बिस्मिल्लाह खां
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1947 में जब देश की आजादी की पूर्व संध्या पर लालकिले पर देश का झंडा फहराया जा रहा था तब बिस्मिल्लाह खां की शहनाई भी वहां आजादी का संदेश दे रही थी। उसके बाद से लगभग हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषण के बाद बिस्मिल्ला खां का शहनाई वादन करना एक प्रथा सी बन गया था। खां ने ईरान, जापान, अमेरिका, इराक, कनाडा अफगानिस्तान और रूस जैसे कई मुल्कों में अपनी शहनाई का जादू बिखेरा है।