्लाह उनको जन्नत बख्शे!!!"