मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां, मौसिकी की दुनिया का वो चमकता नाम हैं, जिसकी दमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है। गायिकी के इतिहास में दुनिया को ये नाम आज भी याद है। नूजहां से जुड़े वैसे तो कई किस्से हैं, जो अबतक अनसुने और अनकहे हैं, लेकिन एक घटना ऐसी है जो उनके नाम से लिपटी है। जब-जब नूरजहां का जिक्र होता है, लोग इसे लोग दोहरा ही देते हैं। वैसे तो नूर की शोहरत, आवाज और नाम की कोई सीमा नहीं थी, लेकिन वो ब्रिटिश भारत में पैदा हुई थीं जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। अविभाजित भारत में जन्म लेने के कारण उन्हें हिंदुस्तान में भी उतना ही चाहा जाता है। खुद गायिका को भी इस देश से बहुत लगाव था। क्योंकि वे कभी स्वीकार ही नहीं कर पाईं कि हम अलग हो गए हैं। उनका मानना था कि सीमाएं हमें जुदा नहीं कर सकती हैं।