बॉलीवुड के इतिहास में अगर किसी डायरेक्टर को याद किया जाएगा तो उसमें के. आसिफ का नाम सबसे पहले होगा। के. आसिफ ऐसे निर्देशक रहे जो सिर्फ अपनी एक फिल्म के लिए जाने जाते हैं लेकिन उस एक फिल्म ने जो कुछ हासिल किया वो न उस दौर में संभव था न ही इस दौर में संभव है। हमेशा चुटकी से सिगरेट या सिगार की राख झाड़ने वाले के. आसिफ मुंबई आए तो थे दर्जी बनने, लेकिन बन गए अव्वल दर्जे के निर्देशक।
दरअसल के. आसिफ अभिनेता नजीर हुसैन के भतीजे थे। जब आसिफ मुंबई आए तो शुरू में तो नजीर ने उन्हें फिल्मों से जोड़ने की कोशिश की लेकिन आसिफ का वहां दिल न लगा। आसिफ साहब के लिए दुकान तक खुलवाई गई लेकिन कुछ दिन बाद वह भी बंद हो गई।