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अचानक क्यों 71 साल पुराने आरके स्टूडियो को बेचने के लिए मजबूर हुआ कपूर खानदान?

Fri, 03 May 2019 05:15 PM IST
शिप्रा सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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rk-studio - फोटो : RK studio
71 साल पुराना आरके स्टूडियो अब इतिहास बन चुका है। बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में देने वाले आरके स्टूडियो को गोदरेज प्रॉपर्टीज ने खरीद लिया है। कहा जा रहा है कि गोदरेज अब इस जमीन पर लग्जरी फ्लैट बनाएगी। आरके स्टूडियो कपूर खानदान की धरोहर थी ऐसे में इसका बिकना बेशक कपूर खानदान के लिए तकलीफ दायक होगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि कपूर खानदान ने अपनी धरोहर को बेच दिया। जानिए इसके पीछे की असली वजह?
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आरके स्टूडियो - फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कपूर ने मुंबई के चेंबूर में 1948 में इस स्टूडियो की स्थापना की थी। यह स्टूडियो कपूर परिवार द्वारा निर्मित कई फिल्मों का गवाह रहा है। 16 सितंबर, 2017 को 'सुपर डांसर' शो के दौरान इसमें आग लग गई थी हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था।
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Kapoor family and RK studio - फोटो : file photo
ऋषि कपूर ने नई तकनीक के साथ इसके पुनर्निर्माण की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं होगा। रणधीर कपूर ने कहा कि हां हमने आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया है। यह अब बिक्री के लिए है।

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RK studio
स्टूडियो बेचने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि ईस्टर्न मुंबई में बना यह स्टूडियो अब फिल्मकारों की पसंद नहीं रहा। ज्यादातर लोग अब अंधेरी और गोरेगांव में शूटिंग करना पसंद करते हैं। ऐसे कई कारण हैं जो अब पूरे कपूर परिवार ने इस प्रसिद्ध आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया। 
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rishi kapoor and ranbir kapoor - फोटो : twitter
आरके स्टूडियो को बेचने के फैसले पर ऋषि कपूर ने कहा था- 'हमने अपने दिलों पर पत्थर रखकर और सोच-समझकर यह फैसला लिया है। हम सभी भाई एक-दूसरे से काफी जुड़े हैं लेकिन हमारे बच्चे और पोते क्या ऐसा कर पाएंगे? हम नहीं चाहते कि हमारे पिता के प्यार की निशानी किसी कोर्ट रूप का ड्रामा बने।'
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420 film scene - फोटो : file photo
आरके के बैनर तले 'आग', 'बरसात', 'आवारा', 'श्री 420', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'मेरा नाम जोकर', 'बॉबी', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'राम तेरी गंगा मैली' जैसी सुपरहिट फिल्में बनी थीं। राज कपूर का 1988 में जब निधन हुआ था, तो उनके बड़े बेटे रणधीर कपूर ने इसका जिम्मा संभाला। इसके बाद उनके भाई राजीव कपूर ने यहीं 'प्रेम ग्रंथ' का निर्देशन किया था। इस स्टूडियो में बनी आखिरी फिल्म थी ‘आ अब लौट चलें।’
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