हाल ही में एक इवेंट के सिलसिले में दिल्ली आईं विद्या बालन ने एक खुशनुमा वक्त बिताया ‘रूपायन कवर वुमन’ बन चुकीं कुछ लड़कियों के साथ और साझा किए कुछ विचार। लिखी एक चिट्ठी भी।
रूपायन की मेरी बहुत-बहुत प्यारी दोस्तों,
अमर उजाला ‘रूपायन’ के जरिए हमारा यह सीधा संवाद हो पा रहा है, इसके लिए मैं अमर उजाला की बहुत-बहुत आभारी हूं। हम सबके सपने होते हैं और होने भी चाहिए। हमें ही तो कायनात ने ये खूबी बख्शी है कि हम सपने देख सकें। सपने दरअसल होते ही हैं हमें, कुछ नया, कुछ बड़ा कर दिखाने के लिए। छोटे शहरों, कस्बों और महानगरों जैसा बंटवारा सपनों में नहीं होता। सब सपने देख सकते हैं और सब इन्हें सच भी कर सकते हैं। बस, इन्हें सच करने के लिए लगातार मेहनत और लगातार हौसला बनाए रखना पहली शर्त है।
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मैं अपने चाहने वालों के साथ वैसे भी जब भी कभी मौका मिलता है, तो वक्त जरूर गुजारती हूं। इससे दो बातें होती हैं, एक तो हमें अपने बारे में वह जानने में मदद मिलती है, जो हम अपने बारे में नहीं जानते। ये बात पढ़ने में अटपटी लगती है। हम सबको लगता है कि हम अपने बारे में सब कुछ जानते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं।
हमें अपने आसपास एक-दो लोग ऐसे जरूर पनपने देने चाहिए, जो हमें हमारे बारे में, हमारे व्यवहार के बारे में और हमारे काम के बारे में सच-सच बता सकें। ऐसा न होने पर हम अपना सुधार कर नहीं पाते हैं। दूसरी बात यह है कि अनजान लोगों से मिलने से ही हमें नई बातें पता लगती हैं।
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अगर हमारे मित्रों का, रिश्तेदारों का, सहकर्मियों का एक तय दायरा है, तो फिर हम जीवन के बारे में नया कम ही जान पाते हैं। कोशिश होनी चाहिए कि हम नए लोगों से मिलें, नए लोगों से बातचीत करें। इससे हमें जीने का नया फलसफा समझ आता है। अभी मैं दिल्ली में अमर उजाला ‘रूपायन’ की कुछ कवर गर्ल्स से मिली। मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि कोई अखबार ऐसा भी है कि जो आम लोगों के बीच से मॉडल तलाशता है और तलाशता ही नहीं, बल्कि उन्हें कवर गर्ल भी बनाता है।
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हम सब कवर गर्ल्स ही तो हैं, आम परिवारों में पली बढ़ी ये लड़कियां। हमें अपने संस्कार भी बनाए रखने होते हैं और बदलते जमाने के हिसाब से खुद को हर तरह के संघर्ष के लिए भी तैयार रखना होता है। कहने में यह बहुत आसान होता है, लेकिन नहीं, हमें इसके लिए घर से ही तैयारी शुरू करनी होती है।
एक बात तो यह तय मान लीजिए कि अगर आपके मन में कुछ बनने का ख्याल आया है, तो वह यूं ही नहीं आया है। इसके पीछे जरूर आपकी कोई ऐसी काबिलियत होती है, जिसके बारे में बस आप ही जानती हैं और हो सकता है कई बार नहीं भी जानती हों। इसी मोड़ पर बस कहीं, कोई एक ऐसा इंसान आपके जीवन में टकरा जाता है, जो हमारे हुनर की सही राह दिखा देता है। मैं यानी सुलु भी ऐसी ही हूं। आरजे हूं। आवाज में मदहोशी मिलाकर दर्शकों को रिझाती हूं। और ये कामयाबी कैसे मिलती है, इसे देखने के लिए आपको ये फिल्म देखने के लिए बुलाती हूं। आएंगी न, आप!