जब बात प्रेम की होती है, तो लोगों को ताजमहल और वैलेंटाइंस डे याद आता है। और जब बात खूबसूरती की होती है, तो ऐसा हो नहीं सकता कि मधुबाला का जिक्र ना हो। यह दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। जिस दिन को हम प्रेम दिवस के रूप में मनाते हैं, उसी दिन मधुबाला ने इस दुनिया में सांसें लेना शुरू किया था। जब बात मधुबाला की होती है, तो इनके अभिनय और फिल्मों की बातें बाद में शुरू होती हैं, सबसे पहले चर्चा शुरु होती है इनकी खूबसूरती से। हिंदी सिनेमा की मधुबाला ही एकमात्र अभिनेत्री ऐसी थीं जिनकी खूबसूरती की तुलना हॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री मैरिलिन मुनरो से की जाती है। मधुबाला को 'द वीनस क्वीन ऑफ इंडियन सिनेमा', 'द ब्यूटी विद ट्रेजेडी' जैसे तमगों से भी जाना जाता है। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके कुछ खूबसूरत किरदारों के बारे में बताते हैं।
किरदार : गंगा
फिल्म : नीलकमल (1947)
मधुबाला का रुझान अभिनय की तरफ तो बचपन से ही था, क्योंकि इस फिल्म से पहले भी वह बाल कलाकार के रूप में कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं। इस फिल्म में पहली बार मात्र 14 वर्ष की उम्र में मधुबाला ने मुख्य भूमिका में एक वयस्क नायिका का बेहतरीन किरदार निभाया था। इतनी कम उम्र में पर्दे पर प्रेम दर्शाना और अपनी भावनाओं को बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित कर देना, बहुत बड़ी बात है।
किरदार : कामिनी
फिल्म : महल (1949)
सही मायने में मधुबाला को रातों-रात सुपरस्टार बनाने का काम इसी फिल्म ने किया था। इस फिल्म में कामिनी का किरदार सबसे पहले उस समय की बेहतरीन अदाकारा सुरैया के खाते में गया था। लेकिन मधुबाला का भाग्य ही समझो कि सुरैया से छूट कर यह किरदार मधुबाला तक पहुंचा। कमाल अमरोही के निर्देशन और निर्माण में बनी इस फिल्म ने ही सबसे पहले पुनर्जन्म का परिचय सिनेमा में कराया था।
किरदार : तराना
फिल्म : तराना (1951)
मधुबाला और दिलीप कुमार की जोड़ी ने मिलकर हिंदी सिनेमा में इतिहास बनाया है, और इस इतिहास की नींव इसी फिल्म से रखी गई। क्योंकि इस फिल्म में ही पहली बार मधुबाला और दिलीप कुमार एक साथ नजर आए। इस फिल्म में मधुबाला का नाम तराना है, और उन्होंने गांव की एक भोली-भाली खूबसूरत लड़की का किरदार निभाया है। दिलीप कुमार का किरदार मोतीलाल गांव में पनाह लेता है, और दोनों में प्यार हो जाता है। अब जब फिल्म में मधुबाला हैं, तो प्यार होना तो लाजमी है।
किरदार : अनीता वर्मा
फिल्म : मिस्टर एंड मिसेज 55 (1955)
मधुबाला की बेहतरीन अदाकारी का नमूना इस फिल्म में भी देखने को मिला। यहां उन्होंने एक रईस औरत अनीता वर्मा का किरदार निभाया है, जो एक बड़ी प्रॉपर्टी की वारिस है। उन्होंने अपने किरदार के साथ इस फिल्म में अपनी अदाकारी से रोमांस और कॉमेडी का खूब तड़का लगाया है। अनीता प्रीतम (गुरुदत्त) से प्यार करने लगती है, और फिर कहानी में बहुत सारे उतार-चढ़ाव आते हैं।
किरदार : आशा
फिल्म : काला पानी (1958)
फिल्म के नाम से लगता है जैसे कि यह कोई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म होगी, लेकिन असल में यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है। फिल्म में मधुबाला एक पत्रकार आशा की भूमिका में हैं, जो एक होम स्टे भी चलाती। वक्त की मार झेलकर करण (देव आनंद) जब आशा के पास आता है, तो वह दिल खोलकर उसकी मदद करती है। धीरे-धीरे दोनों में प्यार भी पनप जाता है।
किरदार : एड्ना
फिल्म : हावड़ा ब्रिज (1958)
फिल्म को फिल्माया तो बहुत गंभीर तरीके से है, लेकिन अंत में याद सिर्फ 'आइए मेहरबान' रहता है। क्योंकि इस फिल्म में मधुबाला ने एक कैबरेट गायक का किरदार निभाया है, दर्शकों को जितना सुकून उनका यह पांच मिनट का गाना सुनने में आता है, उतना सुकून तो पूरी फिल्म देखकर भी नहीं मिलता। फिल्म के निर्देशक शक्ति सामंथा ने खुद बोला है कि इस फिल्म में 'आइए मेहरबान', जोकि मधुबाला पर फिल्माया गया है, फिल्म की सबसे अच्छी चीज है।
किरदार : रेनू
फिल्म : चलती का नाम गाड़ी (1958)
प्यार, मोहब्बत में जब कॉमेडी का तड़का लगता है, तो मजा दोगुना हो जाता है। इस फिल्म में मधुबाला रेनू के किरदार में हल्की सी गुस्सैल और हल्की सी हंसमुख लड़की के किरदार में नजर आईं। उनके साथ में उनके भविष्य के पति किशोर कुमार फिल्म की मुख्य भूमिका में नजर आए। इस कॉमेडी फिल्म में दोनों के बीच की तकरार में दर्शकों को बड़ा मजा आया।
किरदार : शबनम
फिल्म : बरसात की रात (1960)
मधुबाला के लिए यह साल बहुत ही लाजवाब रहा, क्योंकि उन्होंने अपने करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म इसी साल में की। इसकी शुरुआत 'बरसात की रात' से ही हुई, जिसमें उन्होंने अभिनेता भारत भूषण के साथ काम किया है। यह शबनम की कहानी है जो एक आजाद और अपने पैरों पर खड़ी होने वाली लड़की है। वह अपने सारे फैसले खुद ही करना चाहती है। उस समय में महिलाओं को जितनी छूट दी जाती थी, इस फिल्म में मधुबाला कई ज्यादा आगे नजर आईं।
किरदार : अनारकली
फिल्म : मुगल ए आजम (1960)
मधुबाला का नाम आते ही सबसे पहले लोगों के जेहन में अनारकली की छवि आती है। अनारकली के किरदार में ही मधुबाला को सबसे ज्यादा दर्शकों से प्यार और दुलार मिला। इस फिल्म में मधुबाला ने अकबर (पृथ्वीराज कपूर) के दरबार में बगावत करने वाली जिस लड़की का किरदार निभाया उससे सभी लोग परिचित हैं। सलीम (दिलीप कुमार) को उससे प्यार हो जाता है, और उसके लिए वह अपने पिता से भी बगावत करने के लिए तैयार रहता है। इस फिल्म के साथ मधुबाला ने अपनी खूबसूरती के साथ अपने अभिनय का हुनर भी पूरी दुनिया को दिखा दिया था।
किरदार : रजनीदेवी / आशा
फिल्म : हाफ टिकट (1962)
कालीदास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मधुबाला रजनीदेवी के किरदार में एक सीधी-साधी औरत के रूप में नजर आईं। फिल्म पूरी तरह एक ट्रेन पर ही गुजर जाती है। क्योंकि जैसा फिल्म का नाम है, फिल्म के मुख्य कलाकार विजय (किशोर कुमार) पैसे ना होने की वजह से हाफ टिकट पर ही अपना सफर तय करता है। ट्रेन में ही उसे रजनीदेवी मिलती है, और उनसे प्यार हो जाता है।