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उर्मिला समेत इन 6 सितारों को रास नहीं आई राजनीति, अमिताभ ने तो कहा था जिंदगी की बड़ी गलती

Wed, 11 Sep 2019 01:11 PM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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amitabh, urmila, dharmendra - फोटो : social media
फिल्मों से राजनीति में कदम रखने वालीं उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उर्मिला ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुंबई कांग्रेस बड़े लक्ष्यों पर ध्यान देने की जगह उनका इस्तेमाल कर रही है। ग्लैमर की दुनिया से राजनीति में कई सितारे आए जिनमें से कुछ के हाथ सफलता लगी तो कुछ ने राजनीति से किनारा करना ही बेहतर समझा। आगे की स्लाइड में देखिए ऐसे कौन-कौन से सितारे रहे जो राजनीति में टिक नहीं सके।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
1984 में अमिताभ बच्चन का इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा से चुनाव लड़ना उस समय की सबसे बड़ी खबर थी। राजनीति ने ऐसी करवट ली कि बोफोर्स घोटाले में नाम आने के बाद अमिताभ का राजनीति से मोह भंग हो गया और उन्होंने राजनीति छोड़ दी। कभी गांधी परिवार के साथ करीबी संबंध रहे अमिताभ बच्चन की दूरियां भी बढ़ गईं। बाद में अमिताभ बच्चन ने कहा था कि राजनीति में जाना उनकी एक भूल थी और वो दोबारा कभी राजनीति में नहीं लौटेंगे।
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Rajesh Khanna - फोटो : file photo
1991 के चुनाव के समय अमिताभ फिल्मों और राजनीति दोनों से दूर हो चुके थे। उस समय राजीव गांधी ने राजेश खन्ना से नई दिल्ली में लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लड़ने के लिए आग्रह किया। 1991 के चुनाव में राजेश खन्ना आडवाणी से बहुत ही कम अंतर से हारे थे। जब 1992 में उपचुनाव हुआ तो राजेश खन्ना फिर नई दिल्ली से लड़े। राजेश खन्ना ने जल्दी ही राजनीति छोड़ दी और उनकी यह पारी फ्लॉप रही।

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arun jaitley, dharmendra - फोटो : social media
धर्मेंद्र साल 2004 से 2009 तक बीकानेर से भाजपा से सांसद थे। इस दौरान वहां के नाराज लोगों ने 'हमारा सांसद गुमशुदा है' के पोस्टर लगाए। एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने कहा कि 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राजनीति में जाऊंगा। तभी कुछ लोगों ने सलाह दी कि मुझे राजनीति में जाना चाहिए। बाद में मुझे लगा कि यहां मोटी चमड़ी होना जरूरी है। 5 साल मेरे लिए बहुत मुश्किल भरा था। मैंने 5 साल में बीकानेर के लिए काफी कुछ किया लेकिन उसका श्रेय कभी मुझे नहीं मिला।' इसके बाद धर्मेंद्र ने राजनीति से किनारा कर लिया। 
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govinda - फोटो : social media
गोविंदा की राजनीतिक पारी भी फ्लॉप साबित हुई। साल 2004 में गोविंदा कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव लड़े। उन्होंने बीजेपी के बड़े नेता राम नाईक को 50 हजार वोटों से हराया था। साल 2008 में गोविंदा ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वो कभी राजनीति में नहीं लौटेंगे।
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sanjay dutt - फोटो : social media
साल 2009 में लोकसभा चुनाव में संजय दत्त लखनऊ से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। बाद में पार्टी ने उन्हें जनरल सेक्रेटरी बना दिया लेकिन जल्द ही संजय दत्त ने राजनीति को अलविदा कह दिया और फिल्मों की ओर लौट गए। 
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