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Films on Mental Health: मेंटल हेल्थ जैसी गंभीर समस्याओं पर बात करती हैं ये फिल्में, इन बीमारियों के बारे में जानें पूरी डिटेल

Fri, 22 Apr 2022 09:13 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मेंटल हेल्थ पर बनी फिल्में - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज का आईना भी है, जो समय-समय पर गंभीर विषयों को बड़े पर्दे पर प्रदर्शित करता है। फिल्मों के ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जिन्होंने लोगों से जुड़े उन मुद्दों को दिखाया है, जिस पर बात करना बहुत जरूरी है। इन्हीं मुद्दों में से एक है मेंटल हेल्थ यानी मानसिक स्वास्थ्य। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने इस विषय को गंभीर माना है और अपनी फिल्म के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है। आज हम आपको उन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मेंटल हेल्थ पर बनी है।
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फिल्म-छिछोरे - फोटो : सोशल मीडिया
छिछोरे (डिप्रेशन)
फिल्म छिछोरे डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या पर बात करती है। अक्सर देखा जाता है कि डिप्रेशन पर लोग खुलकर बात नहीं करते। यह एक गंभीर समस्या है, जो किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है। सुशांत सिंह राजपूत की इस फिल्म में डायरेक्टर नितेश तिवारी ने इस समस्या को अलग अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। कॉलेज लाइफ पर आधारित इस फिल्म को लोगों ने बहुत पसंद किया था। यह सुशांत सिंह राजपूत के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक है।
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डियर जिंदगी - फोटो : सोशल मीडिया
डियर ज़िंदगी (डिप्रेशन)
फिल्म डियर जिंदगी आलिया भट्ट के करियर की सबसे अच्छी फिल्मों में से एक है। यह फिल्म भी डिप्रेशन बीमारी के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म में आलिया को डिप्रेशन से जूझता हुआ दिखाया गया है। वहीं, शाहरुख खान ने इस फिल्म में मनोचिकित्सक की भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन गौरी शिंदे ने किया था।

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फिल्म डियर जिंदगी का एक सीन - फोटो : सोशल मीडिया
क्या होता है डिप्रेशन?
इस बारे में मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, 'डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक समस्या है जिसमें इंसान का मन लगातार दुखी रहता है। उसे खुद के प्रति नकारात्मक विचार आने लगते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि पसंदीदा कामों से भी लोगों की रुचि खत्म हो जाती है।'
कैसे पाएं इससे निजात?
डॉ सत्यकांत के मुताबिक इसका प्रभावी इलाज संभव है। डिप्रेशन का पता चलने पर मरीजों का उपचार एंटीडिप्रेसेंट दवाओं से किया जाता है। इसके साथ ही मरीजों की काउंसलिंग भी की जाती है। 
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फिल्म-कार्तिक कॉलिंग कार्तिक - फोटो : सोशल मीडिया
कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (सिजोफ्रेनिया)
इस फिल्म में फरहान अख्तर ने कार्तिक की भूमिका निभाई है जो सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। फिल्म की खास बात यह है कि इसमें कार्तिक के किरदार को ओवर ड्रामेटिक नहीं दिखाया गया है। फिल्म में फरहान को भी आम इंसान की तरह पेश किया गया है, जो अपनी बीमारी से पार पाने की कोशिश में है।
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फिल्म कार्तिक कॉलिंग कार्तिक का एक सीन - फोटो : सोशल मीडिया
सिजोफ्रेनिया के मरीजों में दिखते हैं ये लक्षण?
सिजोफ्रेनिया के बारे में बात करते हुए डॉ सत्यकांत ने बताया, 'इस स्थिति में इंसान को भ्रम होने लगता है। शख्स को यह महसूस होने लगता है कि लोग उसके ही बारे में बातें कर रहे हैं। कई मामलों में मरीजों को आवाजें भी सुनाई देने लगती हैं मानो उससे कोई बात कर रहा हो।' डॉ सत्यकांत के मुताबिक कई गंभीर मामलों में लोगों को वो चीजें भी दिखने लगती है जो नॉर्मल लोगों को नहीं दिखतीं।

क्या है इसका इलाज?
डॉ सत्यकांत के मुताबिक इसका इलाज दवाओं से किया जा सकता है। इस मानसिक विकार के इलाज पर उन्होंने कहा कि इसके इलाज में मरीजों को एंटी साइकोटिक समूह की दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ ही मरीजों की काउंसलिंग भी की जाती है, जिससे मरीज फिर पहले जैसा हो सके। 

 
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हीरोइन - फोटो : सोशल मीडिया
हीरोइन (बाइपोलर डिसऑर्डर)
फिल्म हीरोइन में करीना कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझते हुए दिखाया गया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे इस बीमारी की वजह से करीना का करियर ग्राफ नीचे गिरता चला आता है। इस फिल्म का निर्देशन मधुर भंडारकर ने किया था।

 

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फिल्म-हीरोइन का सीन - फोटो : सोशल मीडिया
बाइपोलर के लक्षण और इलाज
बाइपोलर डिसऑर्डर भी एक गंभीर मानसिक समस्या है। इसमें मूल रूप से दो प्रकार के लक्षण देखे जाते हैं। इस समस्या से जूझ रहे शख्स का मन कभी बहुत ज्यादा प्रसन्न हो जाता है तो कभी बहुत ज्यादा दुखी हो जाता है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि इंसान खुद को सबसे श्रेष्ठ समझने लगता है। डॉ सत्यकांत के अनुसार इस बीमारी का इलाज भी संभव है। बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण पता चलने पर मनोचिकित्सक मरीजों को मूड स्टेबलाइजर ग्रुप की दवाएं देते हैं। इसके अलावा मरीजों की काउंसिलिंग भी की जाती है।

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फिल्म-तमाशा - फोटो : सोशल मीडिया
तमाशा (बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर)
तमाशा रणबीर कपूर के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में रणबीर ने वीर नाम के शख्स की भूमिका निभाई है जो बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित है। फिल्म में वह एक समय लापरवाह मौज मस्ती करने वाले दिखते हैं तो दूसरे पल में शर्मिले, रिजर्व्ड और सुस्त नजर आते है।
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फिल्म तमाशा का एक सीन - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसा हो जाता इंसान का स्वभाव
डॉ सत्यकांत के मुताबिक यह एक व्यक्तित्व का विकार है। इसमें लोगों को अपने भावों पर नियंत्रण नहीं रहता। लोगों के व्यवहार में बदलाव, मूड स्विंग, खुद को नुकसान पहुंचाना, आक्रमक हो जाना इसके मुख्य लक्षण है। 

क्या इसका इलाज संभव है?
बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का पता चलने पर इसका इलाज किया जा सकता है। इसमें मूड स्टेबलाइजर ग्रुप की दवाओं से मरीजों का उपचार किया जाता है साथ ही साइकोथेरेपी से मरीजों की समस्या को दूर किया जाता है।
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